कोलकाता/ग्राउंड ब्यूरो — देश-विदेश की राजनीति में इन दिनों बंगाल और बांग्लादेश का मुद्दा सबसे ऊपर चल रहा है। बांग्लादेश में तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच जानी-मानी लेखिका तस्लीमा नसरीन अचानक कोलकाता पहुंच गई हैं। उनके आने के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपनी चिंता खुलकर जाहिर की और कहा कि 'पता नहीं क्या होगा?' उनके इस बयान ने पड़ोसी देश के मौजूदा हालातों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।
तस्लीमा नसरीन लंबे समय से बांग्लादेश से बाहर रह रही हैं और अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जानी जाती हैं। बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक बदलाव और तारिक रहमान के संभावित दौरों व बयानों के बीच उनका कोलकाता आना बहुत अहम माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है। कोलकाता पहुंचने के बाद से ही उनके अगले कदमों पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं कि वे आगे क्या रुख अपनाती हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला और पारिवारिक मामले
इस बीच बंगाल से जुड़े अन्य कानूनी मामले भी सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए बांग्लादेशी पत्नी को भारत में एंट्री न मिलने पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने पति को निर्देश दिया है कि वह खुद जाकर सिर्फ अपने बेटे को वापस ले आए। इस तरह के मामलों से सीमा पार के पारिवारिक और कानूनी पेंच एक बार फिर से खुलकर सामने आ रहे हैं। आम लोग इन कानूनी फैसलों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं ताकि उन्हें समझ आ सके कि ऐसे मामलों में कानून कैसे काम करता है।
दूसरी तरफ बंगाल की राजनीति में भी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। आगामी चुनावों और राजनीतिक सभाओं के सिलसिले में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव भी ममता बनर्जी के समर्थन में कोलकाता पहुंच चुके हैं। कोलकाता पहुंचने के बाद उन्होंने राज्य की राजनीतिक स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने राज्य में हो रही हिंसक घटनाओं के लिए सीधे तौर पर चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है। अखिलेश यादव के इस दौरे से विपक्षी दलों की एकजुटता और मजबूत होती दिखाई दे रही है।
चुनाव आयोग के सख्त फैसले और शराब की बिक्री पर रोक
बंगाल में चुनाव के माहौल को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। राज्य में पहले चरण की वोटिंग से ठीक पहले शराब की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पिछले कुछ दिनों में अप्रैल महीने के दौरान जिस तरह से शराब की बेतहाशा बिक्री हुई थी, उसे ध्यान में रखते हुए आयोग ने यह कड़ा फैसला लिया है। स्थानीय प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा हुआ है कि मतदान के दौरान किसी भी तरह की अशांति या अवैध गतिविधियों को तुरंत रोका जा सके।
इसके अलावा चुनाव परिणामों को लेकर भी राजनीतिक दलों में खींचतान जारी है। तृणमूल कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वे बंगाल के चुनाव नतीजों को लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने सभी जीते हुए उम्मीदवारों को खास निर्देश जारी किए हैं कि वे कानूनी लड़ाई के लिए तैयार रहें। पार्टी किसी भी स्तर पर पीछे हटने को तैयार नहीं है और कानूनी रूप से अपनी बात साबित करना चाहती है।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल और सुरक्षा हालात
द फ्रीलान्स की टीम ने जब कोलकाता और आसपास के इलाकों का दौरा किया तो यह पाया कि आम जनता के मन में इन सभी राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। एक तरफ जहां सीमा पार के हालातों को लेकर चिंता है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के अपने चुनावी और कानूनी संघर्ष भी तेज हो चुके हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों ने शहर के चप्पे-चप्पे पर पहरा बिठा दिया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटा जा सके।
तस्लीमा नसरीन के कोलकाता आगमन से लेकर राजनीतिक दलों के दौरों तक, हर घटना राज्य के मौजूदा माहौल को गर्मा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये तमाम राजनीतिक और कानूनी कदम बंगाल की दिशा तय करने में क्या भूमिका निभाते हैं। हमारी टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेगी और हर नया अपडेट सबसे पहले आप तक पहुंचाती रहेगी।







