बेंगलुरु के फिल्म जगत में आज भी एक नाम ऐसा है जो हर किसी की जुबान पर और दिल में बसा हुआ है। कन्नड़ फिल्मों के महानायक पुनीत राजकुमार, जिन्हें प्यार से सब 'अप्पु' कहते थे, हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी यादें आज भी ताजा हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनके चाहने वालों ने उन्हें नम आंखों से याद किया। फैंस लगातार उनके पुराने वीडियो और भाषण शेयर कर रहे हैं, जिनमें वे समाज को आगे बढ़ाने की बात करते नजर आते हैं।
पुनीत राजकुमार सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि वे जमीन से जुड़े एक बहुत अच्छे इंसान भी थे। उन्होंने अपने जीवन में कई गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया और कई अनाथ आश्रमों की मदद की। उनके जाने के बाद जब दुनिया को उनके गुप्तदान के बारे में पता चला, तो हर कोई हैरान रह गया। वे कभी भी अपने इन अच्छे कामों का प्रचार नहीं करते थे। यही वजह है कि आज भी आम लोग उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं और उनके दिखाए रास्ते पर चलने की कोशिश करते हैं।
सिनेमा जगत और राजनेताओं ने दी श्रद्धांजलि
पुनीत राजकुमार के योगदान को याद करते हुए दक्षिण भारत के तमाम कलाकारों और राष्ट्रीय नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके फैंस ने उन्हें समर्पित कई विशेष कार्यक्रम चलाए। कलाकारों का कहना है कि पुनीत का यूं अचानक चले जाना कन्नड़ फिल्म उद्योग के लिए एक ऐसा घाटा है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता। उनकी आखिरी फिल्मों और उनके शानदार अभिनय को याद करके आज भी सिनेमाघरों में लोग भावुक हो जाते हैं।
दूसरी ओर, कर्नाटक की राजनीति में भी पुनीत राजकुमार की फिल्मों को लेकर सुगबुगाहट देखने को मिली है। हाल ही में राजनीतिक बयानों के दौरान उनकी आखिरी फिल्म 'जेम्स' की स्क्रीनिंग और अन्य फिल्मों को लेकर चर्चाएं सामने आईं। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि कुछ खास फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए पुनीत की फिल्मों को सिनेमाघरों में पर्याप्त जगह मिलने में दिक्कतें आईं। हालांकि, इन सब राजनीतिक चर्चाओं से ऊपर उठकर आम जनता के दिल में पुनीत राजकुमार के लिए जो प्यार है, वह समय के साथ और ज्यादा गहरा होता जा रहा है।
सोशल मीडिया पर गूंजा 'अप्पु' का नाम
आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट पर जब भी पुनीत राजकुमार का कोई पुराना मोटिवेशनल वीडियो सामने आता है, वह तुरंत वायरल हो जाता है। लोग उनके भाषणों को शेयर करते हैं जिनमें वे युवाओं को मेहनत करने और अपनों का सम्मान करने की सीख देते थे। उनके फैंस का ग्रुप आज भी कर्नाटक के अलग-अलग जिलों में रक्तदान शिविर और गरीबों को खाना बांटने जैसे सामाजिक काम कर रहा है। यह इस बात का सबूत है कि पुनीत भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और काम हमेशा जिंदा रहेंगे।
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल में यह साफ हुआ कि एक असल हीरो वही होता है जो पर्दे के बाहर भी लोगों की जिंदगी में उजाला करे। पुनीत राजकुमार ने यही किया था। उनके फैंस आज भी उनकी फिल्मों के गानों को गुनगुनाते हैं और उनकी यादों को संजोकर रखते हैं। कर्नाटक की संस्कृति और सिनेमा में 'अप्पु' का नाम हमेशा अमर रहेगा और आने वाली पीढ़ियां भी उनके जनहित के कार्यों से प्रेरणा लेती रहेंगी।




