इस्लामाबाद/लाहौर — पाकिस्तान में शिक्षा के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े ने एक होनहार छात्रा की जान ले ली है। पंजाब प्रांत में फिजिक्स विषय में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली एक प्रतिभावान युवती ने अमेरिका के प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला दिलाने का झांसा दिए जाने के बाद खुदकुशी कर ली है। इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश में उच्च शिक्षा के नाम पर चल रहे ठगों के नेटवर्क और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के परिवार ने पुलिस को बताया कि जालसाजों ने उनकी बेटी को विदेश में पढ़ाई का सुनहरा सपना दिखाया था और धीरे-धीरे करके 93 लाख रुपए ऐंठ लिए थे।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगी का शिकार हुई इस मेधावी छात्रा का परिवार आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं था। जालसाजों के झांसे में आकर परिवार ने अपनी सारी जमापूंजी तो गंवाई ही, साथ ही अपनी पैतृक जमीन भी बेच दी ताकि वे अपनी बेटी की पढ़ाई का खर्च उठा सकें। जब परिवार ने 93 लाख रुपए का भारी-भरकम भुगतान कर दिया, तब अचानक तथाकथित एजेंटों ने संपर्क तोड़ दिया और एडमिशन का कोई भी वैध कागजात नहीं मिला। कॉलेज और यूनिवर्सिटी के स्तर पर जब सच्चाई सामने आई कि वे सब फर्जी दस्तावेज थे, तब छात्रा पर गहरा मानसिक दबाव आ गया और उसने यह极端 कदम उठा लिया।
जमीन बेचकर और कर्ज लेकर जुटाए थे पैसे
पीड़ित परिवार का दर्द बयां करते हुए स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी लगातार बड़े अधिकारियों और विदेशी यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों से संपर्क होने का दावा करते थे। उन्होंने छात्रा को ऐसा विश्वास दिलाया कि उसका चयन हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पक्का हो चुका है और बस कुछ कागजी औपचारिकताएं तथा फीस बाकी है। इस झांसे में आकर परिवार ने अपनी इज्जत और भविष्य बचाने के लिए अपनी जमीन बेच दी और कई लोगों से भारी ब्याज पर कर्ज भी ले लिया। जब पैसे देने के बाद भी वीजा और दाखिले का कोई पत्र नहीं आया और एजेंटों के फोन बंद हो गए, तब छात्रा को समझ आया कि उनके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है।
इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने मुख्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उन फर्जी एजेंटों और कॉल सेंटर्स की तलाश कर रही है जो भोले-भाले छात्रों और उनके अभिभावकों को विदेश भेजने के नाम पर ठगते हैं। पाकिस्तान के शिक्षाविदों और नागरिक समाज ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है और सरकार से मांग की है कि ऐसे फर्जी शैक्षणिक सलाहकारों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े।
छात्रों को ठगने वाले गिरोहों का काला सच
विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखने वाले छात्रों को निशाना बनाने वाले ये फर्जी गिरोह आजकल सोशल मीडिया और विज्ञापनों के जरिए सक्रिय रहते हैं। वे छात्रों की कमजोरी और उनकी काबिलियत का फायदा उठाते हुए उन्हें बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों के नाम पर झूठे ऑफर लेटर थमा देते हैं। इस मामले में भी मृतका एक बेहद प्रतिभाशाली छात्रा थी जिसने अपनी मेहनत से फिजिक्स में गोल्ड मेडल जीता था, लेकिन अपराधियों ने उसकी इस योग्यता को अपनी ठगी का हथियार बना लिया। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और वे अब सिर्फ यही चाहते हैं कि उनकी बेटी के साथ धोखा करने वाले सलाखों के पीछे जाएं।
स्थानीय प्रशासन और फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह के तार कहां-कहां जुड़े हैं। शुरुआती सुरागों से पता चलता है कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है, बल्कि इस तरह के कई फर्जी गिरोह बेरोजगार और महत्वाकांक्षी युवाओं को अपना शिकार बना रहे हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की लगातार निगरानी कर रही है और जैसे ही पुलिस की तरफ से कोई नया आधिकारिक बयान या गिरफ्तारी की सूचना सामने आएगी, पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाई जाएगी।
सुरक्षित भविष्य की तलाश में उजड़ रहे हैं परिवार
देश की आर्थिक बदहाली के बीच युवाओं में विदेश जाकर पढ़ने और बसने की चाहत तेजी से बढ़ रही है, जिसका फायदा ये ठग गिरोह उठा रहे हैं। विशेषज्ञ लगातार यह चेतावनी देते रहे हैं कि किसी भी विदेशी यूनिवर्सिटी में पैसे भेजने या आवेदन करने से पहले सीधे आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि जरूर करनी चाहिए। लेकिन दलालों के चिकनी-चुपड़ी बातों और फर्जी दस्तावेजों के जाल में फंसकर लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं। इस दुखद हादसे ने एक बार फिर समाज के सामने यह गंभीर आईना रख दिया है कि हमें अपने बच्चों के सपनों की रक्षा के लिए कितनी सतर्कता बरतने की जरूरत है।



