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FSSAI नंबर का सच: पैकेज्ड फूड के पैकेट पर छपे 14 अंकों में छिपा होता है बड़ा राज, ऐसे करें पहचान

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नेस्ले इंडिया के बेबी फूड प्रोडक्ट्स पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस बीच, पैकेट पर छपे 14 अंकों के FSSAI लाइसेंस नंबर को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, जिससे ग्राहक आसानी से असली और नकली सामान की पहचान कर सकते हैं।
The Freelance ब्यूरो
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19 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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FSSAI नंबर का सच: पैकेज्ड फूड के पैकेट पर छपे 14 अंकों में छिपा होता है बड़ा राज, ऐसे करें पहचान
📷 FSSAI नंबर का सच: पैकेज्ड फूड के पैकेट पर छपे 14 अंकों में छिपा होता है बड़ा राज, ऐसे करें पहचान — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • FSSAI ने नेस्ले इंडिया के बेबी फूड प्रोडक्ट्स के नमूनों में मानकों की कमी और गलत प्रचार को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
  • पैकेज्ड फूड के पैकेट पर दिखने वाले 14 अंकों के नंबर से यह पता चलता है कि संबंधित कारोबार के पास लाइसेंस है या रजिस्ट्रेशन।
  • इन 14 अंकों के जरिए राज्य का कोड, जारी करने का साल और संबंधित अधिकारी की जानकारी आसानी से हासिल की जा सकती है।

FSSAI की सख्त कार्रवाई के बाद चर्चा में आया 14 अंकों का कोड

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला दिग्गज कंपनी नेस्ले इंडिया के तीन बेबी फूड प्रोडक्ट्स से जुड़ा हुआ है, जिन पर प्राधिकरण ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान एक फॉलो-अप फॉर्मूला के सैंपल में बायोटिन यानी विटामिन बी7 की मात्रा तय मानकों से कम पाई गई है। इसके अलावा, नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 और लैक्टोजन प्रो 1 के प्रचार से जुड़े दावों को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से आम उपभोक्ताओं का ध्यान उस बेहद महत्वपूर्ण जानकारी पर गया है, जिसे अमूमन लोग खरीदते वक्त नजरअंदाज कर देते हैं।

बाजार से जब भी हम चिप्स, बिस्किट, जूस या अन्य कोई भी पैकेज्ड फूड खरीदते हैं, तो हमारा ध्यान सबसे पहले उसकी कीमत, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट पर जाता है। बहुत कम लोग होते हैं जो पैकेट के किसी कोने में लिखे 14 अंकों के FSSAI नंबर पर गौर करते हैं। लोगों को लगता है कि यह महज कोई औपचारिकता या सरकारी खानापूर्ति है। लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। यह 14 अंकों का कोड आपके स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई राज की बातें खोलता है।

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क्या सच में सिर्फ एक नंबर है या इसमें छिपा है पूरा इतिहास?

क्या आपने कभी सोचा है कि खाने के पैकेट पर छपने वाले इन 14 नंबरों का असल मतलब क्या होता है? यह केवल कोई साधारण पहचान संख्या नहीं है, बल्कि इसके अलग-अलग हिस्सों में खाद्य कारोबार के लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन से जुड़ी तमाम बारीक जानकारियां छिपी होती हैं। FSSAI के नियमों के मुताबिक, देश में बनने या बिकने वाले हर पैकेटबंद खाद्य उत्पाद के लिए यह नंबर देना अनिवार्य होता है। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित उत्पाद एक वैध और पंजीकृत इकाई द्वारा तैयार किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं को जागरूक होना बेहद जरूरी है। जब तक आम जनता इन तकनीकी बारीकियों को नहीं समझेगी, तब तक मिलावटी या गैर-कानूनी ढंग से बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थों पर पूरी तरह लगाम नहीं लगाई जा सकती है। यह 14 अंकों का कोड ग्राहकों के लिए एक सशक्त हथियार की तरह काम करता है, बशर्ते वे इसे पढ़ना और समझना जानते हों। आइए इसके हर एक अंक की गहराई से पड़ताल करते हैं।

पहले अंक से जानें कि बिजनेस के पास लाइसेंस है या रजिस्ट्रेशन

इस 14 अंकों के कोड की शुरुआत बेहद दिलचस्प तरीके से होती है। नंबर का सबसे पहला अंक यह बताता है कि संबंधित खाद्य कारोबार के पास FSSAI का लाइसेंस है या फिर उसने केवल रजिस्ट्रेशन कराया है। खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, यदि यह 14 अंकों का नंबर '1' से शुरू होता है, तो इसका मतलब है कि संबंधित फूड बिजनेस ऑपरेटर के पास FSSAI का पूर्ण लाइसेंस है। वहीं, अगर यह नंबर '2' से शुरू होता है, तो यह इस बात का संकेत है कि कारोबार के पास केवल FSSAI का रजिस्ट्रेशन नंबर है।

छोटे स्तर पर काम करने वाले वेंडर या ढाबा संचालक अक्सर रजिस्ट्रेशन लेते हैं, जबकि बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग या डिस्ट्रीब्यूशन करने वाली कंपनियों को लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है। इस तरह, सिर्फ पहला अंक देखकर ही आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि उस बिजनेस का दायरा कितना बड़ा है और वह किस कैटेगरी के तहत काम कर रहा है।

राज्य और साल की जानकारी देता है बीच का हिस्सा

इस 14 अंकों के क्रम में दूसरे और तीसरे अंक की अपनी खास अहमियत होती है। ये दोनों अंक संबंधित राज्य, केंद्र शासित प्रदेश या केंद्रीय लाइसेंसिंग अथॉरिटी के कोड को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि उत्पाद किसी खास राज्य में बना है, तो उस राज्य का निर्धारित कोड इन दो अंकों में दर्ज होगा। इससे यह पता लगाने में आसानी होती है कि संबंधित फूड आइटम देश के किस हिस्से से बनकर आया है।

"खाद्य सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।" — खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञ

इसके ठीक बाद आने वाले चौथे और पांचवें अंक उस वर्ष को दर्शाते हैं, जिसमें संबंधित कारोबारी को लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन जारी किया गया था। मान लीजिए कि कोई लाइसेंस साल 2022 में बना है, तो इन अंकों से वह वर्ष स्पष्ट हो जाता है। इसके बाद के छठे से लेकर आठवें अंक तक तीन अंकों का एक खास कोड होता है, जो संबंधित डेजिग्नेटेड ऑफिसर यानी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के जिम्मेदार अधिकारी के कार्यक्षेत्र से जुड़ा होता है।

आखिरी छह अंक और एक ग्राहक के तौर पर आपकी जिम्मेदारी

इस 14 अंकों के नंबर के आखिरी छह अंक पूरी तरह से यूनिक सीरियल नंबर होते हैं। ये नंबर उस खास लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन को एक अलग पहचान देते हैं ताकि रिकॉर्ड में कोई गड़बड़ी न हो। इस प्रकार, पूरा 14 अंकों का यह कोड किसी भी खाद्य कारोबार की कुंडली की तरह काम करता है। हालांकि, ग्राहकों को यह समझना होगा कि सिर्फ FSSAI नंबर देख लेने मात्र से ही किसी उत्पाद को शत-प्रतिशत सुरक्षित नहीं माना जा सकता। यह नंबर मुख्य रूप से कारोबार के कानूनी रूप से वैध होने की पुष्टि करता है।

सामान खरीदते वक्त FSSAI नंबर के अलावा पैकेट पर दी गई अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी जरूर पढ़नी चाहिए। इसमें सामग्री की सूची, बैच नंबर, शाकाहारी या मांसाहारी होने का निशान और एलर्जी से जुड़ी चेतावनी शामिल होती है। अगली बार जब भी आप बाजार जाएं, तो सिर्फ ब्रांड के नाम और कीमत पर ही भरोसा न करें, बल्कि उस छोटे से 14 अंकों के कोड पर भी नजर जरूर डालें। जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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