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तो फिर 0.4% चार्ज की चर्चा कहां से शुरू हुई?
इस पूरे मामले की जड़ मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) और प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI - यानी डिजिटल वॉलेट) से जुड़ी है। इसे समझना बेहद आसान है:
- यह चार्ज ग्राहकों के लिए नहीं, मर्चेंट के लिए है: जब कोई ग्राहक किसी बड़े ई-कॉमर्स पोर्टल, बड़े सुपरमार्केट या पेट्रोल पंप पर ₹2,000 से अधिक का भुगतान अपने डिजिटल वॉलेट (जैसे पेटीएम वॉलेट, फोनपे वॉलेट) के जरिए यूपीआई पर करता है, तो बैंक और नेटवर्क प्रोवाइडर उस बड़े मर्चेंट से एक इंटरचेंज फीस लेते हैं।
- बैंक-टू-बैंक ट्रांसफर पर शून्य चार्ज: यदि ग्राहक अपने बैंक अकाउंट (Savings Bank Account) से सीधे यूपीआई क्यूआर कोड स्कैन करता है, तो वहां इंटरचेंज चार्ज शून्य (0%) होता है।
- 0.4% दर किसके लिए? सरकार और एनपीसीआई की सिफारिशों के मुताबिक, कुछ चुनिंदा श्रेणियों (जैसे यूटिलिटी बिल, शिक्षा, सरकारी सेवाएं) में बड़े मर्चेंट्स के लिए कैप की गई दर 0.4% से 0.5% रखी जाती है, ताकि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिले।
यूपीआई पर आम नागरिकों के लिए सभी बुनियादी बैंकिंग लेनदेन पूरी तरह नि:शुल्क हैं। वॉलेट इंटरचेंज के नियम केवल बड़े कॉर्पोरेट मर्चेंट्स पर लागू होते हैं जिसका आम उपभोक्ताओं पर कोई आर्थिक भार नहीं पड़ता।— नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) प्रवक्ता
छोटे दुकानदारों और ठेले-खोमचे वालों पर क्या होगा असर?
देश के करोड़ों छोटे दुकानदार, सब्जी विक्रेता, किराना स्टोर और चाय की दुकानों पर इसका शून्य (Zero) असर पड़ेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि:
- छोटे दुकानदार सामान्य P2P या बैंक-लिंक्ड मर्चेंट QR कोड इस्तेमाल करते हैं, जो सीधे उनके बचत या चालू खाते में पैसा क्रेडिट करता है।
- वॉलेट इंटरचेंज नियम केवल उन कॉर्पोरेट मर्चेंट्स पर लागू होता है जिनका सालाना टर्नओवर बहुत बड़ा होता है और जिन्होंने वॉलेट पेमेंट गेटवे इंटीग्रेट कर रखा है।
- छोटे व्यापारियों को कोई एमडीआर चार्ज नहीं देना होता।
सोशल मीडिया की अफवाहों का Fact-Check
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों की जब द फ्रीलांस की फैक्ट-चेक टीम ने पड़ताल की, तो पाया गया कि 2023 में जारी एनपीसीआई के पुराने वॉलेट इंटरचेंज सर्कुलर को तोड़-मरोड़ कर हर कुछ महीनों में नई तारीख (जैसे 15 अक्टूबर) के साथ दोबारा वायरल कर दिया जाता है।
वित्त मंत्रालय ने भी संसद में यह साफ किया था कि यूपीआई को देश की डिजिटल लाइफलाइन बनाए रखने के लिए सरकार बैंकों को सब्सिडी प्रदान करती है ताकि आम जनता पर किसी भी तरह का ट्रांजैक्शन चार्ज न थोपा जाए।
निष्कर्ष: बेफिक्र होकर करें डिजिटल पेमेंट
यदि आपके पास भी व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर ऐसा कोई मैसेज आया है जिसमें 15 अक्टूबर से यूपीआई पर चार्ज लगने की बात कही गई है, तो उस पर कतई भरोसा न करें और न ही उसे आगे फॉरवर्ड करें। भारत का यूपीआई सिस्टम आज दुनिया का सबसे सुरक्षित, तेज और किफायती पेमेंट नेटवर्क है, और आम उपभोक्ताओं के लिए यह पूरी तरह मुफ्त बना रहेगा।


