नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की प्रशासनिक व्यवस्था में अपनी कार्यशैली को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव रंजन एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। हाल ही में जम्मू-कश्मीर से एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और महिला जेकेएएस अधिकारी के बीच तीखी बहस होती दिख रही है। इस वायरल वीडियो के सामने आते ही प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और हर कोई इस घटना की सच्चाई जानना चाहता है। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को लगातार शेयर कर रहे हैं और दफ्तरों के भीतर काम करने के तौर-तरीकों पर खुलकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस वायरल वीडियो के अलावा आईएएस राजीव रंजन का नाम पिछले कई अन्य मामलों को लेकर भी मीडिया की सुर्खियों में छाया हुआ है। कुछ समय पहले उनके 24 घंटे के परिवहन आयुक्त रहने के दौरान हुए फैसलों पर राजनीतिक दलों ने भी सवाल खड़े किए थे। बिहार से ताल्लुक रखने वाले और देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी सेवाएं दे चुके इस वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ इससे पहले पटना, बनारस, जम्मू और गुरुग्राम में सीबीआई की रेड का मामला भी काफी चर्चा में रहा था। इन तमाम पुरानी और नई घटनाओं के एक साथ सामने आने से प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर इन विवादों की असली जड़ क्या है।
जम्मू-कश्मीर में महिला अफसर के साथ तीखी बहस का वीडियो
ताज़ा मामला जम्मू-कश्मीर का है जहां एक सरकारी बैठक या दफ्तर के काम के दौरान एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और महिला जेकेएएस अधिकारी के बीच किसी बात पर गहरी अनबन हो गई। देखते ही देखते यह बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। इस पूरी घटना का किसी ने वीडियो बना लिया जो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल चुका है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे दोनों अधिकारी एक-दूसरे के आमने-सामने हैं और माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और सरकार के भीतर भी अंदरखाने बैठकों का दौर शुरू हो गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अनुशासनहीनता की यह सीमा क्यों पार हुई।
आम जनता और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि सरकारी दफ्तरों में इस तरह का खुला टकराव विभाग की छवि को भारी नुकसान पहुंचाता है। महिला अधिकारी और वरिष्ठ आईएएस के बीच हुआ यह विवाद अब केवल दफ्तर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह सार्वजनिक चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर जनता के काम के लिए बैठे ये जिम्मेदार अधिकारी इस तरह से सार्वजनिक रूप से क्यों उलझ रहे हैं। अभी तक इस वायरल वीडियो पर शासन या प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक और बड़ा अनुशासनात्मक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरूनी जांच की सुगबुगाहट तेज हो गई है.
परिवहन आयुक्त के कार्यकाल और राजनीतिक सवाल
आईएएस राजीव रंजन के पिछले प्रशासनिक सफर पर नजर डालें तो उनके फैसलों पर सियासत भी कम नहीं हुई है। कुछ समय पहले जब उन्होंने कुछ ही घंटों या दिनों के लिए परिवहन आयुक्त का पद संभाला था, तब उनके द्वारा लिए गए फैसलों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। भारतीय जनता पार्टी के कई प्रवक्ताओं और नेताओं ने उनके उन फैसलों को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे और यह सवाल उठाया था कि इतने कम समय में ऐसे बड़े फैसले क्यों और किसके इशारे पर लिए गए। राजनीतिक गलियारों में इन फैसलों को एक 'खेल' की तरह पेश किया गया, जिससे नौकरशाही और राजनीतिक दलों के बीच की तनातनी एक बार फिर से सतह पर आ गई।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब भी कोई तेज-तर्रार या विवादों में रहने वाला अधिकारी अहम पदों पर बैठता है, तो उसके हर कदम पर विपक्ष की पैनी नजर रहती है। परिवहन विभाग से जुड़ा वह मामला हो या फिर अन्य जिलों में तैनाती के दौरान किए गए प्रशासनिक फेरबदल, हर बार राजीव रंजन का नाम किसी न किसी वजह से सुर्खियों में आ ही जाता है। पूर्वी सिंहभूम में 26वें उपायुक्त के रूप में उनका कार्यभार संभालने का मामला हो या फिर उनके पुराने सेवाकाल की बातें, मीडिया और सोशल मीडिया पर उनका नाम लगातार ट्रेंड कर रहा है। इन सभी मुद्दों पर आम लोग भी अब खुलकर अपनी राय रख रहे हैं और प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
CBI रेड और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का बाजार
इस पूरे प्रकरण का एक और अहम पहलू वह केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई की कार्रवाई है, जो पिछले कुछ समय में उनके ठिकानों और उनसे जुड़े परिसरों पर हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना, बनारस, जम्मू और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में सीबीआई की टीमों ने दबिश दी थी, जिसके बाद से ही यह मामला राष्ट्रीय स्तर की खबरों में आ गया था। इन छापों का संबंध पुराने वित्तीय लेन-देन या प्रशासनिक निर्णयों से बताया गया था, जिसकी जांच अभी भी अलग-अलग स्तर पर चल रही है। जब भी किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के खिलाफ इस तरह की केंद्रीय जांच होती है, तो पूरा प्रशासनिक तंत्र हिल जाता है और हर कोई अपने स्तर पर इसकी टोह लेने में जुट जाता है।
'द फ्रीलान्स' की इस पड़ताल से यह साफ होता है कि आईएएस राजीव रंजन से जुड़ी ये तमाम घटनाएं भले ही अलग-अलग समय और जगहों की हों, लेकिन ये सभी मिलकर देश की नौकरशाही की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती हैं। एक तरफ जहां जनता को त्वरित और पारदर्शी न्याय और सेवाएं चाहिए, वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों के बीच की खींचतान और जांच एजेंसियों के फेरे व्यवस्था की सुस्ती को उजागर करते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जम्मू-कश्मीर के वायरल वीडियो मामले में सरकार क्या एक्शन लेती है और पुरानी जांचों का नतीजा क्या निकलता है। हमारी यह ग्राउंड पड़ताल इस बात पर नजर बनाए रखेगी कि इन मामलों में आगे क्या नया मोड़ आता है।











