नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने मौजूदा हालात और विभिन्न राजनीतिक दलों के विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए यह अहम फैसला लिया है। सुरक्षा एजेंसियों की खुफिया रिपोर्ट के आधार पर सीईसी को मिलने वाली सुरक्षा घेरेबंदी को अपग्रेड किया गया है ताकि उनकी सुरक्षा में कोई चूक न हो सके। पिछले कुछ दिनों से देश की राजनीति में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर माहौल काफी गरमाया हुआ है।
राजधानी दिल्ली समेत देश के कई अन्य हिस्सों में विपक्षी दलों के कार्यकर्ता लगातार सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर झड़प और तनाव की खबरें भी सामने आई हैं। हाल ही में दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक समर्थक को प्रदर्शनकारियों द्वारा घेरे जाने और मारपीट करने का मामला भी सामने आया था। इस तरह की घटनाओं के बाद से सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क मोड में आ गई हैं और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए लगातार समीक्षा कर रही हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर नेताओं के तीखे हमले
विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में सीईसी ज्ञानेश कुमार पर बेहद तीखा हमला बोला था। उन्होंने एक सार्वजनिक सभा में कहा था कि बंगाल चुनाव को लूटने की पटकथा लिखने वाले किसी भी कीमत पर बचेंगे नहीं। इस तरह के आक्रामक बयानों और राजनीतिक तनाव के बाद चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं, जिसके चलते केंद्र सरकार ने यह सुरक्षा बढ़ाई है।
सुरक्षा के मोर्चे पर उठाए गए इस नए कदम के तहत अब मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ चलने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या और उनकी तैनाती के दायरे को बढ़ा दिया गया है। जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा में अत्याधुनिक हथियारों से लैस कमांडो और विशेष सुरक्षा दस्ते के जवान चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। जब भी सीईसी आधिकारिक दौरे पर बाहर निकलते हैं या किसी बैठक में शामिल होते हैं, तो उनके काफिले और ठहरने के स्थानों पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए जाते हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तेज हुई हलचल
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग से जुड़े अन्य मामलों पर भी नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। हाल ही में एक पूर्व राजदूत ने भी एसआईआर में जानकारी मेल न खाने पर अपनी गहरी निराशा जताई थी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर बहस छिड़ गई है। इन तमाम घटनाओं और लगातार मिल रही चेतावनियों के मद्देनजर सरकार कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक पद की गरिमा और उसके प्रमुख की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करना इस समय गृह मंत्रालय की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, आने वाले दिनों में देश के कई राज्यों में चुनावी सरगर्मी और बढ़ने वाली है। ऐसे में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी और तेज हो सकता है। प्रशासनिक हलकों का मानना है कि सुरक्षा बढ़ाये जाने से न सिर्फ सीईसी को सुरक्षित माहौल मिलेगा, बल्कि आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्पक्षता और निडरता के साथ बिना किसी बाहरी दबाव के कर सकेगा। सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए हैं।
आगामी राजनीतिक माहौल और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
देश की मौजूदा राजनीतिक सरगर्मी को देखते हुए खुफिया तंत्र ने अपनी रिपोर्ट में पहले ही आगाह कर दिया था कि अति-संवेदनशील पदों पर बैठे लोगों की सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए। विरोध प्रदर्शनों के दौरान भीड़ के बेकाबू होने का खतरा हमेशा बना रहता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने बिना किसी देरी के तुरंत प्रभाव से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश जारी कर दिए। पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है।




