नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में त्योहारों के मौसम में तिथियों को लेकर अक्सर लोगों में संशय रहता है। इस बार भी शारदीय नवरात्रि में महाष्टमी और महानवमी की तारीख को लेकर भारी भ्रम देखा जा रहा है। आम लोग यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि कन्या पूजन 18 तारीख को करें या 19 तारीख को। मंदिरों के बाहर और बाजारों में लोग पुरोहितों से सही तारीख पूछ रहे हैं। गूगल पर भी इस समय तारीखों से जुड़े सवाल सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहे हैं। त्योहार की तैयारी करने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल व्रत खोलने और पूजन के शुभ समय का है।
ज्योतिषियों के अनुसार हिंदू पंचांग में तिथियों का घटना और बढ़ना सूर्योदय के समय पर निर्भर करता है। इस बार अष्टमी तिथि एक दिन दोपहर में शुरू हो रही है। यही वजह है कि कुछ लोग उदय तिथि के हिसाब से 19 तारीख मान रहे हैं। वहीं कुछ लोग शाम की तिथि देखकर 18 तारीख को ही पूजा करने की सलाह दे रहे हैं। बनारस और अयोध्या के कई बड़े विद्वानों ने पंचांग खोलकर स्थिति साफ की है। उनका कहना है कि अष्टमी और नवमी का मेल होने से यह स्थिति बनी है।
पंचांग में तिथियों का फेर और पूजा का सही समय
पंचांग के जानकारों का कहना है कि उदया तिथि का हिंदू धर्म में बहुत बड़ा महत्व होता है। जिस दिन सुबह सूर्य निकलते समय जो तिथि होती है, उसी दिन का मान पूरे दिन रहता है। अष्टमी तिथि का आरंभ एक दिन पहले शाम के समय हो रहा है। इसलिए कई साधक रात की निशा पूजा 18 तारीख की रात को ही करेंगे। लेकिन कुल परंपरा के अनुसार कन्या पूजन सुबह के समय किया जाता है। इसलिए 19 तारीख की सुबह कन्या पूजन के लिए सबसे बेहतर मानी जा रही है।
कुछ इलाकों में 19 तारीख को ही नवमी तिथि भी शुरू हो जाएगी। इस वजह से कई घरों में हवन और कन्या भोज एक ही दिन संपन्न होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित राधे मोहन झा ने बताया कि पंचांगों में थोड़ा बहुत मतभेद स्थानीय समय के कारण आता है। मिथिला पंचांग और काशी पंचांग के समय में कुछ मिनटों का अंतर रहता है। इसी अंतर की वजह से हर साल तिथियों को लेकर लोगों में ऐसी बहस शुरू हो जाती है। भक्तों को अपने कुलगुरु और स्थानीय परंपरा के हिसाब से ही व्रत का पालन करना चाहिए।
स्कूलों और दफ्तरों में छुट्टी को लेकर उठी मांग
त्योहार की तारीखों के इस फेर का असर अब सरकारी कैलेंडरों और स्कूलों की छुट्टियों पर भी पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजा है। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी सूची में छुट्टी किसी और दिन दर्ज है। जबकि असल में नवमी और दशहरा का पूजन अलग दिन पड़ रहा है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले शिक्षकों और छोटे बच्चों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अभिभावकों ने भी जिला प्रशासन से छुट्टी की तारीख बदलने की अपील की है। लखनऊ और कानपुर में शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने अधिकारियों से मिलकर ज्ञापन सौंपा है। उनका कहना है कि 19 तारीख को नवमी के दिन पूरे प्रदेश में कन्या पूजन होता है। मातृशक्ति के इस बड़े पर्व पर स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बहुत कम रहती है। इसलिए सरकार को पंचांग के हिसाब से अवकाश की तारीख में तुरंत सुधार करना चाहिए। शासन स्तर पर भी इस मांग पर विचार करने की बात कही जा रही है।
बाजारों में खरीदारी और त्योहार की तैयारियां
तारीखों के इस असमंजस के बीच बाजारों में रौनक अपने पूरे चरम पर पहुंच गई है। फल, फूल और पूजन सामग्री की दुकानों पर सुबह से ही भारी भीड़ जुट रही है। चुनरी, नारियल और हवन सामग्री के दाम भी इस समय बढ़ गए हैं। दिल्ली के चांदनी चौक से लेकर पटना और लखनऊ के बाजारों में व्यापारी खुश नजर आ रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि तारीख चाहे 18 हो या 19, लोग दोनों ही दिन खरीदारी कर रहे हैं। इससे व्यापार को काफी सहारा मिला है।
हलवाई की दुकानों पर भी कन्या भोज के लिए सूखे मेवे और हलवे के सामान के ऑर्डर लिए जा रहे हैं। माता के मंदिरों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिस बल को सुबह चार बजे से ही मंदिरों के प्रवेश द्वारों पर तैनात रहने को कहा गया है। सीसीटीवी कैमरों की मदद से भीड़ पर नजर रखी जा रही है ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन में कोई दिक्कत न आए।
भक्तों को क्या सलाह दे रहे हैं धर्मगुरु?
इस पूरे मामले पर विभिन्न अखाड़ों और शक्तिपीठों के संतों ने भी अपनी राय दी है। संतों का कहना है कि भक्ति में तारीख से ज्यादा मन का भाव जरूरी होता है। यदि कोई साधक 18 तारीख की शाम को संधि पूजा कर रहा है तो वह भी शास्त्र सम्मत है। वहीं जो लोग 19 तारीख को नवमी मानकर कन्या खिला रहे हैं, उनका व्रत भी पूर्ण माना जाएगा। किसी भी भ्रम में आकर मन को छोटा करने की जरूरत नहीं है।
सनातन परंपरा में स्थानीय परंपरा और संप्रदाय की मान्यताओं को हमेशा ऊंचा स्थान दिया गया है। बंगाली समाज में दुर्गा पूजा की महाअष्टमी और संधि पूजा का समय अलग तरीके से निकाला जाता है। वहीं उत्तर भारत में लोग नवमी को हवन के बाद व्रत का पारण करते हैं। इसलिए जानकारों का सुझाव है कि लोग अपने घर के बुजुर्गों और पुरोहितों के निर्देश का पालन करें। किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और श्रद्धापूर्वक मां दुर्गा की आराधना करें।







