जब ग्लैमर इंडस्ट्री में वजन बना पहचान की बाधा
मनोरंजन जगत की चकाचौंध भरी दुनिया बाहर से जितनी खूबसूरत दिखाई देती है, भीतर से उसका संघर्ष उतना ही कठिन और क्रूर होता है। यहां हर कलाकार को अपनी प्रतिभा के साथ-साथ अपने शारीरिक स्वरूप यानी फिजिकल अपीयरेंस को लेकर भी कड़े इम्तिहान से गुजरना पड़ता है। दर्शकों के बीच 'परफेक्ट फिगर' की जो परिभाषा गढ़ी गई है, उसके सांचे में जो फिट नहीं बैठता, उसे अक्सर साइडलाइन कर दिया जाता है। कई प्रतिभाशाली कलाकारों को सिर्फ इसलिए काम नहीं मिलता क्योंकि वे स्थापित सौंदर्य मानकों पर खरे नहीं उतरते। कुछ ऐसी ही कड़वी सच्चाइयों का सामना टीवी जगत की जानी-मानी अभिनेत्री अंजलि आनंद को भी अपने करियर के शुरुआती दौर में करना पड़ा था।
अंजलि आनंद ने टेलीविजन के लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। उन्होंने 'ढाई किलो प्रेम' और 'कुल्फी कुमार बाजेवाला' जैसे शोज में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। हालांकि, छोटे पर्दे पर नाम कमाने के बावजूद बड़े पर्दे यानी बॉलीवुड का रास्ता उनके लिए आसान नहीं था। उनके बढ़े हुए वजन को लेकर उन्हें अक्सर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता था। कास्टिंग डायरेक्टर से लेकर तमाम लोग उन्हें यही सलाह देते थे कि अगर वह फिल्मों में काम करना चाहती हैं, तो उन्हें सबसे पहले अपना वजन कम करना होगा। इन तानों और पाबंदियों के बीच एक कलाकार का आत्मविश्वास किस तरह टूटता है, इसका दर्द अंजलि ने बहुत करीब से महसूस किया था।
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साल 2020 का वह दौर पूरी दुनिया के लिए उथल-पुथल भरा था, लेकिन अंजलि आनंद के लिए यह व्यक्तिगत मोर्चे पर सबसे बड़ा संकटकाल साबित हुआ। कोविड-19 महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन ने न सिर्फ आम जनजीवन को प्रभावित किया बल्कि कलाकारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी थी कि अंजलि के पास काम का एक भी प्रस्ताव नहीं बचा था। लगातार बैठकों और ऑडिशन के बावजूद जब हाथ निराशा लगी, तो उनकी सारी जीवन-पूंजी यानी सेविंग्स धीरे-धीरे खत्म होने लगी।
एक साक्षात्कार के दौरान उस दौर को याद करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी थीं। निराशा इस हद तक बढ़ गई थी कि उन्होंने भारत छोड़कर हमेशा के लिए विदेश जाने और अभिनय की दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कहने का मन बना लिया था। उनके पास न तो भविष्य की कोई योजना बची थी और न ही आर्थिक स्थिरता। उनके दोस्तों ने उन्हें तनाव से बाहर निकालने के लिए गोवा की एक छोटी सी ट्रिप पर भी भेजा, लेकिन दिलो-दिमाग पर छाई मायूसी कम होने का नाम नहीं ले रही थी। परिवार के लोग भी उनकी इस स्थिति को लेकर चिंतित थे और भविष्य को लेकर संशय में थे।
शानू शर्मा का संदेश और करण जौहर का वो जादुई फैसला
जब जिंदगी सबसे ज्यादा नाउम्मीदी के दौर से गुजर रही हो, तब एक छोटी सी उम्मीद भी बड़ा बदलाव ला सकती है। अंजलि के जीवन में भी वह चमत्कारिक क्षण तब आया जब वह गोवा में थीं। उन्हें इंडस्ट्री की दिग्गज कास्टिंग डायरेक्टर शानू शर्मा का एक संदेश प्राप्त हुआ। इससे पहले जब भी अंजलि शानू से मिलती थीं, उन्हें हमेशा यही सुनना पड़ता था कि पहले वे अपना वजन कम करें। लेकिन इस बार कहानी पूरी तरह अलग थी।
शानू शर्मा ने उन्हें बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर करण जौहर के एक नए प्रोजेक्ट के लिए ऑडिशन भेजने को कहा। अंजलि की मां को इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ कि करण जौहर जैसे बड़े निर्देशक उनकी बेटी को अपनी फिल्म में कास्ट कर सकते हैं। उन्होंने अपनी मां से यहां तक कहा कि, 'बड़ी आई करण जौहर को मिलने, तुझे क्यों मिलेगा वो?' लेकिन जब करण जौहर ने अंजलि की तस्वीरें और उनका ऑडिशन देखा, तो वे बेहद प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके। निर्देशकों की स्थापित लीक से हटकर सोचने की क्षमता ने अंजलि की किस्मत का रुख हमेशा के लिए मोड़ दिया।
रॉकी और रानी की प्रेम कहानी से बदली तकदीर
करण जौहर ने अपनी फिल्म 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' में पारंपरिक हीरोइन के सांचे को तोड़ते हुए अंजलि आनंद को रणवीर सिंह की बहन के रूप में कास्ट किया। यह किरदार एक ऐसी युवती का था जिसे उसके बढ़े वजन के कारण अक्सर परिवार और समाज में बॉडी शेमिंग का शिकार होना पड़ता है। अंजलि ने पर्दे पर इस भूमिका को इतने शानदार और जीवंत तरीके से निभाया कि दर्शक देखते ही रह गए। फिल्म रिलीज होते ही उनकी अदाकारी की हर तरफ तारीफ हुई और उन्हें क्रिटिक्स का भी भरपूर प्यार मिला।
"जब सब कुछ खत्म लग रहा था और मैं देश छोड़ने की सोच रही थी, तब एक सही मौके ने मेरी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। संघर्ष का वह दौर कठिन जरूर था, लेकिन उसने मुझे अंदर से मजबूत बनाया।" — अंजलि आनंद, अभिनेत्री
इस पहली बड़ी फिल्म से मिली जबरदस्त पहचान के बाद अंजलि के लिए बॉलीवुड के दरवाजे खुल गए। इसके बाद उन्हें अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'धमाल 4' में भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिला। इससे पहले उन्होंने अक्षय कुमार की फिल्म 'बेल बॉटम' में भी काम किया था, हालांकि उस समय उन्हें फिल्म में क्रेडिट नहीं मिल पाया था। आज अंजलि आनंद इंडस्ट्री में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बना चुकी हैं। उनका यह सफर इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि असफलता और तानों के बीच अगर आप टिके रहते हैं, तो सही वक्त आने पर आपकी मेहनत जरूर रंग लाती है।







