नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के अन्नदाताओं की निगाहें इस समय केंद्र सरकार की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक पर टिकी हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली अगली यानी चौबीसवीं किस्त को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। ग्रामीण इलाकों में चाय की दुकानों से लेकर खेतों की मेड़ों तक यही चर्चा है कि खाते में दो हजार रुपये कब आएंगे। प्रशासनिक गलियारों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस योजना की अगली कड़ी के लिए तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक किसी फिक्स तारीख का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि त्योहारों के इस माहौल में किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है।
पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड देखें तो सरकार अमूमन हर चार महीने के अंतराल पर किसानों के बैंक खातों में यह पैसा ट्रांसफर करती रही है। पिछली किस्त के बाद अब समय पूरा हो रहा है, जिससे किसानों की उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह अनुमान लगाया जा रहा है कि दशहरे के आसपास कभी भी पोर्टल पर नया अपडेट आ सकता है। जिन किसानों ने समय पर अपनी ई-केवाईसी और भूमि सत्यापन का काम पूरा कर लिया है, उनके खातों में पैसे पहुंचने में कोई अड़चन नहीं आएगी। लेकिन जिन लोगों के दस्तावेजों में कोई कमी रह गई है, वे इस वक्त काफी परेशान नजर आ रहे हैं क्योंकि उनका पैसा अटक सकता है।
किसानों के लिए जरूरी है स्टेटस चेक करना
जमीनी स्तर पर हमारे संवाददाताओं ने जब उत्तर प्रदेश और बिहार के कई गांवों का दौरा किया, तो किसानों ने अपनी समस्याओं खुलकर साझा कीं। कई किसानों का कहना है कि पिछली बार उनका नाम लिस्ट से कट गया था क्योंकि बैंक खाता आधार से लिंक नहीं था। इस बार कृषि विभाग के स्थानीय कार्यालयों में किसानों की भीड़ जुटना शुरू हो गई है। अधिकारी लगातार यह अपील कर रहे हैं कि किसान किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। वे सीधे पीएम किसान के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस देख सकते हैं। पोर्टल पर यह साफ पता चल जाता है कि आपका फॉर्म किस स्तर पर पेंडिंग है या स्वीकृत हो चुका है।
ऑनलाइन स्टेटस चेक करने की प्रक्रिया बेहद आसान है जिसे कोई भी युवा या पढ़ा-लिखा परिवार का सदस्य पूरा कर सकता है। सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है, जहां 'नो योर स्टेटस' का विकल्प मिलता है। वहां अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और कैप्चर कोड दर्ज करने पर पूरी कुंडली सामने आ जाती है। यदि किसी किसान के खाते में आधार लिंकिंग की समस्या है, तो उसे तुरंत बैंक जाकर अपनी समस्या का समाधान कराना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में इस बार कॉमन सर्विस सेंटर यानी सीएससी के बाहर भी खासी भीड़ देखने को मिल रही है, जहां लोग अपने दस्तावेजों को दुरुस्त करवा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गूंज रहे किसानों के मुद्दे
भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी इस समय किसानों से जुड़े बड़े मामले सुर्खियों में बने हुए हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान में गन्ने की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की मांग को लेकर किसानों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। वहां के किसान संगठन सरकार की नीतियों से नाराज हैं और उनका कहना है कि लागत लगातार बढ़ रही है लेकिन फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, वियतनाम जैसे देशों में भी प्रांतीय स्तर पर अधिकारियों और किसान संघ के सदस्यों के बीच लगातार संवाद जारी है ताकि कृषि सेक्टर की अड़चनों को दूर किया जा सके। इन तमाम अंतरराष्ट्रीय खबरों से यह साफ होता है कि खेती-किसानी की समस्याएं हर जगह एक जैसी ही हैं।
भारत में भी किसान संगठन समय-समय पर अपनी मांगों को लेकर मुखर होते रहते हैं, लेकिन फिलहाल तात्कालिक मुद्दा सरकारी योजनाओं के पैसे समय पर मिलने का है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह दो हजार रुपये की राशि बहुत मायने रखती है। खेती में खाद, बीज और जुताई के खर्च को संभालने के लिए यह पैसा एक बड़े सहारे की तरह काम करता है। यही वजह है कि हर किस्त जारी होने से पहले किसानों की धड़कनें बढ़ जाती हैं। आने वाले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि सरकार इस बार किस दिन किसानों के खातों में धनवर्षा करती है।
दस्तावेजों की गलती न पड़े भारी
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रणाली के आने से भ्रष्टाचार काफी हद तक कम हुआ है। पैसा सीधे बिचौलियों के बिना किसान के बैंक खाते में पहुंचता है। लेकिन इसमें सबसे बड़ी शर्त यह है कि बैंक खाता आधार और एनपीसीआई से सक्रिय रूप से जुड़ा होना चाहिए। अगर खाते में कोई तकनीकी खामी है, तो सिस्टम स्वतः ही भुगतान रोक लेता है। इसलिए रिपोर्टर की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि किसानों को जागरूक होना बहुत जरूरी है। सरकार भी लगातार एसएमएस के जरिए किसानों को अलर्ट भेज रही है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस वित्तीय लाभ से वंचित न रह जाए।








