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संवैधानिक संस्थाओं पर वार करना इंडी गठबंधन की पुरानी आदत: बीजेपी बोली- हार का ठीकरा थोपना बंद करे विपक्ष

भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता ने विपक्षी दलों पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव में बार-बार मिल रही हार से बौखलाए विपक्षी दल अब निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद सवाल खड़े कर रहे हैं।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•29 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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संवैधानिक संस्थाओं पर वार करना इंडी गठबंधन की पुरानी आदत: बीजेपी बोली- हार का ठीकरा थोपना बंद करे विपक्ष
📷 संवैधानिक संस्थाओं पर वार करना इंडी गठबंधन की पुरानी आदत: बीजेपी बोली- हार का ठीकरा थोपना बंद करे विपक्ष — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • बीजेपी नेता राजीव कुमार गुप्ता ने पार्टी कार्यालय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में विपक्षी दलों और इंडी गठबंधन को आड़े हाथों लिया।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग के सभी बड़े फैसले पूरी तरह से सर्वसम्मति और नियमों के दायरे में लिए गए हैं।
  • कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र और प्रपत्र-6 को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को पूरी तरह से खारिज किया गया।

देश की राजनीति में इन दिनों संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और निष्पक्षता को लेकर घमासान मचा हुआ है। राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों के गठबंधन यानी इंडी गठबंधन पर तीखा प्रहार किया है। भाजपा का साफ कहना है कि चुनाव में अपनी सियासी और सांगठनिक कमजोरियों को छिपाने के लिए विपक्ष अब देश की स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहा है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, अपनी नाकामियों की जिम्मेदारी लेने के बजाय इन संस्थाओं पर निराधार आरोप मढ़ना विपक्ष की राजनीतिक मजबूरी बन गया है।

प्रेस वार्ता में भाजपा नेता का विपक्ष पर बड़ा हमला

स्थानीय पार्टी कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता ने विपक्षी दलों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल लगातार जनता को गुमराह करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। जब भी चुनावी मैदान में उन्हें मुंह की खानी पड़ती है, वे अपनी सांगठनिक कमियों पर आत्ममंथन करने के बजाय सीधे तौर पर निर्वाचन आयोग जैसी निष्पक्ष संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का काम करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना सबसे बड़ा दायित्व होता है, लेकिन विपक्ष इस बुनियादी नियम को ही भूल बैठा है। हार का ठीकरा हमेशा स्वतंत्र संस्थाओं के सिर पर फोड़ना उनकी पुरानी आदत बन चुकी है। देश की जनता अब इस राजनीति की सच्चाई को भली-भांति समझ चुकी है और ऐसे बयानों पर भरोसा नहीं करती है।

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निर्वाचन आयोग के फैसलों पर विपक्ष द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों डॉ. एसएस संधू तथा विवेक जोशी की उपस्थिति का हवाला देते हुए भाजपा नेता ने बताया कि आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है। गत 26 सितंबर को आयोग की महत्वपूर्ण बैठक के बाद एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया था, जिसमें यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया गया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण समेत तमाम प्रमुख फैसले किसी एक व्यक्ति के नहीं, बल्कि पूर्ण सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

आयोग के कामकाज पर सवाल उठाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि 24 जून के मूल आदेश से लेकर विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पूरी समय-सारणी तक, हर एक कदम कानूनी और प्रशासनिक सहमति के आधार पर उठाया गया है। इसके बावजूद विपक्षी दल लगातार जनता के बीच गलतफहमी पैदा करने की असफल कोशिश कर रहे हैं ताकि राजनीतिक जमीन को बचाया जा सके।

कैबिनेट सचिव के पत्र और प्रशासनिक प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट

हाल के दिनों में मंत्रिमंडल सचिव को भेजे गए एक पत्र को लेकर विपक्षी दलों द्वारा खड़े किए गए बवेले पर भी भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि विपक्ष ने इस मामले को तूल देकर बेवफा का बवंडर खड़ा किया, जबकि सच्चाई इससे कोसों दूर थी। निर्वाचन आयोग ने खुद इस बात को सार्वजनिक किया है कि वह पत्र किसी भी नीतिगत फैसले, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग या विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित कतई नहीं था।

वह पत्र असल में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़ा हुआ बेहद सीमित और आंतरिक मामला था। इसे बेवफा तूल देना और राजनीतिक रंग देना विपक्ष की ओछी मानसिकता को दर्शाता है। जनता के बीच भ्रम फैलाने के लिए ऐसे मुद्दों को उठाया जा रहा है जिनका आम चुनाव प्रक्रिया से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।

प्रपत्र-6 और मतदाता पंजीकरण को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों का खंडन

मतदाता सूची के पुनरीक्षण में इस्तेमाल होने वाले प्रपत्र-6 को लेकर भी समाज में अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। इस पर सफाई देते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के संबंध में इसकी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। पूर्व की भांति ही निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के प्रावधानों के तहत ही पूरी प्रक्रिया संचालित की जा रही है।

देश के हर एक पात्र नागरिक को उसका मताधिकार सुरक्षित मिले और वह अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सके, इसके लिए निर्वाचन आयोग पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बिना किसी ठोस आधार के इस तरह की अफवाहें फैलाना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने के बराबर है।

"कांग्रेस पार्टी अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक असफलताओं पर आत्ममंथन करने के बजाय लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर निराधार आरोप लगा रही है। चुनावी हार की खीझ मिटाने के लिए निर्वाचन आयोग जैसी निष्पक्ष संस्थाओं को निशाना बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता अब इस भ्रामक राजनीति को अच्छी तरह पहचान चुकी है।" — राजीव कुमार गुप्ता, जिला अध्यक्ष, बीजेपी

लोकतंत्र की मजबूती के लिए संस्थाओं का सम्मान जरूरी

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों और उसके बाद भी ईवीएम तथा चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर दिए गए बयानों का जिक्र करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना बयानों से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति आम जनता के मन में अनावश्यक संदेह पैदा होता है। विपक्ष को यह समझना चाहिए कि व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए देश की गरिमामयी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर दाग लगाना देशहित में नहीं है।

पार्टी की ओर से साफ तौर पर यह संदेश दिया गया है कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन देश की नींव को मजबूत करने वाली संस्थाओं की पवित्रता बनाए रखना हर राजनीतिक दल का नैतिक कर्तव्य होना चाहिए। विपक्ष को अपनी रणनीति बदलने और जनता के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।

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