नई दिल्ली और ढाका के बीच पिछले कुछ महीनों से चल रहे कूटनीतिक तनाव के बीच अब नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। भारत सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी के सवाल पर अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि भारत अपने पड़ोसी देश के साथ संप्रभुता और आपसी सम्मान के आधार पर ही रिश्ते आगे बढ़ाएगा। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की ओर से अचानक सुलह और बातचीत के संकेत दिए जाने के बाद राजनयिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विश्लेषक इसे कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच बिगड़े हालातों को सुधारा जा सके।
दूसरी तरफ, सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से यह भी खबरें आ रही हैं कि भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल कुछ वांछित अपराधी पड़ोसी मुल्क की जमीन का इस्तेमाल करने की फिराक में हैं। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, कराची से एक मोस्ट वांटेड आतंकी के बांग्लादेश पहुंचने की खबर से सुरक्षा तंत्र अलर्ट हो गया है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए हैं। दिल्ली में बैठे रणनीतिकार मानते हैं कि बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक जमीन का फायदा भारत विरोधी ताकतें उठा सकती हैं, इसलिए सीमा पर चौकसी और ज्यादा बढ़ा दी गई है।
झारखंड के किसानों को मिला बांग्लादेश का बड़ा बाजार
राजनीतिक उठापटक के बीच व्यापारिक मोर्चे पर एक सकारात्मक खबर भी सामने आई है। भारत के झारखंड राज्य से अब बड़े पैमाने पर गोला का शकरकंद सीधे बांग्लादेश भेजा जा रहा है। इस नए निर्यात मार्ग से झारखंड के स्थानीय किसानों को उनकी फसल का बहुत अच्छा दाम मिल रहा है। किसानों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने से उनकी आय में सीधा इजाफा हुआ है। कृषि विभाग के अधिकारी इस व्यापारिक सहयोग को दोनों देशों के आम नागरिकों के हित में एक बड़ा कदम मान रहे हैं, जो राजनीति से परे होकर आपसी व्यापार को मजबूत कर रहा है।
व्यापारिक रिश्तों को और गति देते हुए पूर्वोत्तर भारत में जलमार्ग परिवहन को भी पुनर्जीवित कर दिया गया है। आजादी के बाद यह पहला मौका है जब असम के डिब्रूगढ़ से एक बड़ा कार्गो जहाज सीधे बांग्लादेश के लिए रवाना हुआ है। इस जलमार्ग के शुरू होने से भारी सामान को कम लागत में और कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाना संभव हो गया है। कारोबारियों का मानना है कि इससे लॉजिस्टिक्स का खर्च घटेगा और पूर्वोत्तर राज्यों के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी।
सुरक्षा और कूटनीति के बीच पिसते आपसी रिश्ते
एक तरफ जहां व्यापार और जलमार्ग परिवहन के जरिए दोनों देशों के बीच आर्थिक नजदीकियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक बयानबाजी का दौर भी जारी है। बांग्लादेशी हुक्मरानों के तेवर में अचानक आए बदलाव को लेकर भारत के रणनीतिक विशेषज्ञ फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि ढाका की तरफ से सुलह की बातें सिर्फ दिखावा भी हो सकती हैं, इसलिए भारत अपनी सुरक्षा से समझौता किए बिना हर प्रस्ताव का बारीकी से परीक्षण कर रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच उच्च स्तर की बैठकों में इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।
जमीनी स्तर पर सीमावर्ती इलाकों के लोग और व्यापारी चाहते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते जल्द से जल्द सामान्य हों ताकि सीमा पार व्यापार सुचारू रूप से चलता रहे। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि राजनीति अपनी जगह है लेकिन व्यापार और आजीविका के साधनों पर असर नहीं पड़ना चाहिए। प्रशासन भी स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है और हरसंभव एहतियाती कदम उठा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
भविष्य की रणनीतिक चुनौतियां और भारत का रुख
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले समय में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते कई मोर्चों पर परीक्षा से गुजरेंगे। एक तरफ आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की कोशिशें जारी हैं तो दूसरी तरफ सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत कोई ढील देने के मूड में नहीं है। नई दिल्ली स्पष्ट कर चुकी है कि द्विपक्षीय संबंधों की बहाली के लिए आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई जरूरी शर्त है। भारत की यह नीति आने वाले दिनों में दक्षिण एशिया की भू-राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।





