शिक्षक बहाली में फर्जीवाड़े की सुगबुगाहट तेज, निगरानी ब्यूरो ने मांगा रिकॉर्ड
देशभर में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वाले लोगों पर शिकंजा कसने की कवायद लगातार जारी है। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए साल 2015 तक टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) और एसटीईटी के आधार पर नियुक्त किए गए सभी शिक्षकों के सत्यापित प्रमाण पत्र विभाग को सौंपने का निर्देश दिया है। इस पूरी प्रक्रिया के पीछे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की वह जांच है जो पिछले कई वर्षों से फर्जी शिक्षक बहाली के मामलों को लेकर चल रही है। अधिकारियों का मानना है कि कई मामलों में मूल और सत्यापित प्रतियां न मिलने के कारण जांच की गति प्रभावित हो रही थी, जिसे अब दुरुस्त किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस निरीक्षक सह सहायक जांचकर्ता ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ स्थापना) को पत्र लिखकर इन तमाम शिक्षकों का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। इसके बाद डीपीओ स्थापना ने जिले की सभी नियोजन इकाइयों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि संबंधित शिक्षकों की सूची के साथ-साथ उनके प्रखंडवार सत्यापित प्रमाण पत्र जल्द से जल्द जमा किए जाएं, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को छुपाया न जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है। जो शिक्षक नियमों के तहत पूरी तरह वैध हैं, उन्हें घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन जिन्होंने गलत दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल की है, उनका बचना अब असंभव होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कागजी कार्रवाई में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में पहले भी सामने आ चुके हैं गंभीर मामले
फर्जी शिक्षक बहाली का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले एक दशक से लगातार इस बात की शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोगों ने कूटरचित दस्तावेजों और फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली है। अकेले मुजफ्फरपुर जिले की बात करें तो वहां 400 से अधिक ऐसे शिक्षकों को चिह्नित किया गया था, जिनके प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे। इनमें से कई शिक्षकों के खिलाफ थानों में प्राथमिकी (एफआईआर) भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन जांच की प्रक्रिया विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक कारणों से अपने अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पाई थी।
अब नए सिरे से टीईटी और एसटीईटी शिक्षकों के रिकॉर्ड मांगे जाने के पीछे मुख्य वजह यह है कि कोर्ट के आदेश के अनुपालन में उन तमाम दस्तावेजों की खोज की जा रही है, जिन पर शुरुआती स्तर पर इन शिक्षकों का नियोजन हुआ था। इनमें उनके शैक्षणिक यानी मैट्रिक, इंटर, स्नातक और प्रशैक्षणिक यानी बीएड, डीएलएड या टीईटी के अंकपत्र व प्रमाण पत्र शामिल हैं। कई मामलों में पहले केवल साधारण प्रतियां जमा कराई गई थीं, जिन्हें अब सत्यापित रूप में मांगा जा रहा है ताकि कोर्ट या जांच एजेंसियों के सामने पुख्ता सबूत पेश किए जा सके।
"शिक्षा विभाग और निगरानी ब्यूरो की यह संयुक्त कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि नौकरी में किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिए गए हैं।" — शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
बदले हालात और प्रमोशन से खड़े हुए नए प्रशासनिक सवाल
इस पूरी जांच प्रक्रिया के सामने आने के बाद एक नया व्यावहारिक संकट भी खड़ा हो गया है। जानकारों के अनुसार, जिन टीईटी और एसटीईटी शिक्षकों के प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं, उनमें से 50 फीसदी से अधिक शिक्षक अब अपने पुराने स्कूलों या जिलों में तैनात ही नहीं हैं। बीते कुछ वर्षों में हुए प्रमोशन और नई चयन प्रक्रियाओं के चलते इनमें से अधिकांश शिक्षक या तो प्रमोट होकर प्रधान शिक्षक बन चुके हैं या फिर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं को पास कर अन्य जिलों में स्थानांतरित हो चुके हैं।
ऐसी स्थिति में जिला स्तर पर अधिकारियों के सामने यह बड़ी चुनौती बन गई है कि जो शिक्षक अब जिले में मौजूद ही नहीं हैं, उनके सत्यापित प्रमाण पत्र और रिकॉर्ड कैसे जुटाए जाएं। कई शिक्षक संघों और स्थानीय शिक्षा कार्यालयों का मानना है कि इसके लिए राज्य स्तर पर एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार करना होगा, तभी उन शिक्षकों का रिकॉर्ड मिल सकेगा जो दूसरे जिलों में जा चुके हैं। फिलहाल, जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा सभी प्रखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को यह निर्देश दिया गया है कि वे हरसंभव प्रयास कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपें।
प्राथमिक विद्यालयों के बीएड शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स अनिवार्य
एक तरफ जहां पुराने शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्राथमिक विद्यालयों में बीएड योग्यता के आधार पर नियुक्त किए गए शिक्षकों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण शैक्षणिक अपडेट सामने आया है। बिहार में प्राथमिक स्कूलों में बीएड के आधार पर नियुक्त कुल 7,569 शिक्षकों को अब अनिवार्य रूप से छह महीने का ब्रिज कोर्स करना होगा। इस कोर्स के बिना इन शिक्षकों की प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति की मान्यता पर संकट आ सकता है।
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, प्राइमरी स्कूलों में बीएड पर नियुक्त कुल 8,290 शिक्षकों ने इस ब्रिज कोर्स को करने के लिए आवेदन किया था। हालांकि, इनमें से 7,845 शिक्षकों के ही आवेदन निर्धारित शुल्क के साथ जमा हो पाए हैं। इसके अलावा राज्यभर में 200 से अधिक ऐसे शिक्षक भी हैं जिनके कागजात और प्रमाण पत्रों की जांच प्रक्रिया अभी तक अधूरी है। कागजात पूरे न होने के कारण ये शिक्षक फिलहाल ब्रिज कोर्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगे, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) के माध्यम से यह ब्रिज कोर्स कराया जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षण कौशल की आवश्यकता होती है, जो सामान्य बीएड पाठ्यक्रम में पूरी तरह शामिल नहीं होता है। यही कारण है कि एनसीटीई और अदालत के दिशानिर्देशों के बाद इस ब्रिज कोर्स को अनिवार्य किया गया है ताकि प्राथमिक स्तर पर बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
कोर्स पूरा करने के लिए एक साल की सख्त समय-सीमा तय
शिक्षकों के लिए यह ब्रिज कोर्स सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इसे बेहद कड़े नियमों के तहत पूरा करना होगा। शिक्षा विभाग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, शिक्षकों को कोर्स शुरू होने की आधिकारिक तारीख से ठीक एक वर्ष के भीतर इसे हर हाल में पूरा करना होगा। इसकी सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण शर्त यह है कि शिक्षक को यह कोर्स एक ही प्रयास में यानी पहली बार में ही सफलतापूर्वक पास करना होगा।
यदि कोई शिक्षक निर्धारित समयावधि के भीतर या एक प्रयास में इस कोर्स को पूरा करने में असफल रहता है, तो उसकी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में नियुक्ति को अमान्य घोषित कर दिया जाएगा। विभाग ने सभी संबंधित शिक्षकों को आगाह किया है कि वे इस कोर्स को पूरी गंभीरता से लें और तय समय सीमा के भीतर अपनी पढ़ाई और परीक्षाएं पूरी करें, ताकि भविष्य में उनकी सेवा पर किसी भी प्रकार का कानूनी या प्रशासनिक संकट न आए।



