नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के सर्राफा बाजारों में इस समय चांदी को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है। पिछले कुछ दिनों से चांदी के दाम लगातार नीचे आ रहे हैं और यह छह महीने के अपने निचले स्तर के करीब पहुंच गई है। द फ्रीलान्स की टीम ने जब दिल्ली के मुख्य बाजारों का दौरा किया, तो पता चला कि कीमतों में आई इस नरमी से आम खरीदार तो खुश हैं, लेकिन कारोबारी खासे परेशान नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर कमजोर होने से सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू बाजार में मांग उस हिसाब से नहीं बढ़ पा रही है जैसी उम्मीद की जा रही थी।
इस बीच केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के कारोबार से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में भारी कटौती कर दी है। इसके तहत सोने पर ड्यूटी ड्रॉबैक को 3.1 प्रतिशत और चांदी पर मिलने वाले रिफंड को सीधे 9 प्रतिशत तक घटा दिया गया है। ड्यूटी ड्रॉबैक वह पैसा होता है जो सामान का निर्यात करने पर सरकार कारोबारियों को वापस देती है। इस बड़ी कटौती से ज्वेर्स और मेटल का कारोबार करने वाले लोगों को तगड़ा झटका लगा है। कारोबारियों का कहना है कि रिफंड कम मिलने से उनकी लागत बढ़ जाएगी और इसका असर अंततः व्यापार के मुनाफे पर पड़ेगा।

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बाजार के जानकारों का मानना है कि चांदी के दाम गिरने के पीछे कई बड़े कारण हैं। पिछले कुछ हफ्तों से ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर की चाल और बॉन्ड यील्ड में बदलाव का सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ रहा है। जब-जब ग्लोबल मार्केट में सोना और चांदी तेज होते हैं, तब-तब घरेलू बाजार में उसका पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाता है। इसके विपरीत जब वैश्विक स्तर पर सुस्ती आती है, तो घरेलू बाजार में दाम तेजी से नीचे आने लगते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है जहां विदेशी बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजारों में चांदी की मांग कमजोर बनी हुई है।
स्थानीय सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि शादियों का सीजन खत्म होने के बाद बाजार में खरीदार कम हो गए हैं। लोग इस इंतजार में हैं कि भाव और ज्यादा नीचे आएं तब खरीदारी की जाए। इस सुस्ती की वजह से दुकानदारों का माल दुकानों में ही डंप हो रहा है। ऐसे में ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों में कटौती होना कारोबारियों के लिए जख्म पर नमक छिड़कने जैसा साबित हो रहा है। निर्यातकों का मानना है कि सरकार के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चांदी और सोने के जेवरात दूसरे देशों के मुकाबले महंगे पड़ सकते हैं, जिससे हमारे निर्यात पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
कारोबारियों और जेवर निर्माताओं की चिंताएं
द फ्रीलान्स की पड़ताल में यह भी सामने आया कि छोटे और मध्यम स्तर के सर्राफा कारोबारी इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। बड़े व्यापारियों के पास तो नुकसान झेलने की थोड़ी बहुत क्षमता होती है, लेकिन छोटे कारीगर और दुकानदार जो कच्चा माल आयात करते हैं और फिर उसे तैयार करके बेचते हैं, उनका गणित पूरी तरह बिगड़ गया है। रिफंड घटने से उनकी कार्यशील पूंजी यानी वर्किंग कैपिटल फंस रही है। कारोबारियों का यह भी कहना है कि उन्हें इस बात की उम्मीद नहीं थी कि सरकार की तरफ से इतना बड़ा कदम उठाया जाएगा।
दूसरी ओर, आम जनता के लिए यह समय चांदी खरीदने का एक मौका माना जा रहा है। जिन लोगों को आने वाले महीनों में निवेश करना है या परिवार में किसी आयोजन के लिए चांदी के बर्तन या गहने खरीदने हैं, वे बाजार के इन निचले दामों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा है, इसलिए एक बार में पूरा पैसा लगाने के बजाय टुकड़ों में खरीदारी करना ज्यादा समझदारी होगी। ग्राहक अपने शहर के लोकल सर्राफा बाजार के रेट देखकर ही आगे बढ़ें क्योंकि हर शहर में टैक्स और ढुलाई के हिसाब से कीमतों में थोड़ा अंतर होता है।
भविष्य का बाजार और आगे की राह
आने वाले दिनों में चांदी का यह बाजार किस करवट बैठेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में डॉलर की स्थिति क्या रहती है। यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर कोई नरम रुख अपनाता है, तो एक बार फिर चांदी की चमक वापस लौट सकती है। लेकिन फिलहाल घरेलू मोर्चे पर कारोबारियों को सरकार के इस नए फैसले के साथ तालमेल बिठाना ही होगा। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और जैसे ही बाजार या नीतिगत स्तर पर कोई नया अपडेट आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।











