दमोह में सरकारी ड्यूटी के दौरान बिजली कर्मियों पर हमला
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक हैरान करने वाली और कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ बिजली विभाग के कर्मचारी जब अपनी रोजमर्रा की सरकारी ड्यूटी निभाने के लिए एक ग्रामीण इलाके में पहुंचे, तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बात इतनी बढ़ गई कि नाराज लोगों ने कर्मचारियों के साथ मारपीट तक कर डाली। यह पूरा मामला दमोह जिले के नोहटा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अधरोटा गांव का है, जहां बिजली बिलों की वसूली और शिकायतों के निपटारे के लिए कर्मचारी पहुंचे थे।
देश के ग्रामीण इलाकों में बिजली विभाग के कर्मचारियों को अक्सर उपभोक्ताओं के गुस्से का सामना करना पड़ता है, लेकिन कई बार यह गुस्सा सीधे तौर पर हिंसा और मारपीट में बदल जाता है। इस ताजा मामले ने एक बार फिर से इस बात को रेखांकित कर दिया है कि मैदानी स्तर पर काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। घटना गुरुवार दोपहर की बताई जा रही है, जिसका खुलासा शुक्रवार को तब हुआ जब पीड़ित कर्मचारियों ने थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
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अधरोटा गांव में ट्रांसफार्मर के पास हुआ विवाद
बिजली कंपनी के कर्मचारी बलराम सिंह लोधी ने पुलिस को दी गई अपनी आधिकारिक शिकायत में विस्तार से बताया है कि यह घटना कैसे घटी। उनके मुताबिक, वह अपने विभाग के उच्च अधिकारियों के सख्त निर्देशों के बाद तीन अन्य साथियों के साथ अधरोटा गांव गए थे। इस टीम का मुख्य उद्देश्य गांव में लंबित पड़े बिजली बिलों की वसूली करना तो था ही, साथ ही ग्रामीणों की बिजली से जुड़ी अन्य शिकायतों का मौके पर ही निराकरण करना भी था ताकि उपभोक्ताओं को कोई असुविधा न हो।
बलराम सिंह लोधी और उनकी टीम जब गांव के मुख्य ट्रांसफार्मर के पास पहुंची, तो वहां कुछ स्थानीय लोग मौजूद थे। कर्मचारियों ने जब अपना काम शुरू करने की कोशिश की, तो कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और बिजली बिल वसूलने से साफ तौर पर मना कर दिया। कर्मचारियों ने जब उन्हें समझाने का प्रयास किया और कहा कि वे केवल अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन कर रहे हैं और सरकारी ड्यूटी पर हैं, तो स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई।
गाली-गलौज से शुरू हुआ विवाद मारपीट तक पहुंचा
प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित कर्मचारियों के अनुसार, बातचीत के दौरान ही आरोपी पक्ष के तेवर अचानक आक्रामक हो गए। उन्होंने कर्मचारियों के साथ पहले अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और खुलेआम गाली-गलौज शुरू कर दी। जब कर्मचारियों ने इसका विरोध किया और अपनी वैध ड्यूटी का हवाला दिया, तो मामला और अधिक बिगड़ गया। आरोप है कि स्थानीय लोगों ने गुस्से में आकर कर्मचारियों के साथ हाथापाई शुरू कर दी और उनके साथ मारपीट की।
यही नहीं, आरोपियों ने कर्मचारियों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी, जिससे वहां दहशत का माहौल बन गया। इस अप्रत्याशित हमले से बिजली कर्मी पूरी तरह घबरा गए। उन्होंने किसी तरह वहां से खुद को बचाया और तुरंत अपने वरिष्ठ अधिकारियों को फोन पर इस पूरी घटना की जानकारी दी। दिनदहाड़े सरकारी कर्मचारियों के साथ हुई इस मारपीट से विभाग के अन्य कर्मचारियों में भी भारी रोष व्याप्त हो गया है।
चार नामजद आरोपियों के खिलाफ नोहटा थाने में शिकायत
घटना की सूचना मिलने के बाद बिजली विभाग के भीतर हलचल मच गई। उच्च अधिकारियों ने तुरंत अपने मातहतों को निर्देश दिए कि बिना किसी दबाव के तुरंत पुलिस थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई कराई जाए। अधिकारियों के इन निर्देशों के बाद पीड़ित कर्मचारी सीधे नोहटा थाने पहुंचे और पुलिस को पूरी घटना की लिखित जानकारी दी।
कर्मचारियों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को नामजद किया है। आरोपियों की पहचान रज्जू सिंह आदिवासी, जागेश्वर मिश्रा, हलके अठया और अनिल सेन के रूप में की गई है। इन सभी पर शासकीय कार्य में बाधा डालने, बलवा करने, मारपीट करने और धमकाने जैसी गंभीर धाराओं के तहत शिकायत दर्ज की गई है। पुलिस अब इन सभी आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रही है।
"हमारे कर्मचारी अधरोटा गांव में बिजली से जुड़ी विभिन्न शिकायतों का निराकरण करने और वैध बिलों की वसूली के लिए गए थे। वहां कुछ स्थानीय लोगों द्वारा हमारे कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट करते हुए शासकीय कार्य में भारी बाधा पहुंचाई गई। हमने इस मामले में थाने में नामजद शिकायत दर्ज करा दी है और पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।" — एमएल साहू, कार्यपालन अभियंता, बिजली कंपनी
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
इस पूरे मामले पर नोहटा थाना पुलिस का कहना है कि बिजली विभाग के कर्मचारियों की शिकायत मिल चुकी है और प्राथमिक जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना के दौरान वास्तव में क्या परिस्थितियां बनी थीं और विवाद की असली वजह क्या थी, इसकी गहराई से पड़ताल की जा रही है। इसके लिए गांव के अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।
पुलिस का यह भी कहना है कि दोनों पक्षों के बयानों को दर्ज किया जा रहा है और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर धाराओं में बढ़ोतरी भी की जा सकती है। शासकीय कर्मचारियों के साथ इस तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त से सख्त एक्शन लिया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर से बिजली कर्मियों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित कर दिया है।






