मध्य पूर्व के आसमान में एक बार फिर युद्ध के काले बादल मंडराने लगे हैं। वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहा शीतयुद्ध अब एक ऐसे मुहाने पर आ पहुंचा है, जहां से जरा सी चूक संपूर्ण क्षेत्र को महाविनाश में झोंक सकती है। 'द फ्रीलान्स' के इनपुट और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत को और अधिक घातक बना दिया है। तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर और उस पर सवार लगभग 10,000 सैनिक इस वक्त सामरिक रूप से संवेदनशील जलक्षेत्र की ओर कूच कर चुके हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या अमेरिका सीधे ईरान की धरती पर या उसके ठिकानों पर किसी बड़े सैन्य आक्रमण की तैयारी कर रहा है?
अमेरिकी सैन्य फौलाद और खित्से से निकलने के खुफिया कयास
पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि क्या अमेरिका ईरान में घुसकर हमला करने की फिराक में है। पेंटागन द्वारा तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह आक्रामक मुद्रा में है। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में यह सुगबुगाहट भी तेज है कि मध्य पूर्व के सैन्य अड्डों पर ईरान समर्थित मिलिशिया के लगातार हमलों से घबराया अमेरिका अपने रणनीतिक हितों की समीक्षा कर रहा है। कुछ खुफिया रिपोर्ट्स इशारा कर रही हैं कि अमेरिका अपने सैनिकों को जोखिम भरे इलाकों से निकालकर एक सुरक्षित घेराबंदी की रणनीति पर भी विचार कर रहा है, लेकिन सतह पर जो दिख रहा है, वह पूर्ण युद्ध की तैयारी जैसा ही है।
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सीरियाई एयरबेस और इजरायल-तुर्किये के बीच बढ़ता सामरिक तनाव
इस पूरे घटनाक्रम का एक अन्य महत्वपूर्ण केंद्र सीरिया बनता जा रहा है। हाल ही में सीरियाई एयरबेस पर हुए रहस्यमयी हमलों ने मध्य पूर्व के क्षेत्रीय समीकरणों को पूरी तरह उलट कर रख दिया है। इन हमलों के बाद से इजरायल और तुर्किये के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। तुर्किये जहां इस क्षेत्र में इजरायली सैन्य गतिविधियों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं तेहरान समर्थित प्रॉक्सी समूहों की सक्रियता ने इस भू-राजनीतिक पजल को और उलझा दिया है। हमारी फील्ड जांच बताती है कि सीरियाई सीमा पर तैनात विभिन्न देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और किसी भी पल एक चिंगारी बारूद के ढेर में आग लगा सकती है।
ब्रिटेन की सुरक्षा घटनाएं और तेहरान पर संदिग्ध नजरें
तनाव का दायरा अब केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यूरोपीय महाद्वीप तक फैल गया है। हाल ही में ब्रिटेन में घटी कुछ असामान्य सुरक्षा घटनाओं में ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों ने सीधे तौर पर ईरान की संलिप्तता का संदेह जताया है। हालांकि, तेहरान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पश्चिमी देशों का मनगढ़ंत प्रोपेगैंडा करार दिया है। लेकिन लंदन और पश्चिमी राजधानियों में बढ़ते कूटनीतिक दबाव ने ईरान के खिलाफ एक वैश्विक लामबंदी की जमीन तैयार कर दी है, जिसका फायदा उठाकर अमेरिका और उसके सहयोगी कड़े आर्थिक व सैन्य कदम उठा रहे हैं।
यूक्रेन युद्ध और वैश्विक कूटनीति के मोर्चे
इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की का ताजा बयान भी बेहद मायने रखता है। ज़ेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से साफ तौर पर कहा है कि रूस की आर्थिक रीढ़ और उसकी युद्ध क्षमता पर पूरी तरह रोक लगाना अनिवार्य हो चुका है। चूंकि रूस और ईरान के सामरिक संबंध हाल के महीनों में काफी प्रगाढ़ हुए हैं, इसलिए मध्य पूर्व की जंग और पूर्वी यूरोप का संघर्ष अब एक-दूसरे से कटे हुए नहीं, बल्कि साझा वैश्विक भू-राजनीतिक मोर्चे बन चुके हैं। मास्को और तेहरान के बीच बढ़ती रणनीतिक धुरी पश्चिमी देशों के लिए सबसे बड़ी सिरदर्द बनी हुई है।
निष्कर्ष और भविष्य की अनिश्चितता
'द फ्रीलान्स' के विश्लेषण के मुताबिक, जिस प्रकार अमेरिका अपनी सैन्य टुकड़ियों और एयरक्राफ्ट्स को मध्य पूर्व में झोंक रहा है, उससे कूटनीति के रास्ते लगभग बंद होते नजर आ रहे हैं। ईरान और उसके प्रॉक्सी नेटवर्क को घेरने की यह अमेरिकी रणनीति अगर ज़मीनी सैन्य कार्रवाई में बदली, तो इसके परिणाम वैश्विक अर्थव्यवस्था, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए विनाशकारी साबित होंगे। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि यह शक्ति प्रदर्शन महज कूटनीतिक दबाव है या एक और भयानक युद्ध की शुरुआत।








