पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा मोड़, बंगाली सिनेमा की 'टॉली क्वीन' को बीजेपी का टिकट
भारतीय राजनीति के गलियारों में इन दिनों पश्चिम बंगाल का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के खेमे से नाता तोड़ने वाली मशहूर बंगाली अभिनेत्री कोयल मल्लिक को लेकर एक बार फिर जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है। कुछ समय पहले ही टीएमसी का दामन छोड़कर अपने संसद पद से इस्तीफा देने वाली इस लोकप्रिय अभिनेत्री को अब भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा राजनीतिक तोहफा दिया है। बीजेपी ने उन्हें आगामी राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार बना दिया है, जिसके बाद से राज्य की राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
बता दें कि कोयल मल्लिक को बंगाली फिल्म उद्योग में 'टॉली क्वीन' के नाम से भी जाना जाता है। उनकी लोकप्रियता केवल पर्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि बंगाल के आम जनमानस में भी उनकी गहरी पैठ है। ऐसे में बीजेपी द्वारा उन्हें उच्च सदन भेजने की यह रणनीति आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम के जरिए पार्टी ममता बनर्जी के गढ़ में एक मजबूत और लोकप्रिय चेहरे के सहारे अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने की जुगत में है।
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कौन हैं कोयल मल्लिक और क्या रहा है उनका अब तक का सियासी सफर
कोयल मल्लिक का पूरा नाम रुक्मिणी मल्लिक है और वह बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रंजीत मल्लिक तथा दीपा मल्लिक की सुपुत्री हैं। फिल्मी पारिवारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाली कोयल ने अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले अपनी शैक्षणिक यात्रा को पूरी गंभीरता से पूरा किया था। उन्होंने कोलकाता के प्रतिष्ठित मॉडर्न हाई स्कूल फॉर गर्ल्स से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज से मनोविज्ञान विषय में ऑनर्स के साथ बैचलर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा और एक के बाद एक कई सुपरहिट बंगाली फिल्मों में काम करते हुए दर्शकों के दिलों पर राज किया।
वर्ष 2013 में उनका विवाह निर्माता निसपाल सिंह के साथ हुआ। फिल्मों की चकाचौंध भरी दुनिया से निकलकर उनका अचानक सक्रिय राजनीति की ओर रुख करना हर किसी के लिए हैरान करने वाला था। साल की शुरुआत में जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया, तो इसे एक बड़ा सांस्कृतिक और राजनीतिक दांव माना गया था। उन्होंने इसी साल 6 अप्रैल को संसद के ऊपरी सदन के सदस्य के रूप में अपनी शपथ भी ली थी।
बिना एक भी सत्र में हिस्सा लिए टीएमसी से दिया था इस्तीफा
कोयल मल्लिक का संसद में कार्यकाल बेहद संक्षिप्त और चौंकाने वाला रहा। उन्होंने सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद संसद के एक भी सत्र में हिस्सा नहीं लिया और महज़ कुछ ही महीनों के भीतर 16 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र सीधे राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को सौंपा था। उनका यह इस्तीफा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली बड़ी हार और पार्टी के भीतर से कई बड़े नेताओं के लगातार किनारा करने के दौर के ठीक बाद सामने आया था।
इस्तीफे की इस घटना के समय खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी थी। ममता ने स्पष्ट किया था कि कोयल मल्लिक ने औपचारिक रूप से कागजी इस्तीफा सौंपने से पहले ही ईमेल के माध्यम से पार्टी नेतृत्व को अपने इस फैसले से अवगत करा दिया था। उस वक्त टीएमसी सुप्रीमो ने कहा था कि एक सम्मानित और प्रतिभाशाली कलाकार के रूप में वह उनका पूरा सम्मान करती हैं और व्यक्तिगत रूप से मिलकर इस्तीफा देने के लिए उन्होंने उनका आभार भी जताया था।
16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा उपचुनाव, बीजेपी ने बिछाई सियासी बिसात
अभिनेत्री द्वारा सीट खाली किए जाने के बाद भारतीय चुनाव आयोग ने इस रिक्त हुई राज्यसभा सीट पर उपचुनाव कराने की घोषणा कर दी है। आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार इस सीट के लिए आगामी 16 अक्टूबर को मतदान संपन्न होगा। दिलचस्प बात यह है कि उपचुनाव के लिए मतदान की तारीख दुर्गा पूजा के पावन पर्व के दौरान महाषष्ठी के दिन रखी गई है। इस चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर निर्धारित की गई थी, जबकि उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक अपने नाम वापस ले सकते थे।
अब बीजेपी ने इसी खाली पड़ी सीट पर कोयल मल्लिक को अपना मुख्य चेहरा बनाते हुए चुनावी मैदान में उतार दिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह वही सीट है जिस पर ममता बनर्जी ने कभी बड़े अरमानों के साथ उन्हें सांसद बनाकर भेजा था। अब विपक्षी दल ने उन्हीं को अपने पाले में लाकर टीएमसी के खिलाफ एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक दांव खेल दिया है।
राज्य की राजनीति पर क्या पड़ेगा इस सियासी उलटफेर का असर
कोयल मल्लिक के बीजेपी खेमे में शामिल होने और पार्टी द्वारा उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने से बंगाल के राजनीतिक गलियारों में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। राज्य में आगामी सियासी चुनौतियों का सामना करने के लिए सभी दल अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। एक लोकप्रिय फिल्मी हस्ती का इस प्रकार पाલા बदलना और मुख्यधारा की राष्ट्रीय पार्टी द्वारा उसे संसद भेजने की तैयारी करना निश्चित रूप से आम जनता के बीच चर्चा का एक बड़ा विषय बना हुआ है।
"राजनीति संभावनाओं का खेल है और हर प्रतिष्ठित चेहरा अपने साथ एक अलग प्रभाव लेकर आता है। जनता अब केवल नारों पर नहीं, बल्कि जमीनी और प्रभावी चेहरों पर भरोसा करती है। आने वाले उपचुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि इस रणनीतिक फैसले का बंगाल की राजनीति पर कितना गहरा असर पड़ता है।" — राजनीतिक विश्लेषक
संक्षेप में कहें तो, बंगाली सिनेमा की 'टॉली क्वीन' का यह राजनीतिक सफर अब एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ चुका है। तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर संसद की दहलीज तक पहुंचने वाली कोयल मल्लिक का अब बीजेपी के बैनर तले दोबारा संसद पहुंचने का यह सफर राज्य की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने के लिए पूरी तरह तैयार है।








