नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में मौसम का मिजाज इस बार बहुत अजीब बना हुआ है। एक तरफ जहां केरल में मॉनसून की आधिकारिक एंट्री हो चुकी है और वहां झमाझम पानी बरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा सूखे की मार झेल रहा है। मौसम विभाग यानी IMD की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश के करीब 40 प्रतिशत हिस्से में इस समय बारिश की भारी कमी दर्ज की जा रही है। किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं लेकिन बादलों का दूर-दूर तक कोई अता-पता नहीं है।
दक्षिण भारत के राज्यों में मौसम ने अचानक करवट ली है और कई जगहों पर गरज-चमक के साथ भारी बारिश दर्ज की गई है। राजधानी दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में भी पिछले कुछ दिनों से गर्मी और उमस से लोग परेशान थे, लेकिन अब मौसम विभाग का कहना है कि यहां जल्द ही राहत भरी बारिश हो सकती है। उत्तर भारत के बाकी हिस्सों में लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कब तक उनकी स्थानीय सीमाओं में प्रवेश करेगा और उन्हें इस भीषण गर्मी से राहत दिलाएगा।
कर्नाटक और गुजरात में बादलों की भारी गैरमौजूदगी
मौसम विशेषज्ञों की शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि मॉनसून की रफ्तार इस बार थोड़ी धीमी पड़ गई है। गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों के ऊपर इस समय आसमान बिल्कुल साफ और सूखा नजर आ रहा है। इन इलाकों में तय समय के बाद भी बारिश न होने से खेती-किसानी का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। किसानों ने अपनी खरीफ की फसलों की बुवाई शुरू तो कर दी है, लेकिन पानी न मिलने के कारण अब उनकी चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
राज्य स्तर पर मिल रही खबरों के अनुसार, कर्नाटक के कई जिलों में जहां सामान्य दिनों में अच्छी खासी बारिश हो जानी चाहिए थी, वहां इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही सूखा मौसम बना रहा तो उन्हें फसलों को बचाने के लिए निजी बोरवेल और महंगे सिंचाई साधनों का सहारा लेना पड़ेगा। मौसम विभाग के वैज्ञानिक लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और यह आकलन कर रहे हैं कि यह रुकावट अस्थायी है या इसके पीछे कोई बड़ा मौसमी कारण छिपा है।
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत में कब बरसेगा पानी
उत्तर भारत के करोड़ों लोग इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि आखिर उनके इलाके में मॉनसून की पहली फुहार कब पड़ेगी। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों के भीतर बादलों की आवाजाही शुरू हो सकती है। हालांकि, केरल में तय समय पर पहुंचने के बाद मॉनसून की उत्तरी सीमा की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है, जिसके कारण उत्तर भारत के लोगों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
मैदानी इलाकों में गर्मी और उमस का प्रकोप लगातार जारी है, जिससे आम जनजीवन पर भी काफी असर पड़ रहा है। बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है और पानी की किल्लत भी कई जगहों पर सिर उठाने लगी है। डॉक्टर लोगों को कड़ी धूप से बचने और सुरक्षित रहने की सलाह दे रहे हैं। अब सबकी नजरें मौसम विभाग के उन अगले बुलेटिन पर टिकी हैं जिनमें यह बताया जाएगा कि मॉनसून कब तक अपनी सुस्त चाल छोड़कर तेजी से आगे बढ़ेगा।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल और आगामी चेतावनी
हमारी ग्राउंड टीम ने जब अलग-अलग राज्यों के मौसम और कृषि बाजारों की स्थिति का जायजा लिया, तो यह साफ हुआ कि मौसम की यह अनिश्चितता अर्थव्यवस्था के लिए भी एक चुनौती बन सकती है। यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो खाद्यान्न उत्पादन पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही वायुमंडलीय दबाव में बदलाव होगा, वैसे ही सूखे पड़े इलाकों में बादलों का डेरा जमेगा और बारिश का दौर शुरू होगा।
फिलहाल आम जनता और किसानों को यही सलाह दी जा रही है कि वे मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों पर ही भरोसा करें और किसी भी तरह की अफवाहों से बचें। आने वाले दो से तीन दिन यह तय करने में बहुत अहम होंगे कि मॉनसून देश के बाकी हिस्सों में कितनी तेजी से फैलता है। 'द फ्रीलान्स' की इस विशेष रिपोर्ट में हम लगातार देश के हर कोने से मौसम के सटीक आंकड़े आप तक पहुंचाते रहेंगे ताकि आप हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रह सकें।



