सुबह की पहली किरण के साथ सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा एक्शन
देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर सीमावर्ती राज्यों में पनप रहे आतंकी नेटवर्कों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के मंगलकोट इलाके में तड़के एक सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया। जांच टीम ने पलिशग्राम गांव में स्थित एक स्थानीय मस्जिद के इमाम को हिरासत में लिया और लंबी पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। इस पूरी कार्रवाई से स्थानीय इलाकों में भारी सनसनी फैल गई है और सुरक्षा एजेंसियां अब इस मॉड्यूल की गहराई से थाह लेने में जुटी हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, एनआईए की एक विशेष चार सदस्यीय टीम ने अहले सुबह करीब साढ़े चार बजे पलिशग्राम के पुरापाड़ा इलाके को घेर लिया। यह क्षेत्र नंबर-2 शिमुलिया पंचायत के अंतर्गत आता है। जांच अधिकारियों का मुख्य निशाना यहां की बड़ो मस्जिद के इमाम पियार मोहम्मद शेख थे। स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, जब इमाम साहब सुबह की नमाज अदा कर मस्जिद से बाहर निकल रहे थे, तभी केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया और आगे की पूछताछ के लिए तुरंत मंगलकोट पुलिस स्टेशन ले जाया गया।
"सुबह-सुबह अचानक एनआईए की टीम गांव में आ पहुंची और मस्जिद के बाहर से ही इमाम को अपने साथ ले गई। हमें इस बात की बिल्कुल भनक नहीं थी कि ऐसा कुछ होने वाला है। टीम ने वहां से कुछ कागजात और इलेक्ट्रॉनिक सामान भी अपने कब्जे में लिए हैं।" — शेख गोलाम मुस्तफा, स्थानीय निवासी
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कौन है गिरफ्तार इमाम पियार मोहम्मद शेख?
जांच के दायरे में आए पियार मोहम्मद शेख मूल रूप से पूर्व बर्धमान जिले के ही मंतेश्वर थाना क्षेत्र के कुलुट गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वह पिछले करीब तीन वर्षों से पलिशग्राम की इसी मस्जिद में बतौर इमाम अपनी सेवाएं दे रहे थे। स्थानीय स्तर पर वह पूरी तरह धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय नजर आते थे, लेकिन अंदरखाने उनकी संदिग्ध गतिविधियों की सुगबुगाहट सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच चुकी थी। जांच एजेंसियों के हाथ लगे शुरुआती इनपुट के बाद उनके पिछले इतिहास को खंगाला जा रहा है।
खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पियार मोहम्मद शेख अपने तीन साल के कार्यकाल के दौरान एक बार बांग्लादेश की यात्रा पर भी गए थे। एनआईए अब इसी यात्रा और वहां उनके संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात किसी प्रतिबंधित संगठन के शीर्ष कमांडरों या हैंडलर्स से हुई थी। इसके अलावा, उनके बैंक खातों और आर्थिक लेनदेन की भी बारीकी से जांच की जा रही है ताकि विदेशी फंडिंग या स्थानीय स्तर पर मिलने वाले समर्थन का पर्दाफाश किया जा सके।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पुलिस स्टेशन में करीब छह घंटे तक चली मैराथन पूछताछ के बाद अंततः एनआईए ने उन्हें गिरफ्तार करने का आधिकारिक फैसला लिया। पूछताछ के दौरान उनके मोबाइल फोन और एक डायरी को जब्त किया गया है, जिसमें कई संदिग्ध नंबर और कोडवर्ड मिलने की बात सामने आ रही है। इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
जेएमबी के खतरनाक ऑफशूट 'इमाम महमुदर काफिला' से कनेक्शन का शक
यह पूरी कार्रवाई प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) के एक गुप्त और खतरनाक ऑफशूट 'इमाम महमुदर काफिला' (IMK) की साजिशों की जांच का हिस्सा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संगठन पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल के युवाओं को लगातार अपने पाले में खींचने और उन्हें देश विरोधी गतिविधियों के लिए उकसाने का काम कर रहा था। ऑनलाइन माध्यमों और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए युवाओं की ब्रेनवाशिंग की जा रही थी।
एनआईए ने हाल ही में इसी मामले से जुड़े 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ एक मजबूत चार्जशीट भी दाखिल की थी। एजेंसी का मुख्य फोकस इस बात की तह तक जाना है कि क्या पश्चिम बंगाल और असम के बीच कोई संगठित टेरर कॉरिडोर काम कर रहा था। प्रारंभिक पड़ताल में यह भी सामने आया है कि गुवाहाटी या असम के अन्य हिस्सों से जुड़े कुछ मामलों के तार इस नेटवर्क से जुड़ सकते हैं। बहरहाल, इमाम की गिरफ्तारी के बाद कई और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे के लिहाज से देखें तो पश्चिम बंगाल के ये इलाके पहले भी खुफिया एजेंसियों के रडार पर रहे हैं। खासकर साल 2014 के खागड़ागढ़ विस्फोट के बाद से ही सीमावर्ती जिलों में इस तरह की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय धार्मिक संस्थानों की आड़ में इस तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को अंजाम देना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसे नाकाम करने के लिए केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद हैं।
जांच का दायरा बढ़ा, कई राज्यों में चल रही है छापेमारी
मंगलकोट में हुई इस कार्रवाई का दायरा केवल पश्चिम बंगाल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एनआईए ने हालिया दिनों में असम, त्रिपुरा और केरल तक अपने पंख पसारे हैं। हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों से कुल 13 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, जो युवाओं को कट्टरपंथ की राह पर धकेलने के काम में लिप्त थे। इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियां तकनीकी सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही हैं।
आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। एनआईए अब पियार मोहम्मद शेख के उन सभी संपर्कों की कुंडली खंगाल रही है, जो पिछले कुछ महीनों में उनके संपर्क में आए थे। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके। देश की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में हर एक सुराग पर पैनी नजर रखी जा रही है।








