उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर से न्याय की मांग तेज हो गई है। मृतका के पिता वीरेंद्र भंडारी ने प्रशासन और सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक इस मामले में असली वीआईपी चेहरों का खुलासा नहीं होता और सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। हाल ही में पुलिस ने पीड़ित माता-पिता को कुछ समय के लिए हिरासत में भी लिया था, जिसके बाद से आम जनता और विभिन्न संगठनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पिता का यह भी कहना है कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पूरा उत्तराखंड एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
यह पूरा मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब सिक्किम के राज्यपाल की नियुक्ति और उससे जुड़े घटनाक्रम पर परिजनों ने तीखी नाराजगी जताई। परिजनों का कहना है कि जिन लोगों पर सवाल उठ रहे हैं, उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है। अंकिता के माता-पिता ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशव्यापी रूप ले लेगा। राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस लड़ाई को समर्थन देते हुए कहा है कि न्याय की यह आवाज न कभी दबेगी और न ही रुकेगी, चाहे सरकार कितना भी जोर लगा ले।
माता-पिता की पांच बड़ी मांगें और सिक्किम राज्यपाल नियुक्ति का विरोध
पीड़ित परिवार की मुख्य मांगों में हत्याकांड से जुड़े उस रहस्यमयी वीआईपी का नाम सार्वजनिक करना सबसे ऊपर है जिसका जिक्र शुरू से होता रहा है। परिवार का आरोप है कि इतने महीने बीत जाने के बाद भी असली दोषियों को पूरी तरह बेनकाब नहीं किया गया है। इसके अलावा, मामले की निष्पक्ष जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग भी शामिल है। हाल ही में सिक्किम के राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर भी परिवार ने तीखा विरोध जताया है। उनका तर्क है कि जिन लोगों पर गंभीर सवाल या संदेह के बादल हैं, उन्हें इस तरह के उच्च पदों पर बैठाना जनता के साथ न्याय नहीं है। इसी बात को लेकर पिछले दिनों प्रदर्शन की चेतावनी दी गई थी और पुलिस ने एहतियात के तौर पर परिवार को रोकने की कोशिश की थी।
पुलिस द्वारा परिवार को हिरासत में लिए जाने की घटना ने आग में घी का काम किया। उत्तराखंड के कई स्थानीय लोग और महिला संगठन तुरंत थाने के बाहर जमा हो गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। लोगों का गुस्सा इस बात पर था कि एक पीड़ित परिवार जो अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांग रहा है, उसे पुलिस इस तरह से परेशान कर रही है। भारी विरोध के दबाव के बाद पुलिस ने कुछ ही घंटों में माता-पिता को रिहा कर दिया। लेकिन इस घटना के बाद से राज्य में माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है और हर कोई अंकिता के लिए पक्के इंसाफ की मांग कर रहा है।
वीआईपी का राज और राजनीति की सुई
अंकिता भंडारी केस की शुरुआती जांच से ही वह 'वीआईपी' सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है जिसके लिए कथित तौर पर रिसॉर्ट में गलत काम का दबाव बनाया गया था। आज भी उत्तराखंड की जनता और मृतका के माता-पिता के मन में यही एक बड़ा सवाल है कि वह वीआईपी कौन था। विपक्ष लगातार सरकार पर आरोप लगा रहा है कि बड़े नामों को बचाने के लिए जांच की दिशा को भटकाया जा रहा है। हालांकि प्रशासन और सरकार हमेशा से यह दावा करती आई है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, लेकिन ज़मीन पर परिवार और जनता इस बात से संतुष्ट नहीं दिखती।
अब इस मामले में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की एंट्री से लड़ाई और बड़ी हो गई है। राहुल गांधी सहित कई अन्य नेताओं ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से परिवार के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई है। अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने साफ कर दिया है कि वे अपनी बेटी की याद में और उसके अधूरे इंसाफ के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां मौजूद स्थानीय लोगों में भी सरकार और सिस्टम के खिलाफ गहरा रोष देखने को मिला। आने वाले दिनों में यह मामला एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है, क्योंकि उत्तराखंड का बच्चा-बच्चा अब आर-पार के मूड में नजर आ रहा है।
न्याय की इस लड़ाई में आगे क्या होगा?
अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक परिवार का दर्द नहीं रहा, बल्कि यह पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला मामला बन चुका है। जनता अब केवल आश्वासनों पर भरोसा करने को तैयार नहीं है। वे चाहती है कि अदालत का फैसला जल्द आए और दोषियों को ऐसी सजा मिले जो समाज के लिए एक मिसाल बने। स्थानीय स्तर पर युवा संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता लगातार पंचायतें कर रहे हैं और आगे की रणनीति बना रहे हैं।
प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जनता के भरोसे को जीतना है। जब तक वीआईपी का राज पूरी तरह से साफ नहीं होता और पीड़ित परिवार की सभी पांच मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उत्तराखंड की वादियों में न्याय की यह मांग गूंजती रहेगी। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और हर एक अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाता रहेगा।










