नई दिल्ली के तिहाड़ जेल परिसर में इन दिनों हलचल काफी तेज हो गई है। हाल ही में हुए एक बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद गिरफ्तार किए गए सौरभ दास और आशुतोष रांका को जेल के अंदर अलग-अलग बैरकों में शिफ्ट कर दिया गया है। जेल प्रशासन ने सुरक्षा और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए यह बड़ा कदम उठाया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आशुतोष रांका को तिहाड़ की बैरक संख्या चार में रखा गया है, जबकि सौरभ दास को बैरक संख्या दो में कड़ी निगरानी के तहत भेजा गया है। प्रशासन का कहना है कि दोनों आरोपियों के बीच आपसी दूरी बनाए रखना जरूरी था ताकि जेल के भीतर किसी भी प्रकार की तनावपूर्ण स्थिति से बचा जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत हाल ही में हुए उस प्रदर्शन से हुई थी जिसमें कई छात्र नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली थी। मौके पर हालात इतने बिगड़ गए थे कि पुलिस बल को स्थिति संभालने के लिए कड़े कदम उठाने पड़े। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक के वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए थे। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई मुख्य चेहरों को हिरासत में ले लिया और बाद में उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
तिहाड़ की अलग-अलग बैरकों में क्यों रखे गए दोनों आरोपी?
जेल सूत्रों के मुताबिक जब किसी मामले में एक से ज्यादा हाई-प्रोफाइल या चर्चा में रहने वाले आरोपियों को लाया जाता है, तो जेल मैन्युअल के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिश पर सौरभ दास और आशुतोष रांका को एक ही वार्ड या बैरक में रखने के बजाय अलग-अलग जगहों पर रखा गया है। जेल प्रशासन हर गतिविधि पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और सीसीटीवी कैमरों के जरिए दोनों की बैरकों की लगातार निगरानी की जा रही है। तिहाड़ के अधिकारियों का कहना है कि जेल के भीतर अनुशासन बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर यह अलगाव जरूरी था।
दूसरी ओर, इस मामले में कानूनी मोर्चे पर भी लगातार हलचल बनी हुई है। प्रदर्शन के दौरान पकड़े गए अन्य लोगों और सहयोगियों को लेकर अदालत में सुनवाई हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे प्रकरण से जुड़े अभिजीत दीपके के गुरु को पांच हजार रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया गया है। इसके अलावा अजिंक्य शिंदे को भी बॉन्ड पर जमानत मिल गई है और वे जेल से बाहर आ चुके हैं। हालांकि, सौरभ दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं क्योंकि उनके खिलाफ दर्ज मामलों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अभी जेल में ही वक्त बिताना होगा। उनके वकील कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उनकी जमानत अर्जी तैयार कर रहे हैं।
सीजेपी प्रोटेस्ट के बाद अब आगे क्या होगी कानूनी कार्रवाई?
यह पूरा विवाद CJP (सेंटर फॉर जस्टिस एंड पीस) या उससे जुड़े संगठनों के प्रदर्शन से उपजा है, जिसमें युवाओं और छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। दिल्ली की सड़कों पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब अदालतों और जेल की चारदीवारी तक पहुंच चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर उन सभी लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान कानून हाथ में लिया था। आने वाले दिनों में पुलिस इस मामले में और भी खुलासे कर सकती है और कुछ अन्य लोगों से पूछताछ भी की जा सकती है।
राजधानी में इस घटना के बाद से राजनीतिक गलियारों और छात्र संगठनों में भी सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दल और विभिन्न छात्र संगठन पुलिस की कार्रवाई के तौर-तरीकों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन का पक्ष है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और शांति बनाए रखना उनका मुख्य दायित्व है। तिहाड़ जेल में बंद सौरभ दास और आशुतोष रांका की अगली पेशी पर सभी की नजरें टिकी हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले से जुड़े हर एक नए अपडेट पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नई आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाई जाएगी।








