नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों और कंपनियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ ने सितंबर महीने के पीएफ योगदान और ईसीआर फाइलिंग की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अब कंपनियां बिना किसी परेशानी के 31 अक्टूबर तक अपना पीएफ रिटर्न दाखिल कर सकेंगी। इस फैसले से उन तमाम नियोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है जो तकनीकी कारणों या अन्य दिक्कतों की वजह से तय समय पर रिटर्न नहीं भर पा रहे थे।
ईपीएफओ के इस नए आदेश के बाद कंपनियों को अपना काम पूरा करने के लिए सोलह दिन का अतिरिक्त समय मिल गया है। आम तौर पर हर महीने की पंद्रह तारीख तक पीएफ और ईपीएस का पैसा जमा करना होता है और रिटर्न दाखिल करना पड़ता है। लेकिन इस बार सितंबर महीने के लिए समयसीमा बढ़ाए जाने से कंपनियों के ऊपर से अचानक आया काम का दबाव काफी कम हो गया है। द फ्रीलान्स की टीम ने जब इस बारे में कुछ छोटे और मध्यम कारोबारियों से बात की, तो उन्होंने इस कदम की सराहना की।
कंपनियों और कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका सीधा फायदा आम कर्मचारियों को भी मिलेगा। जानकारों का कहना है कि जब कंपनियां समय पर ईसीआर फाइल करती हैं और पीएफ का पैसा जमा करती हैं, तो कर्मचारियों के खाते में समय पर ब्याज और पासबुक अपडेट का काम पूरा होता है। कई बार तकनीकी कारणों से पोर्टल धीमा हो जाता है, जिससे समय सीमा के भीतर काम पूरा करना मुश्किल हो जाता है। इस विस्तार से कंपनियों को सही डेटा अपलोड करने का पूरा मौका मिल जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समय विस्तार से अनुपालन यानी कम्प्लायंस का स्तर बेहतर होता है। कंपनियों को भारी भरकम पेनल्टी या जुर्माने से बचने का मौका मिलता है। हालांकि, कर्मचारियों को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने यूएएन पोर्टल पर जाकर यह जांचते रहें कि उनकी कंपनी ने समय पर पैसा जमा किया है या नहीं। इससे भविष्य में लोन लेने या नौकरी बदलने के दौरान पीएफ ट्रांसफर करने में कोई अड़चन नहीं आती है।
प्रशासनिक फेरबदल और अन्य कानूनी मामले
दूसरी तरफ, ईपीएफओ से जुड़ी एक और खबर इन दिनों चर्चा में है जो प्रशासनिक गलियारों से सामने आई है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी कैट ने एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ईपीएफओ के एक अधिकारी के निलंबन को रद्द कर दिया है। कैट ने अधिकारी को वापस उनके पुराने कार्यस्थल यानी चंडीगढ़ भेजने का आदेश दिया है। इससे विभाग के भीतर चल रही प्रशासनिक उठापटक पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर नजर डालें तो साफ है कि ईपीएफओ इस समय दो मोर्चों पर काम कर रहा है। एक तरफ जहां वह करोड़ों खाताधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए डेडलाइन बढ़ाने जैसे जनहित के फैसले ले रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपने आंतरिक प्रशासनिक मामलों को भी सुलझाने में जुटा है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले दिनों में पोर्टल की स्पीड को और बेहतर बनाने की मांग जोर पकड़ सकती है ताकि भविष्य में ऐसी तारीखें बढ़ाने की नौबत ही न आए।
समयसीमा बढ़ने से रिटर्न में होगी आसानी
जिन कारोबारियों के अकाउंटेंट त्योहारी सीजन के बीच व्यस्त थे, उनके लिए यह अक्टूबर के महीने में किसी वरदान से कम नहीं है। त्योहारों के इस दौर में स्टाफ की कमी और छुट्टियों की वजह से वित्तीय काम अक्सर प्रभावित हो जाते हैं। ऐसे में 31 अक्टूबर तक का समय मिलने से सभी कागजी कार्रवाई को बेहद शांति और सटीकता के साथ पूरा किया जा सकता है।
द फ्रीलान्स की यह विशेष रिपोर्ट उन तमाम तथ्यों पर आधारित है जो देश के प्रमुख मीडिया संस्थानों और आधिकारिक सूत्रों से सामने आए हैं। हम लगातार इस बात की निगरानी कर रहे हैं कि क्या आने वाले समय में नियमों में कोई और बदलाव होता है या नहीं। फिलहाल सभी नियोक्ताओं के पास अपने सितंबर महीने के रिटर्न को सही तरीके से दाखिल करने का सुनहरा मौका है।











