वाराणसी और ओडिशा से लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र राजनीति का पारा इन दिनों काफी ज्यादा गर्म हो गया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू के मुख्य परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों ने भारी रोष जताया है। पिछले अठारह दिनों से लगातार चल रहे धरने और प्रदर्शन के बाद भी जब विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। इसी कड़ी में कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर कुलपति कार्यालय के मुख्य दरवाजे पर तालाबंदी कर दी और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। छात्रों का साफ कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं और जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं दिख रही है।
छात्र संगठन के नेताओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन मुद्दों को सुलझाने के बजाय छात्रों को केवल गुमराह करने का काम कर रहा है। पिछले करीब तीन हफ्तों से छात्र अपनी विभिन्न जायज मांगों को लेकर लगातार शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, लेकिन संवादहीनता के कारण हालात बिगड़ते चले गए। प्रदर्शनकारी छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया तो इस आंदोलन को और भी ज्यादा तेज किया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से मौके पर भारी पुलिस बल और प्रॉक्टर बोर्ड के सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
ओडिशा में छात्रसंघ चुनाव के बीच लापता प्रत्याशी
इस बीच पूर्वी राज्य ओडिशा से भी छात्र राजनीति से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य में चल रहे छात्रसंघ चुनाव की गहमागहमी के बीच एबीवीपी का एक प्रत्याशी अचानक अपने हॉस्टल से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गया है। इस घटना के सामने आने के बाद से ही छात्र संगठनों में हड़कंप मच गया है और पुलिस प्रशासन पर तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है। स्थानीय पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक विशेष जांच टीम का गठन कर दिया है और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
लापता छात्र के साथियों और संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने पुलिस थाने के बाहर जमकर प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। उनका कहना है कि चुनाव के समय इस तरह से किसी उम्मीदवार का गायब होना एक बड़ी साजिश की तरफ इशारा करता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे सभी संभावित पहलुओं से इस मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं और जल्द ही छात्र का सुराग लगा लिया जाएगा। इस घटना के बाद से ओडिशा के कई कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है ताकि चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी कराई जा सके।
छात्रवृत्ति आवेदन और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर गरमाई सियासत
केवल बीएचयू और ओडिशा ही नहीं, बल्कि अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी छात्रों की बुनियादी समस्याओं को लेकर सियासत और प्रदर्शन का दौर तेज हो गया है। छात्रवृत्ति के ऑनलाइन फॉर्म भरने में आ रही तकनीकी दिक्कतों और सर्वर डाउन होने की समस्या को लेकर भी विद्यार्थी परिषद ने आवाज उठाई है। छात्रों का कहना है कि वेबसाइट ठीक से न चलने के कारण हजारों गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थी आवेदन करने से वंचित रह सकते हैं। इसे देखते हुए छात्र संगठन ने मांग की है कि छात्रवृत्ति फॉर्म जमा करने की अंतिम तारीख को कम से कम एक महीने के लिए और आगे बढ़ाया जाए ताकि किसी भी छात्र का भविष्य खराब न हो।
इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में महिला सुरक्षा और परिसरों में सुरक्षा के कड़े इंतजामों को लेकर भी बहस छिड़ गई है। पक्ष और विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं और एक-दूसरे पर राजनीतिक रोटियां सेकने के आरोप लगाए जा रहे हैं। द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल में यह बात सामने आई है कि छात्र इन दिनों अपनी अकादमिक और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर काफी मुखर हो चुके हैं। आने वाले दिनों में यदि प्रशासन ने इन सभी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया तो छात्र आंदोलन का दायरा और अधिक बड़ा हो सकता है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।










