दलाल स्ट्रीट की मंदी ने गौतम अडानी को दिया बड़ा झटका
भारतीय उद्योग जगत के दिग्गजों के लिए सप्ताह की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को अचानक आए तेज बिकवाली के दौर ने निवेशकों की संपत्ति में भारी सेंध लगाई। इस वित्तीय उथल-पुथल का सबसे बड़ा असर अडानी समूह की कंपनियों पर देखने को मिला। बाजार में आई इस गिरावट के चलते समूह के शेयरों के मूल्यांकन में भारी कमी आई, जिसका सीधा असर उद्योगपति गौतम अडानी की कुल संपत्ति पर पड़ा। एक ही कारोबारी सत्र के दौरान उनकी नेटवर्थ में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे वह एशिया के शीर्ष सबसे अमीर व्यक्ति का ताज गंवा बैठे।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजारों में जब भी वैश्विक या घरेलू कारणों से बिकवाली हावी होती है, तो बड़े कारोबारी समूहों के शेयरों में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा जाता है। अडानी समूह की विभिन्न कंपनियों के शेयरों में हुई इस बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ाने के साथ-साथ ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स की समीकरणों को भी रातों-रात बदल दिया। इस नाटकीय बदलाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शेयर बाजार के आंकड़े कितने संवेदनशील होते हैं और एक दिन की मंदी किस तरह से दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में फेरबदल कर सकती है।
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झांग यिमिंग ने छीना एशिया के शीर्ष रईस का मुकुट
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, चीन की लोकप्रिय शार्ट-वीडियो एप टिकटॉक की मूल कंपनी बाइटडांस के सह-संस्थापक झांग यिमिंग ने गौतम अडानी को पीछे छोड़ते हुए एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान हासिल कर लिया है। झांग यिमिंग की कुल संपत्ति बढ़कर 105 अरब डॉलर यानी लगभग 10.10 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। इसके विपरीत, संपत्ति के ताजा आंकड़ों में गिरावट के बाद गौतम अडानी का कुल नेटवर्थ घटकर करीब 103 अरब डॉलर यानी लगभग 9.91 लाख करोड़ रुपये रह गया है।
इस ताजा फेरबदल के बाद वैश्विक स्तर पर भी रैंकिंग में बदलाव आया है। विश्व के सबसे अमीर लोगों की सूची में झांग यिमिंग अब 18वें पायदान पर काबिज हो गए हैं, जबकि गौतम अडानी फिसलकर 20वें स्थान पर पहुंच गए हैं। टेक सेक्टर के इस दिग्गज कारोबारी की संपत्ति में हालिया बढ़ोतरी ने सोशल मीडिया और इंटरनेट आधारित कंपनियों के बढ़ते प्रभाव को एक बार फिर रेखांकित किया है। एशिया के शीर्ष पांच रईसों की सूची में अब चीनी कारोबारियों का दबदबा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दे रहा है।
अडानी समूह के शेयरों में चौतरफा भारी बिकवाली
सोमवार को बाजार बंद होने पर अडानी समूह की लगभग सभी प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए। इस व्यापक गिरावट का नेतृत्व अडानी ग्रीन एनर्जी ने किया, जिसके शेयरों में करीब 4.83 प्रतिशत की बड़ी टूट दर्ज की गई और यह 1,234 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। इसके अलावा, समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में 3.31 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 2,820 रुपये पर सिमट गया। अडानी पावर का शेयर भी 3.13 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 196.40 रुपये पर बंद हुआ।
सूची में अन्य कंपनियों का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। अडानी एनर्जी सॉल्यूशन का शेयर करीब 3.0 प्रतिशत गिरकर 1,287.60 रुपये पर बंद हुआ, जबकि अडानी टोटल गैस में 2.72 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 595 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही अडानी पोर्ट्स, एसीसी सीमेंट, एनडीटीवी और अंबुजा सीमेंट्स जैसी कंपनियां भी बिकवाली के दबाव से अछूती नहीं रहीं और नुकसान के साथ बंद हुईं। इन सभी कंपनियों के शेयरों के मूल्यांकन में आई कमी ने सीधे तौर पर प्रमोटर की कुल संपत्ति को प्रभावित किया।
एशियाई अरबपतियों की सूची में मुकेश अंबानी की स्थिति
एशिया के शीर्ष रईसों की इस रेस में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी की स्थिति पर भी बाजार विशेषज्ञों की पैनी नजर बनी हुई है। कभी एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब अपने नाम रखने वाले मुकेश अंबानी इस साल अपनी संपत्ति में कुल 28.9 अरब डॉलर की गिरावट देख चुके हैं। ब्लूमबर्ग इंडेक्स के मुताबिक, वर्तमान में उनका कुल नेटवर्थ 78.9 अरब डॉलर के आसपास है और वह दुनिया के अरबपतियों की सूची में 24वें स्थान पर बने हुए हैं।
सोमवार के कारोबारी सत्र में मुकेश अंबानी की संपत्ति में भी करीब 2.01 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई। एशिया के पांच सबसे अमीर कारोबारियों की मौजूदा सूची पर नजर डालें तो पहले स्थान पर चीन के झांग यिमिंग हैं, दूसरे नंबर पर गौतम अडानी आ गए हैं, और तीसरे स्थान पर भारत के ही मुकेश अंबानी काबिज हैं। चौथे स्थान पर जापानी कंपनी यूनिक्लो के मालिक तदाशी यानाई हैं, जबकि पांचवें पायदान पर चीन के झोंग शानशान अपनी स्थिति बनाए हुए हैं।
बाजार के उतार-चढ़ाव और वेल्थ इंडेक्स के बदलते समीकरण
वैश्विक स्तर पर अमीरों की सूची का निर्धारण करने वाले ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स और फोर्ब्स जैसे प्लेटफॉर्म कंपनियों के दैनिक शेयर बाजार मूल्य और वित्तीय स्वास्थ्य के आधार पर आंकड़े तय करते हैं। इन सूचकांकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये रियल-टाइम या दैनिक आधार पर बदलते रहते हैं। एक ही दिन में किसी बड़ी कंपनी के शेयरों में आई तेजी या मंदी दुनिया भर के उद्योगपतियों की रैंकिंग को तुरंत प्रभावित करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, महंगाई के आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों के बीच शेयर बाजारों में इस तरह का उतार-चढ़ाव आगे भी देखने को मिल सकता है। भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है क्योंकि शॉर्ट-वोलेटिलिटी का असर सीधे तौर पर देश के दिग्गज घरानों के साथ-साथ खुदरा निवेशकों की पोर्टफोलियो वैल्यू पर भी पड़ता है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करेगी कि भारतीय उद्योगपति एक बार फिर अपनी खोई हुई रैंकिंग हासिल कर पाते हैं या नहीं।
"शेयर बाजार के आंकड़े बेहद गतिशील होते हैं और एक दिन की बिकवाली या मंदी बड़े से बड़े उद्योगपति की नेटवर्थ और ग्लोबल रैंकिंग में तुरंत फेरबदल कर देती है। निवेशकों को हमेशा दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ बाजार में उतरना चाहिए।" — वरिष्ठ वित्तीय विश्लेषक








