नई दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर आज सुबह से ही भारी तनाव और गहमागहमी का माहौल बना हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया यानी एनएसयूआई के कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए और जोरदार प्रदर्शन किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारी छात्रों को जबरन धरने से हटाना शुरू कर दिया। पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हुई इस तीखी झड़प के बाद कई छात्र नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है, जिन्हें बाद में नजदीकी पुलिस थानों में ले जाया गया।
यह पूरा विवाद सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी के कई अन्य महत्वपूर्ण इलाकों जैसे प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर भी इसी तरह के उग्र प्रदर्शन देखने को मिले हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के काम करने के तरीके में पारदर्शिता की कमी है, जिसके खिलाफ वे अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इस बीच, विपक्षी दलों का गुस्सा भी सातवें आसमान पर है और कांग्रेस सहित कई दलों के बड़े नेताओं ने इन गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था जिन्हें बाद में किंग्सवे कैंप इलाके से रिहा किया गया।
संसद मार्ग पर पुलिस बल तैनात और कार्यकर्ताओं की लगातार गिरफ्तारियां
संसद मार्ग थाने के आसपास के पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। बैरिकेडिंग लगाकर रास्तों को बंद कर दिया गया है और भारी संख्या में पुलिस बल के साथ अर्धसैनिक बलों के जवानों को भी तैनात किया गया है। जब एनएसयूआई के कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए और उन्होंने नारेबाजी तेज कर दी, तब पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए उन्हें बसों में भरकर वहां से हटाना शुरू किया। इस दौरान कई छात्र नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरी कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के अधिकार को भी कुचलने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी ने हाल ही में उन नेताओं पर भी तंज कसा है जो कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुके हैं, जिससे राजनीतिक बयानबाजी का दौर और अधिक तेज हो गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़कर गए हैं, वे अब केवल सत्ता के साथ खड़े हैं लेकिन जमीन पर जनता का असली गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है।
विपक्षी दलों का मार्च और संवैधानिक संस्थाओं पर बढ़ते सवाल
राजधानी में चल रहे इन विरोध प्रदर्शनों के बीच 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं ने भी हाथों में संविधान की प्रतियां लेकर एक बड़ा मार्च निकाला। इस मार्च के दौरान पुलिस ने कई सांसदों और प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया था जिन्हें कुछ घंटों बाद छोड़ दिया गया। रिहाई के बाद इन नेताओं ने साफ कर दिया कि उनकी यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक संवैधानिक संस्थाएं पूरी तरह निष्पक्ष रूप से काम करना शुरू नहीं करतीं। इस पूरे घटनाक्रम ने देश की राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति में एक बार फिर से उबाल ला दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक और ज्यादा तूल पकड़ सकता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल संसद मार्ग थाने के बाहर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन पुलिस के नियंत्रण में है। आने वाले घंटों में छात्र संगठनों और विपक्षी दलों की तरफ से कुछ और बड़े ऐलान किए जा सकते हैं, जिससे प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी भी तरह की अनधिकृत भीड़ या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
विदेशी नागरिकों के शामिल होने पर भी विवाद और प्रशासनिक नजर
इस पूरे राजनीतिक हंगामे के बीच कुछ अन्य नाम भी इस विवाद से जुड़ते नजर आ रहे हैं जिससे मामला और पेचीदा हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तरह के प्रदर्शनों और गतिविधियों में कथित रूप से शामिल होने को लेकर कुछ विदेशी नागरिकों या अन्य चर्चित हस्तियों पर भी प्रशासनिक नजर टेढ़ी हो गई है। हालांकि पुलिस और प्रशासन की तरफ से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन खुफिया एजेंसियां और स्थानीय पुलिस हर एक गतिविधि पर बहुत करीब से नजर बनाए हुए हैं ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो सके।










