नई दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके में आज सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया जब चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बड़ा प्रदर्शन शुरू कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लगातार हमलावर है और आज इसी सिलसिले में वामपंथी दलों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। प्रदर्शनकारियों की भीड़ को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने भारी सुरक्षा बलों को तैनात किया था और कई परतों वाले मजबूत लोहे के बैरिकेड्स लगाए गए थे।
गुस्साए प्रदर्शनकारी इन सभी सुरक्षा घेरों को तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते पुलिस के साथ उनकी सीधी धक्का-मुक्की और झड़प हो गई। कई उग्र कार्यकर्ता पुलिस के बनाए गए लोहे के बैरिकेड्स पर ही जा चढ़े और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। इस पूरे सियासी हंगामे की वजह से इलाके में भारी ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को आवाजाही में बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ा।
चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और भारी पुलिस बल
विपक्ष के इस पूर्व-निर्धारित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुबह से ही कश्मीरी गेट और आसपास के रास्तों पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे। दफ्तर के चारों तरफ अर्धसैनिक बलों की कंपनियों को तैनात किया गया था ताकि किसी भी आपात स्थिति या हिंसा को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहकर स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए थे और लाउडस्पीकर के जरिए कार्यकर्ताओं को पीछे हटने की चेतावनी दे रहे थे।
दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं का साफ कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता की कमी है, जिसके खिलाफ उनका यह लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन पूरी तरह जायज है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस बल का इस्तेमाल करके उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
विपक्षी दलों की साझा रणनीति और आगे का राजनीतिक संघर्ष
पिछले कुछ दिनों से लगातार राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी दलों की सक्रियता काफी ज्यादा बढ़ गई है और वे सड़क से लेकर संसद तक सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। आज के इस विरोध प्रदर्शन में सिर्फ आप और कांग्रेस ही नहीं, बल्कि वामपंथी दलों के बड़े नेता और कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी दलों के नेताओं का एक ही मुख्य मुद्दा है कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष रूप से काम करना चाहिए और विपक्ष की शिकायतों पर तुरंत सख्त संज्ञान लेना चाहिए।
जमीनी स्तर पर हालात को काबू में करने के लिए पुलिस प्रशासन लगातार मशक्कत कर रहा है और कुछ प्रमुख प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में भी लिया गया है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम इस पूरे मामले पर अपनी लगातार नजर बनाए हुए है और आगे के हर एक अपडेट से पाठकों को लगातार अवगत कराती रहेगी।




