देश के कई राज्यों में इन दिनों डेंगू का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश तक हर तरफ डेंगू के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। डेंगू का नाम आते ही सबसे पहले जिस चीज की चर्चा शुरू होती है, वह है 'प्लेटलेट्स'। आखिर प्लेटलेट्स क्या हैं, ये अचानक क्यों कम हो जाते हैं और इनसे जुड़ी सावधानियां क्या हैं, यह जानना हर आम नागरिक के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, डेंगू की बीमारी में सबसे बड़ा खतरा प्लेटलेट्स की संख्या में अचानक आई भारी गिरावट से होता है। अगर यह संख्या एक निश्चित स्तर से नीचे चली जाए, तो मरीज के लिए जानलेवा स्थिति बन सकती है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि शरीर में प्लेटलेट्स का काम क्या है और इन्हें नेचुरल तरीके से कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
क्या होता है प्लेटलेट्स का काम और शरीर में इनकी सही मात्रा?
हमारे शरीर में प्लेटलेट्स को खून की 'रिपेयरिंग यूनिट' माना जाता है। जब भी शरीर में किसी हिस्से में चोट लगती है और खून बहने लगता है, तो प्लेटलेट्स तुरंत उस जगह पर पहुंचकर एक्टिव हो जाते हैं और ब्लड क्लॉट बनाकर खून को बहने से रोकते हैं। यदि प्लेटलेट्स न हों, तो मामूली खरोंच से भी लगातार खून बहने का खतरा बना रहेगा।
एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति के शरीर में आमतौर पर प्रति माइक्रोलीटर ब्लड में 1.5 लाख से 4.5 लाख प्लेटलेट्स की संख्या होनी चाहिए। अगर यह संख्या इस सामान्य सीमा से बहुत ज्यादा नीचे या ऊपर जाती है, तो डॉक्टरों को इसके पीछे की असली वजह तलाशनी पड़ती है। प्लेटलेट्स की सही स्थिति जानने के लिए डॉक्टर अक्सर कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC) टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं।
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डेंगू और अन्य बीमारियों में क्यों गिर जाते हैं प्लेटलेट्स?
जब किसी व्यक्ति को डेंगू, मलेरिया या वायरल इंफेक्शन होता है, तो शरीर में प्लेटलेट्स तेजी से टूटने लगते हैं और उनका बनना भी कम हो जाता है। डेंगू का वायरस बोन मैरो को प्रभावित करता है, जहां प्लेटलेट्स का निर्माण होता है। यही कारण है कि डेंगू के मरीजों का प्लेटलेट काउंट तेजी से गिरने लगता है। हालांकि, प्लेटलेट्स कम होना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह किसी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का एक संकेत मात्र है।
कई बार बिना किसी गंभीर बीमारी के भी अस्थायी रूप से प्लेटलेट्स कम दिखाई दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, डिहाइड्रेशन या कभी-कभी लैब में ब्लड सैंपल लेते वक्त प्लेटलेट्स के आपस में चिपक जाने से भी रिपोर्ट में इनकी संख्या कम आ सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर दोबारा जांच करवाने की सलाह देते हैं ताकि सही कारण का पता लगाया जा सके।
प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए क्या कहती है डाइट और साइंस?
आम तौर पर यह माना जाता है कि कुछ खास फल खाने से प्लेटलेट्स रातों-रात बढ़ जाते हैं। लेकिन चिकित्सा विज्ञान इस बात की पुष्टि नहीं करता कि कोई एक अकेला फूड सीधे तौर पर प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ा सकता है। प्लेटलेट्स का निर्माण एक जटिल जैविक प्रक्रिया है जिसके लिए संतुलित पोषण और विटामिन्स की आवश्यकता होती है। हरी सब्जियां, फल, विटामिन बी12, फोलेट और आयरन से भरपूर डाइट शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है और रिकवरी में मदद करती है।
"प्लेटलेट्स कम होने का मतलब हर बार डेंगू या कोई गंभीर बीमारी नहीं होता। इसके अलावा हर मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति, ब्लीडिंग के लक्षणों और उसके क्लिनिकल डेटा को देखकर ही कोई फैसला लेते हैं।" — डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर
प्लेटलेट्स से जुड़े बड़े मिथक और सच्चाई
समाज में प्लेटलेट्स को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। सबसे बड़ा मिथक यह है कि कीवी और पपीते के पत्ते का रस प्लेटलेट्स बढ़ाने की रामबाण दवा है। हालांकि ये फल सेहत के लिए बहुत अच्छे हैं और इम्युनिटी बढ़ाते हैं, लेकिन इन्हें किसी चमत्कारिक दवा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसी तरह, यह सोचना भी गलत है कि प्लेटलेट्स कम होने पर सिर्फ आयरन की गोलियां खाने से समस्या हल हो जाएगी।
एक और आम गलतफहमी यह है कि प्लेटलेट्स जितने ज्यादा होंगे, शरीर उतना ही हेल्दी रहेगा। जबकि सच्चाई यह है कि शरीर को एक निश्चित सामान्य मात्रा की ही आवश्यकता होती है। इसके अलावा, प्लेटलेट्स कम होने पर दूध और दही जैसी सामान्य चीजें बंद करने की कोई आवश्यकता नहीं होती, जब तक कि डॉक्टर ने किसी विशेष संक्रमण के चलते ऐसा न कहा हो।
स्वस्थ प्लेटलेट्स काउंट के लिए किन बातों का रखें ध्यान?
अपने शरीर में प्लेटलेट्स को हेल्दी और सामान्य बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपनी जीवनशैली को दुरुस्त रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो। प्रोसेस्ड फूड्स और अत्यधिक शराब जैसी आदतों से दूर रहें, क्योंकि ये प्लेटलेट्स के प्रोडक्शन और उनकी कार्यप्रणाली पर बुरा असर डालते हैं। यदि आपको शरीर में थकान, मसूड़ों से खून आना या बार-बार नीले निशान जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सप्लीमेंट खाने से बचें।





