दिल्ली-एनसीआर में अचानक क्यों महसूस हो रही है ठंडक?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद जैसे इलाकों में पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। सुबह और शाम के वक्त चलने वाली ठंडी हवाओं ने लोगों को सितंबर के महीने में ही अक्टूबर या नवंबर जैसी ठंड का अहसास कराना शुरू कर दिया है। लोग यह चर्चा करने लगे हैं कि क्या इस साल सर्दी समय से पहले ही आ गई है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का स्पष्ट तौर पर मानना है कि मौसम में आया यह बदलाव बेहद अल्पकालिक है और इसे सर्दियों की आधिकारिक शुरुआत नहीं माना जा सकता है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दो-तीन दिनों के दौरान मैदानी इलाकों में तापमान में जो गिरावट दर्ज की गई है, उसके पीछे बंगाल की खाड़ी से उठा एक मौसमी सिस्टम और पहाड़ी राज्यों में हुई हल्की बारिश व बर्फबारी मुख्य वजह रही है। इन दोनों बड़े मौसमी कारणों के मिलने से दिल्ली-एनसीआर के तापमान में अचानक गोता लगा, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली और मौसम काफी सुहावना बन गया।
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पहाड़ी इलाकों का असर और मानसून की विदाई की स्थिति
पहाड़ों पर सक्रिय हुए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ का असर सीधे तौर पर मैदानी इलाकों तक पहुंचता है। पिछले दिनों उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बारिश और बर्फबारी के कारण ठंडी हवाएं सीधे दिल्ली और आसपास के मैदानी क्षेत्रों की तरफ बहीं। इसके साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से मानसून की वापसी का दौर भी अलग-अलग गति से चल रहा है। राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर से मानसून औपचारिक रूप से विदा हो चुका है, लेकिन देश के कई अन्य राज्यों में मानसूनी गतिविधियां अभी भी किसी न किसी रूप में सक्रिय बनी हुई हैं।
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि जब भी मानसून की विदाई होती है और नया मौसमी तंत्र सक्रिय होता है, तो तापमान में इस तरह के उतार-चढ़ाव आम बात है। बारिश थमने के बाद जैसे ही आसमान पूरी तरह साफ होगा, सूरज की किरणें एक बार फिर तेजी से जमीन को गर्म करेंगी, जिससे तापमान में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। इसलिए मौजूदा ठंडक महज एक मौसमी झोंका है, स्थायी सर्दी आने में अभी वक्त है।
मौसम विभाग का अगले कुछ दिनों का पूर्वानुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD के ताजा अपडेट के अनुसार, आने वाले सप्ताह में मौसम का मिजाज एक बार फिर करवट लेगा। अगले कुछ दिनों तक बारिश की कोई संभावना नहीं है और आसमान ज्यादातर साफ तथा शुष्क बना रहेगा। तापमान में धीरे-धीरे एक से दो डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। अधिकतम तापमान एक बार फिर 33 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान में भी हल्का इजाफा होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सितंबर के आखिरी दिनों में जो न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया था, वह अब धीरे-धीरे सामान्य स्तर की ओर लौटेगा। दिन के समय धूप खिलने से हल्की उमस या गर्मी का अहसास फिर से हो सकता है, हालांकि सुबह और शाम के वक्त हल्की फुल्की गुलाबी ठंडक का दौर आगे भी बना रह सकता है।
बदलते मौसम के बीच प्रदूषण और वायु गुणवत्ता ने बढ़ाई चिंता
जैसे ही बारिश का दौर थमा और आसमान साफ हुआ, दिल्ली-एनसीआर की हवा की सेहत एक बार फिर बिगड़ने लगी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 'यलो जोन' यानी मध्यम श्रेणी में पहुंच चुका है। आनंद विहार, बवाना, बुराड़ी और चांदनी चौक जैसे कई इलाकों में एक्यूआई का स्तर चिंताजनक स्थिति की तरफ इशारा कर रहा है। मौसम साफ होने के बाद हवा की रफ्तार धीमी होने के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में ठहरने लगे हैं, जो आने वाले दिनों में बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
"दिल्ली-एनसीआर में तापमान में आई यह गिरावट अस्थायी है। आने वाले दिनों में धूप निकलने के बाद पारे में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जिसे सर्दियों की शुरुआत नहीं कहा जा सकता है।" — मौसम विशेषज्ञ, IMD
सर्दियों से पहले दिल्ली सरकार का बड़ा कदम और नए नियम
आने वाले सर्दियों के मौसम और उससे जुड़े प्रदूषण के संकट से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने अभी से एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रशासन ने फैसला किया है कि 1 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी में बीएस-VI मानक से कम उत्सर्जन वाले बाहरी वाणिज्यिक और निजी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी। हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों और सीएनजी वाहनों को इस पाबंदी से राहत दी गई है ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
इसके अलावा शहर के भीतर निजी वाहनों के अत्यधिक इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के वास्ते 1 नवंबर से लेकर अगले साल फरवरी के अंत तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क को दोगुना करने का भी प्रावधान किया गया है। इन तमाम प्रशासनिक तैयारियों का मकसद सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखना और नागरिकों को स्वच्छ हवा मुहैया कराना है।






