नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने रक्षा क्षेत्र से जुड़े एक बड़े कार्यक्रम में खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के सामने ही यह साफ कर दिया कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सौदों में अभी भी कई बड़ी अड़चनें और पाबंदियां हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी पक्ष हमें अपने सबसे आधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमान के पास तक नहीं फटकने देता है। इसके बावजूद वे इस विमान को भारत को बेचने की बड़ी-बड़ी बातें करते रहते हैं। वायुसेना प्रमुख के इस बेबाक बयान से रक्षा गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
मौजूदा समय में भारत अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए लगातार नए और आधुनिक लड़ाकू विमानों की तलाश कर रहा है। इसी सिलसिले में अमेरिकी पक्ष की ओर से कई बार अत्याधुनिक हथियारों और विमानों की पेशकश की जाती रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अमेरिका अपनी सबसे संवेदनशील तकनीकी सुरक्षा और गुप्त प्रणालियों को साझा करने से हमेशा बचता रहा है। वायुसेना प्रमुख का यह बयान इस बात का साफ संकेत है कि भारत अब बिना सोचे-समझे किसी भी विदेशी प्रस्ताव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। देश अपनी शर्तों पर ही रक्षा सौदे करना चाहता है।
अमेरिका की दोहरी नीति और एफ-35 विमान का सच
अमेरिकी वायुसेना के कमांडर की मौजूदगी में दिए गए इस बयान ने कई पुराने सवालों को फिर से जिंदा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि एफ-35 एक बेहद महंगा और संवेदनशील पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। अमेरिका अपने इस विमान की तकनीक को किसी भी ऐसे देश के साथ पूरी तरह साझा नहीं करना चाहता जिस पर उसका कड़ा नियंत्रण न हो। यही वजह है कि जब भी भारत जैसे बड़े देश इन विमानों को खरीदने की इच्छा जताते हैं, तो उन्हें कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। वायुसेना प्रमुख ने इसी दोहरे रवैये पर सीधा प्रहार किया है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी प्रशासन की तरफ से अभी तक भारत को एफ-35 विमान बेचने का कोई भी आधिकारिक और पक्का प्रस्ताव नहीं मिला है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर बातचीत जरूर चलती है, लेकिन वह सिर्फ कागजी और शुरुआती दौर की होती है। जब तक अमेरिका तकनीकी हस्तांतरण के लिए तैयार नहीं होता, तब तक ऐसे किसी भी बड़े सौदे पर आगे बढ़ना भारतीय वायुसेना के लिए संभव नहीं है। वायुसेना प्रमुख का यह बयान इसी जमीनी और कड़वी सच्चाई को सबके सामने उजागर करता है।
रूस के Su-57 और स्वदेशी AMCA पर टिकी निगाहें
केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि वायुसेना प्रमुख ने रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 को लेकर भी स्थिति साफ की है। इस विमान को लेकर भी अभी तक कोई अंतिम और ठोस फैसला नहीं लिया गया है। भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अब पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने की राह पर चल रहा है। देश का मुख्य जोर स्वदेशी एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए प्रोजेक्ट पर है। भारतीय वैज्ञानिक और रक्षा कंपनियां मिलकर अपनी तकनीक से अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान तैयार कर रहे हैं।
मैदान पर तैनात रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी विमानों पर निर्भरता कम करने का यह सबसे सही समय है। वायुसेना प्रमुख का यह बयान केवल एक चुटकी नहीं था, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता का एक मजबूत संदेश था। भारत अब किसी भी देश के दबाव में आने वाला नहीं है। देश अपनी वायु सीमा की सुरक्षा के लिए अपनी खुद की तकनीक और मजबूत रक्षा साझेदारियों पर भरोसा कर रहा है। आने वाले दिनों में भारत का यह रुख रक्षा बाजार में और भी बड़े बदलाव ला सकता है।
भविष्य की रणनीति और द फ्रीलान्स की अंतिम पड़ताल
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल से यह साफ होता है कि भारतीय वायुसेना अब हर मोर्चे पर अपनी ताकत को मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। चाहे अमेरिकी पाबंदियां हों या रूस के साथ पुराने रक्षा रिश्ते, भारत हर फैसले को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के तराजू में तौलकर ही आगे बढ़ा रहा है। आने वाले समय में देश आसमान में अपनी ताकत को और अधिक धार देने के लिए नए स्वदेशी प्रोजेक्ट्स पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है। वायुसेना प्रमुख के इस ताजा बयान ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी बात पूरी बेबाकी और मजबूती से रखने से डरता नहीं है।










