बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को आज उनकी दमदार एक्टिंग और शानदार डायलॉग डिलीवरी के लिए जाना जाता है। उनका स्टारडम किसी से छिपा नहीं है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उन्होंने अभिनय की दुनिया से ब्रेक लेकर राजनीति में अपनी किस्मत आजमाई थी। उस समय वह अपने करियर के चरम पर थे और उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई कर रही थीं। इसके बावजूद उन्होंने राजनीति का रुख किया और सांसद बने, लेकिन यह सफर ज्यादा लंबा नहीं चल सका।
गांधी परिवार की दोस्ती और राजनीति में एंट्री
अमिताभ बच्चन का गांधी परिवार से बेहद पुराना और गहरा रिश्ता रहा है। अमिताभ की मां तेजी बच्चन और इंदिरा गांधी के बीच गहरी दोस्ती थी। इंदिरा गांधी की दुखद हत्या के बाद उपजे राजनीतिक हालाوس के बीच, राजीव गांधी के विशेष आग्रह पर अमिताभ बच्चन ने राजनीति में आने का फैसला किया। उस समय वे फिल्मों में सबसे व्यस्त और महंगे कलाकार थे, लेकिन देश के हालात को देखते हुए उन्होंने चुनावी मैदान में उतरने का जोखिम उठाया।
साल 1984 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित इलाहाबाद सीट से चुनाव लड़ा। उनके सामने राजनीति के दिग्गज नेता हेमवती बहुगुणा थे, जिन्हें अमिताभ बच्चन ने एक भारी अंतर से शिकस्त दी। इस जीत ने पूरे देश में तहलका मचा दिया था।
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'पता नहीं था देश में इतनी गरीबी है'
प्रसिद्ध राजनीतिक पत्रकार और लेखिका तवलीन सिंह ने हाल ही में अमिताभ बच्चन के इस राजनीतिक सफर पर खुलकर बात की। तवलीन ने उस समय चुनाव जीतने के तुरंत बाद अमिताभ का इंटरव्यू लिया था। उन्होंने खुलासा किया कि चुनाव जीतने के बाद अमिताभ बच्चन ने उनसे कहा था कि उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि देश में इतनी गरीबी है। जमीनी हकीकत से रूबरू होना उनके लिए एक बड़ा झटका था।
महज तीन साल में क्यों छोड़ दी राजनीति?
अमिताभ बच्चन का राजनीतिक सफर महज तीन साल का ही रहा। उन्होंने 1987 में सांसद पद से इस्तीफा दे दिया और राजनीति से हमेशा के लिए दूरी बना ली। इसके पीछे मुख्य वजह बहुचर्चित बोफोर्स दलाली कांड और गांधी परिवार के साथ आए मनमुटाव को माना जाता है। तवलीन सिंह के अनुसार, बच्चन परिवार बोफोर्स मामले में लगे गंभीर आरोपों से बेहद आहत था। अमिताभ इस बात से भी दुखी थे कि उस कठिन समय में राजीव गांधी ने उनके परिवार का राजनीतिक बचाव नहीं किया।
हालाँकि, सालों बाद 2012 में स्वीडिश जांच से जुड़े एक अधिकारी ने साफ किया था कि अमिताभ बच्चन और उनके परिवार का नाम इस घोटाले में जानबूझकर राजनीतिक साजिश के तहत घसीटा गया था। इसके बावजूद, अमिताभ ने कभी दोबारा राजनीति की तरफ मुड़कर नहीं देखा और पूरी तरह से सिनेमा जगत में लौट आए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो एवं साक्षात्कारों के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह किस्सा मीडिया रिपोर्ट्स और पुरानी राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।






