बेंगलुरु की सुलगती राजनीतिक जमीन पर एक बार फिर बयानों के तीर चलने लगे हैं। द फ्रीलान्स की ऑन-द-ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम के पास मौजूद ताजा तथ्यों के मुताबिक, केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने राज्य के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर सीधा और तीखा हमला बोला है। एक तरफ जहां प्रशासनिक और भू-राजनीतिक मोर्चे पर जुबानी जंग चरम पर है, वहीं दूसरी ओर कुमारस्वामी की कार्यशैली के अलग-अलग रंग भी इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं।
NICE प्रोजेक्ट और किसानों के मुआवजे का मुद्दा
कर्नाटक में नंदी इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइजेज (NICE) प्रोजेक्ट को लेकर विवाद पुराना है, लेकिन केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने इसे नए सिरे से हवा दे दी है। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि जिन किसानों की जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित की गई थी, उन्हें आज तक पूरा मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने डी.के. शिवकुमार पर बेनामी फर्मों के जरिए इस प्रोजेक्ट को हथियाने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया है। हमारी फील्ड रिपोर्ट के अनुसार, कुमारस्वामी ने चुनौती दी है कि वे इस पूरे घोटाले के पुख्ता सबूत जनता के सामने लाएंगे और सरकार को अवैध टोल कलेक्शन तुरंत बंद करना चाहिए।
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KPSC बयानबाजी पर तीखी प्रतिक्रिया
विवादों का सिलसिला यहीं नहीं थमता। कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) से जुड़े एक हालिया बयान को लेकर कुमारस्वामी ने डी.के. शिवकुमार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस बयान को 'मूर्खता और गैर-जिम्मेदारी की पराकाष्ठा' करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य के इन दो कद्दावर नेताओं के बीच चल रहा यह वाकयुद्ध आने वाले दिनों में और विकराल रूप ले सकता है, जिससे राज्य की प्रशासनिक स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच EVs का टेस्ट ड्राइव
एक तरफ जहां राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज है, वहीं केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने हाल ही में ऑटोमोबाइल सेक्टर में कदम बढ़ाते हुए Tata Harrier.ev और Kia Carens Clavis EV का खुद टेस्ट ड्राइव लिया। भारी उद्योग मंत्रालय संभालने के नाते इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के प्रति उनकी यह रुचि और उद्योग जगत को बढ़ावा देने की उनकी यह पहल तकनीकी गलियारों में खासी पसंद की जा रही है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ है।
भविष्य का राजनीतिक प्रभाव और निष्कर्ष
द फ्रीलान्स के विश्लेषण के अनुसार, एच.डी. कुमारस्वामी और डी.के. शिवकुमार के बीच का यह संघर्ष केवल व्यक्तिगत बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कर्नाटक के सत्ता समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर रहा है। एक तरफ जनता से जुड़े जमीनी मुद्दों जैसे किसानों के मुआवजे और अवैध टोल वसूली को उठाकर कुमारस्वामी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ नीतिगत मामलों (जैसे EV सेक्टर) में सक्रिय रहकर वे एक जिम्मेदार प्रशासक की छवि भी पेश कर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में NICE प्रोजेक्ट पर उनके 'सबूतों के खुलासे' पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।




