नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रिजर्व बैंक की सोची-समझी मौद्रिक नीतियों और समय पर उठाए गए सख्त कदमों का असर अब विदेशी मुद्रा बाजार में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। देश के केंद्रीय बैंक की शानदार रणनीति के दम पर भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी खोई हुई ताकत को फिर से हासिल किया है। पिछले महज दो दिनों के कारोबार के भीतर ही रुपया डॉलर के मुकाबले 86 पैसे मजबूत हो गया है। इस अचानक आई मजबूती से देश के आर्थिक गलियारों में सकारात्मक चर्चा शुरू हो गई है और विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को अंदरूनी मजबूती मिलेगी।
बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ हफ्तों से विदेशी मुद्रा बाजार में बहुत ही करीने से हस्तक्षेप किया है। केंद्रीय बैंक ने बाजार में डॉलर की भारी किल्लत को दूर करने और सट्टेबाजों पर लगाम कसने के लिए अपनी रणनीति बदली थी। रिजर्व बैंक के इस ठोस कदम का नतीजा यह निकला कि विदेशी निवेशकों और बैंकों ने भारतीय मुद्रा पर एक बार फिर से भरोसा जताया है। दो दिन पहले जो रुपया कमजोर होता दिख रहा था, उसने अचानक रफ्तार पकड़ ली और डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति काफी हद तक सुधार ली है।
रुपये की इस मजबूती से आम आदमी और कारोबारियों को क्या फायदा होगा?
रुपये के मजबूत होने का सबसे सीधा असर हमारे देश के आयात पर पड़ता है। जब रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होता है, तब विदेश से कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य जरूरी सामान मंगवाना थोड़ा सस्ता हो जाता है। इसका मतलब यह है कि देश में महंगाई पर लगाम कसने में मदद मिलती है। इसके अलावा, जिन लोगों के बच्चे विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं या जिन्हें विदेश पैसा भेजना होता है, उन्हें भी अब पहले के मुकाबले कम भारतीय रुपये खर्च करने पड़ेंगे। कारोबारियों के लिए यह समय राहत भरा है क्योंकि आयात की लागत घटने से उनके मुनाफे पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
वित्तीय बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि रिजर्व बैंक ने इस बार बहुत ही सधे हुए तरीके से अपनी चाल चली है। केंद्रीय बैंक ने केवल विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करने के बजाय बाजार के सेंटीमेंट को अपने पक्ष में मोड़ने का काम किया है। जब भी बाजार में रुपये पर ज्यादा दबाव बनता है, रिजर्व बैंक अपनी ताकत का अहساس करा देता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जिससे वैश्विक निवेशकों को यह संदेश गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था किसी भी बाहरी झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार और सक्षम है।
विदेशी मुद्रा बाजार में आगे क्या रुख रहने की उम्मीद है?
आने वाले दिनों में विदेशी मुद्रा बाजार की चाल काफी हद तक वैश्विक आर्थिक हालातों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। हालांकि, वर्तमान आंकड़ों को देखकर बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक का पलड़ा अभी मजबूत बना हुआ है। केंद्रीय बैंक के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, जिसकी बदौलत वह किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपट सकता है। रुपये में आई यह ताजा तेजी इस बात का सबूत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव बहुत मजबूत है और सही समय पर लिए गए नीतिगत फैसले बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
द फ्रीलान्स की टीम ने जब बाजार के कुछ वरिष्ठ कारोबारियों से बात की, तो उनका यही कहना था कि रिजर्व बैंक की यह सक्रिय नीति लंबे समय तक रुपये को स्थिरता देगी। निवेशकों का भरोसा बढ़ने से शेयर बाजार में भी इसका अच्छा असर देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, रुपये की यह छलांग देश के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए एक बहुत ही अच्छी खबर है और आने वाले हफ्तों में भी इसके स्थिर बने रहने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
रुपये की चाल पर क्या कहते हैं आर्थिक विशेषज्ञ?
देश के जाने-माने अर्थशास्त्रियों और बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक की यह सफलता अचानक नहीं मिली है। इसके पीछे केंद्रीय बैंक की महीनों की कड़ी निगरानी और सही समय पर लिए गए कड़े फैसले शामिल हैं। जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं मुद्रास्फीति और मंदी के दौर से गुजर रही हैं, तब भारतीय रुपये का इस तरह संभलना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। आने वाले समय में अगर वैश्विक बाजार शांत रहते हैं, तो भारतीय मुद्रा में और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है, जिससे देश के आम नागरिकों को भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से फायदा पहुंचेगा।








