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यूपी की राजनीति में धमाकेदार एंट्री: पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने छोड़ी नौकरी, अब बिना किसी पार्टी के करेंगी सियासत

उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद राजनीति में आने का बड़ा ऐलान किया है। वह किसी भी राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच के माध्यम से सीधे जनता के बीच काम करेंगी। उनके इस फैसले से 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•1 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•44
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यूपी की राजनीति में धमाकेदार एंट्री: पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने छोड़ी नौकरी, अब बिना किसी पार्टी के करेंगी सियासत
📷 यूपी की राजनीति में धमाकेदार एंट्री: पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने छोड़ी नौकरी, अब बिना किसी पार्टी के करेंगी सियासत — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था।
  • उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी राजनीतिक दल का दामन थामने के बजाय जनता के साथ मिलकर एक स्वतंत्र मंच बनाएंगे।
  • आईआईटी दिल्ली, आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई और लंदन में नौकरी करने के बाद उन्होंने यूपीएससी पास कर प्रशासनिक सेवा चुनी थी।
  • मिर्ज़ापुर और देवरिया जैसे जिलों में बतौर जिलाधिकारी उनके प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं को काफी सराहा गया था।

आईएएस की नौकरी छोड़ राजनीति में उतरीं दिव्या मित्तल का बड़ा कदम

उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में अपनी अलग पहचान बनाने वाली पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने एक बार फिर से सभी को चौंका दिया है। साल 2013 बैच की इस चर्चित अधिकारी ने अपने पद से अचानक इस्तीफा देने के ठीक एक महीने बाद सार्वजनिक तौर पर अपनी नई राजनीतिक पारी का शंखनाद कर दिया है। उनके इस फैसले ने न केवल नौकरशाही बल्कि राजनीतिक दलों के बीच भी हलचल पैदा कर दी है। दिव्या मित्तल ने साफ कर दिया है कि वह देश की सेवा के लिए अब राजनीति के मैदान में उतरेंगी, लेकिन उनका रास्ता पारंपरिक राजनीतिक दलों से बिल्कुल अलग होगा।

अपने आधिकारिक वीडियो संदेश के जरिए दिव्या मित्तल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी राजनीतिक दल के झंडे या बैनर तले काम नहीं करेंगी। इसके बजाय, वह आम नागरिकों और जनता के बीच रहकर एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच के जरिए आगे की यात्रा तय करेंगी। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच एक पूर्व आईएएस अधिकारी का इस तरह से बिना किसी पार्टी के स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के साथ उतरना कई बड़े राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

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IIT-IIM से लेकर लंदन की नौकरी और यूपीएससी का सफर

दिव्या मित्तल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद शानदार और प्रेरणादायक रही है। मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी जिले से ताल्लुक रखने वाली दिव्या ने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों से अपनी शिक्षा पूरी की है। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से मैनेजमेंट की उच्च शिक्षा प्राप्त की। भारत लौटने से पहले उन्होंने लंदन में एक कॉरपोरेट नौकरी भी की थी, लेकिन देश सेवा के जज्बे ने उन्हें वापस खींच लिया।

उन्होंने यूपीएससी की कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चुनी गईं। यूपी कैडर मिलने के बाद उन्होंने राज्य के कई जिलों में अपनी सेवाएं दीं। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में प्रशिक्षण के दौरान उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रतिष्ठित अशोक बम्बावले पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उनकी यह शैक्षणिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग खड़ा करती है।

यूपी के कई जिलों में बतौर जिलाधिकारी छोड़ी अमिट छाप

अपने 13 साल के लंबे प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और विभागों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने मेरठ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, गोंडा में मुख्य विकास अधिकारी, यूपीएसआईडीए में संयुक्त प्रबंध निदेशक और बरेली विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष जैसे अहम पदों पर काम किया। इसके अलावा वह संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया जिलों की जिलाधिकारी भी रहीं। इस्तीफे से पहले वह यूपी सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।

उनकी कार्यशैली हमेशा जनता के करीब रहने और समस्याओं का त्वरित समाधान करने वाली रही है। मिर्जापुर जिले में उनके कार्यकाल के दौरान एक दुर्गम पहाड़ी गांव लहुरियादह तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाना उनकी सबसे बड़ी प्रशासनिक सफलताओं में गिनी जाती है। इस गांव के लोग लंबे समय से केवल पानी के टैंकरों पर निर्भर थे, लेकिन उनकी पहल ने वहां के बाशिंदों की जिंदगी बदल दी। देवरिया में भी उन्होंने सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

पारंपरिक राजनीति को चुनौती देने का नया प्रयोग

दिव्या मित्तल का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश और राज्य की राजनीति में जनता के मुद्दों से ज्यादा दलीय राजनीति हावी रहती है। उन्होंने जिस तरह से किसी भी राजनीतिक दल का हिस्सा बनने से इनकार किया है, उससे यह साफ हो गया है कि वह जमीनी स्तर पर एक नया राजनीतिक विकल्प खड़ा करना चाहती हैं। उनका मानना है कि सिस्टम के अंदर रहकर काम करने की अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन जनता के बीच सीधे संवाद से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

"मैं किसी राजनीतिक दल के दायरे में बंधकर काम नहीं करना चाहती। जनता के साथ मिलकर, जनता के लिए एक स्वतंत्र मंच के जरिए राजनीति के नए रास्ते तलाशने का समय आ गया है।" — दिव्या मित्तल, पूर्व आईएएस अधिकारी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक अनुभवी पूर्व नौकरशाह का इस तरह से मैदान में उतरना आम जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश दे सकता है। हालांकि, चुनावी राजनीति की डगर इतनी आसान नहीं होती, जहां संसाधनों और दलीय मशीनरी की बहुत बड़ी भूमिका होती है। इसके बावजूद, दिव्या मित्तल की यह अनूठी पहल उत्तर प्रदेश की सियासत में आने वाले दिनों में एक नया मोड़ जरूर ला सकती है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

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