मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। आगामी 19 सितंबर को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को लेकर युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों से संपर्क साधने का अभियान तेजी से चल रहा है। इसी कड़ी में उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र के युवाओं ने भी अपनी ताकत दिखाने की पूरी तैयारी कर ली है।
उदयपुरा में चला संपर्क अभियान, 3500 युवाओं के रजिस्ट्रेशन का दावा
उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र में युवा नेता ज्ञानेंद्र सिंह राजपूत के नेतृत्व में एक बड़ा संपर्क अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत बरेली नगर समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों के कई कॉलेजों में जाकर छात्रों से सीधा संवाद किया गया। आयोजकों का दावा है कि इस अभियान के दौरान करीब 3,500 युवाओं ने इंदौर में होने वाले कार्यक्रम के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। गांवों और कस्बों के युवाओं में इस आयोजन को लेकर खासा जोश नजर आ रहा है।
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छात्रवृत्ति में देरी और महंगे बस किराए से परेशान हैं विद्यार्थी
संवाद के दौरान छात्रों ने अपनी पढ़ाई से जुड़ी कई गंभीर परेशानियां खुलकर सामने रखीं। बरेली के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने सबसे बड़ा मुद्दा छात्रवृत्ति का उठाया। छात्रों का कहना है कि उन्हें पिछले करीब दो साल से छात्रवृत्ति नहीं मिली है, जिससे उनकी फीस और पढ़ाई का खर्च चलाना बहुत मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, गांवों से शहर पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों ने बस किराए में भारी भरकम खर्च की शिकायत की।
"सरकारें युवाओं के विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात यह हैं कि छात्रों को दो साल से स्कॉलरशिप तक नहीं मिल रही है। हमारे युवा अपनी पढ़ाई के बजाय बस का किराया जुटाने और छात्रवृत्ति के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इंदौर का यह सम्मेलन सरकार की आंखें खोलने का काम करेगा।" — ज्ञानेंद्र सिंह राजपूत, युवा नेता
दैनिक खर्चों और परीक्षा परिणामों में देरी से बढ़ रही है चिंता
छात्रों ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें रोजाना कॉलेज आने-जाने के लिए बस किराए के रूप में 100 से 150 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए यह खर्च उठाना बेहद कठिन साबित हो रहा है। इसके साथ ही कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी और समय पर परीक्षा परिणाम न आने से छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। इन तमाम मुद्दों को अब 19 सितंबर को इंदौर के मंच से प्रमुखता से उठाया जाएगा।





