राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की सुगबुगाहट तेज
राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। स्थानीय शासन को और अधिक मजबूत करने तथा जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की जड़ों को गहरा करने के उद्देश्य से पंचायती राज चुनावों का बिगुल बज चुका है। राज्य के प्रमुख रेगिस्तानी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिलों में शुमार चूरू में चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर मतदान कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है। इस घोषणा के साथ ही ग्रामीण इलाकों में सियासी पारा चढ़ने लगा है और संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रशासन भी निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ जुट गया है।
ग्रामीण विकास की धुरी माने जाने वाले इन चुनावों को लेकर आम जनता के बीच भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। गांव की सरकार चुनने के लिए मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने को बेताब हैं। जिला प्रशासन की ओर से जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों के मुताबिक, संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया को कोविड सुरक्षा मानकों और चुनाव आयोग के नियमों के दायरे में रहकर पूरा किया जाएगा। आइए जानते हैं कि चूरू जिले में किस प्रकार से चरणों का विभाजन किया गया है और कौन-कौन सी पंचायत समितियां इस चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनने जा रही हैं।
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तीسरे चरण का चुनाव कार्यक्रम और प्रमुख पंचायत समितियां
निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित शेड्यूल के अनुसार, चूरू जिले में होने वाले पंचायती राज चुनावों के तीसरे चरण में कुल 7 महत्वपूर्ण पंचायत समितियों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में ग्रामीण विकास और प्रशासनिक कसावट के लिहाज से मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की उम्मीद है। तीसरे चरण के तहत जिन प्रमुख इलाकों में मतदान कराया जाना है, उनमें बीदासर, राजगढ़, चांदगोठी, सिद्धमुख, भानीपुरा, सरदारशहर और सरदारशहर पूर्व शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों को लेकर मतदाताओं में चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है।
इस चरण के तहत जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान की तारीख 4 नवंबर निर्धारित की गई है। इस दिन मतदाता अपने क्षेत्र के भावी नुमाइंदों की किस्मत का फैसला करेंगे। इसके पश्चात, पंच और सरपंच पदों के लिए मतदान 6 नवंबर को संपन्न होगा। खास बात यह है कि सरपंच और पंच पदों की मतगणना मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद उसी दिन करवा ली जाएगी, जिससे परिणामों का इंतजार ज्यादा लंबा नहीं करना पड़ेगा।
तीसरे चरण के नामांकन और प्रशासनिक तिथियां
चुनावी प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए आयोग ने तारीखों का पूरा खाका पहले ही तैयार कर लिया है। तीसरे चरण के अंतर्गत पंचायत समिति सदस्यों और सरपंच-पंच पदों के लिए आधिकारिक लोक सूचना आगामी 19 अक्टूबर को जारी की जाएगी। इसके साथ ही नामांकन पत्र दाखिल करने का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। पंचायत समिति सदस्यों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 23 अक्टूबर तय की गई है, जबकि उम्मीदवार अपने नाम 26 अक्टूबर तक वापस ले सकेंगे।
दूसरी ओर, सरपंच और पंच पदों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया थोड़ी बाद में यानी 5 नवंबर को रखी गई है। प्रशासनिक अमला पूरी पारदर्शिता के साथ नामांकन पत्रों की जांच और चुनाव प्रतीकों के आवंटन की प्रक्रिया को पूरा करने में जुटा है। जिला निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जाएगा और किसी भी तरह की चुनावी गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
चौथे चरण का मतदान और शामिल क्षेत्र
चूरू जिले में पंचायती राज चुनावों का चौथा और अंतिम चरण भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस चरण के अंतर्गत कुल 6 पंचायत समितियों को शामिल किया गया है, जहां ग्रामीण मतदाता अपनी नई स्थानीय सरकारों का चयन करेंगे। चौथे चरण में सुजानगढ़, तारानगर पूर्व, तारानगर पश्चिम, भालेरी, रतनगढ़, चूरू और चूरू उत्तर पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान कराया जाएगा। इन इलाकों में राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपनी ताकत झोंकनी शुरू कर दी है।
चौथे चरण के तहत जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 14 नवंबर को होगा। इसके ठीक दो दिन बाद यानी 16 नवंबर को पंच और सरपंच पदों के लिए वोट डाले जाएंगे। तीसरे चरण की तरह ही चौथे चरण में भी सरपंच और पंच पदों के लिए मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी। जिला प्रशासन ने सुदूर ग्रामीण इलाकों तक मतदान सामग्री और सुरक्षा बलों के आवागमन की पुख्ता व्यवस्था कर ली है ताकि किसी भी मतदाता को परेशानी का सामना न करना पड़े।
ग्रामीण विकास और मतदाताओं की उम्मीदें
पंचायती राज चुनाव केवल राजनीतिक दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन का जरिया नहीं होते, बल्कि यह गांवों की तकदीर तय करने का सबसे बड़ा माध्यम होते हैं। ग्रामीण इलाकों की सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें इन्हीं स्थानीय प्रतिनिधियों के कंधों पर टिकी होती हैं। जानकारों का मानना है कि इस बार के चुनावों में जनता विकास कार्यों के हिसाब-किताब के आधार पर वोट करेगी। गांव के मतदाता अब जागरूक हो चुके हैं और वे खोखले वादों के बजाय जमीनी हकीकत पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।
"पंचायती राज संस्थाएं लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव हैं। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना हमारा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों से अपील है कि वे चुनाव आयोग के नियमों का पूरी निष्ठा से पालन करें ताकि ग्रामीण अंचल में भाईचारा और लोकतांत्रिक मर्यादाएं बनी रहें।"— जिला निर्वाचन अधिकारी, चूरू
निष्कर्ष और आगे की तैयारियां
चूरू जिले में घोषित हुए इन पंचायती राज चुनावों के साथ ही ग्रामीण राजनीति मेंवान का दौर शुरू हो चुका है। कुछ ही हफ्तों में तमाम प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी और धरातल पर प्रचार का शोर गूंजने लगेगा। प्रशासन की कड़ी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच होने वाले ये चुनाव यह तय करेंगे कि आगामी वर्षों में चूरू के गांवों की विकास यात्रा किस दिशा में आगे बढ़ती है। मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी ही इन चुनावों के असली परिणामों को सार्थक बनाएगी।








