बाकू/अंकारा — अज़रबैजान के स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने पर लगाई गई रोक के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया भूचाल आ गया है। नब्बे प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश अज़रबैजान के इस कड़े कदम को वहां की सरकार ने धर्मनिरपेक्षता की रक्षा से जोड़ा है। लेकिन इस फैसले के बाद देश की कई शिक्षण संस्थानों के बाहर छात्राओं का प्रदर्शन शुरू हो गया है। रोती हुई छात्राएं और उनके अभिभावक इस पाबंदी को तुरंत हटाने की मांग कर रहे हैं। इस अंदरूनी विवाद ने अब दो पड़ोसी और मित्र देशों के बीच कूटनीतिक खाई को गहरा कर दिया है।
इस पूरे मामले पर तुर्की ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और अज़रबैजान सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की है। तुर्की का मानना है कि इस तरह के प्रतिबंध धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर सीधा हमला हैं। दूसरी तरफ अज़रबैजान ने तुर्की की इस दखलंदाजी को पूरी तरह खारिज कर दिया है। बाकू प्रशासन ने दो टूक कहा है कि देश के आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी देश का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस तीखी बयानबाजी के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
पाकिस्तान के दो करीबी दोस्तों में बढ़ी तकरार
इस कूटनीतिक ड्रामे का एक और दिलचस्प पहलू क्षेत्रीय राजनीति से जुड़ा हुआ है। अज़रबैजान और तुर्की दोनों ही देश पारंपरिक रूप से पाकिस्तान के बेहद करीबी और भरोसेमंद दोस्त माने जाते हैं। लेकिन अब हिजाब बैन के मुद्दे पर पाकिस्तान के इन दोनों ही खास दोस्तों के रास्ते अलग होते दिख रहे हैं। अज़रबैजान के कड़े तेवर और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन की आलोचना ने पाकिस्तान के रणनीतिक समीकरणों को भी उलझन में डाल दिया है। इस्लामाबाद के लिए यह स्थिति असहज पैदा करने वाली साबित हो रही है क्योंकि वह दोनों ही देशों के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखना चाहता है।
अज़रबैजान के भीतर भी इस फैसले को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। सरकार का तर्क है कि देश के संविधान में धर्मनिरपेक्षता को सर्वोपरि रखा गया है और सरकारी संस्थानों में एकरूपता जरूरी है। वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार संगठन और कई स्थानीय समूह इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन बता रहे हैं। कॉलेजों के बाहर जमा भीड़ और पुलिस के बीच हल्की झड़पों की खबरें भी सामने आ रही हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
एर्दोगन के सामने खड़ी हुई नई कूटनीतिक चुनौती
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन खुद को मुस्लिम दुनिया के एक बड़े पैरोकार के रूप में पेश करते आए हैं। ऐसे में अज़रबैजान जैसे करीबी मुस्लिम देश में हिजाब पर पाबंदी लगना उनके लिए भी एक राजनीतिक चुनौती बन गया है। यदि वे इस मुद्दे पर चुप रहते हैं तो घरेलू मोर्चे पर उनकी कट्टर छवि को धक्का लग सकता है। वहीं अगर वे ज्यादा विरोध करते हैं तो अज़रबैजान के साथ दशकों पुराने रणनीतिक और सामरिक संबंध खराब हो सकते हैं। अज़रबैजान की तरफ से आई तीखी प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि बाकू किसी भी कीमत पर अपनी घरेलू नीति पर समझौता करने के मूड में नहीं है।
जमीनी स्तर पर स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। स्कूल और कॉलेजों के गेट पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के जरिए मामला नहीं सुलझाया गया, तो यह विवाद मध्य एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति में दूरगामी असर डाल सकता है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे के अपडेट्स जल्द साझा किए जाएंगे।






