अहमदाबाद/ग्राउंड ब्यूरो — गुजरात की राजनीति के पुराने खिलाड़ी शंकारसिंह वाघ को लेकर सूबे में एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पिछले कुछ घंटों से इंटरनेट पर उनके नाम को लेकर लोगों की उत्सुकता काफी बढ़ गई है और गूगल ट्रेंड्स में उनका नाम शीर्ष पर चल रहा है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या बापू फिर से किसी बड़े राजनीतिक मंच पर वापसी की तैयारी कर रहे हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने जब इस अचानक पैदा हुई हलचल की पड़ताल की तो कई दिलचस्प बातें सामने आईं।
शंकारसिंह वाघ, जिन्हें गुजरात के लोग प्यार से 'बापू' कहते हैं, का राजनीतिक सफर हमेशा से उतार-चढ़ाव और कदार मोड़ों से भरा रहा है। उन्होंने अपने लंबे करियर में जनता दल से लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी तक कई बड़े दलों के साथ काम किया है। राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके बापू की ज़मीन पर पकड़ और सियासी सूझबूझ से आज भी कोई इनकार नहीं कर सकता है। यही वजह है कि जब भी उनका नाम अचानक चर्चा में आता है, तो दिल्ली से लेकर गांधीनगर तक राजनीतिक दलों के दफ्तरों में सुगबुगाहट तेज हो जाती है।
गुजरात की सियासत में क्यों तेज हुई चर्चा?
पिछले कुछ दिनों से राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों और आने वाले राजनीतिक समीकरणों को लेकर बैठकों का दौर जारी है। ऐसे समय में शंकारसिंह वाघ का सक्रिय होना और राजनीतिक जानकारों से मिलना-जुलना इस बात का संकेत दे रहा है कि वह परदे के पीछे कोई बड़ी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में उनके पुराने समर्थक आज भी उनके एक इशारे का इंतजार करते हैं। जानकारों का मानना है कि बापू का यह नया कदम किसी पुराने दल में घर वापसी का हो सकता है या फिर वह किसी नए मोर्चे की सुगबुगाहट को हवा दे रहे हैं।
आम जनता और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच भी इस बात की चर्चा है कि क्या बापू युवाओं की नई टीम के साथ मैदान में उतरेंगे। राज्य की राजनीति में इन दिनों नेतृत्व और मुद्दों को लेकर एक खालीपन सा महसूस किया जा रहा है। ऐसे में शंकारसिंह वाघ जैसे अनुभवी नेता की एंट्री समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है। हालांकि, अभी तक बापू की तरफ से खुद कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे सस्पेंस और भी ज्यादा गहराता जा रहा है।
बापू के अगले कदम पर टिकी हैं सबकी निगाहें
राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शंकारसिंह वाघ कभी भी बिना किसी ठोस तैयारी के कोई बयान नहीं देते हैं। उनके हर कदम के पीछे एक गहरा राजनीतिक संदेश छिपा होता है, जिसे समझना विरोधी दलों के लिए हमेशा से मुश्किल रहा है। इस बार भी जब सोशल मीडिया और सर्च ट्रेंड्स में उनका नाम सबसे आगे है, तो हर कोई उनके अगले प्रेस कॉन्फ्रेंस या सार्वजनिक संबोधन का इंतजार कर रहा है। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या गुजरात की राजनीति में कोई नया भूचाल आने वाला है।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल यह बताती है कि अगले कुछ दिनों में राज्य की सियासत में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। चाहे वह किसी पार्टी का दामन थामना हो या फिर किसानों और आम जनता के मुद्दों पर कोई बड़ा आंदोलन छेड़ना हो, बापू की एंट्री हमेशा से असरदार रही है। कार्यकर्ता अभी से उनके आवास के बाहर जुटने लगे हैं और माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है।
क्या नया समीकरण साधने की तैयारी में हैं बापू?
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा जोरों पर है कि शंकारसिंह वाघ गुजरात के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश कर सकते हैं। राज्य में विपक्षी दल लंबे समय से एक मजबूत चेहरे की तलाश में हैं जो सत्ताधारी दल को कड़ी टक्कर दे सके। ऐसे में बापू का अनुभव और उनकी पुरानी साख विपक्ष के लिए एक बड़ा हथियार साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि इंटरनेट पर ट्रेंड कर रहा यह नाम सिर्फ एक कयास है या किसी बड़े राजनीतिक तूफान की शुरुआत।




