डिजिटल युग में भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सामने खड़ी नई चुनौतियां
देशभर के वित्तीय बाजार में डिजिटल क्रांति का दौर तेजी से चल रहा है। आज हर आम आदमी अपने स्मार्टफोन के जरिए पलक झपकते ही एक बैंक खाते से दूसरे खाते में पैसे ट्रांसफर कर रहा है, लोन के लिए आवेदन कर रहा है और बीमा पॉलिसियां खरीद रहा है। इस तकनीकी प्रगति ने बैंकिंग को बेहद आसान बना दिया है, लेकिन इसी के साथ बैंकों के सामने एक नया और गंभीर संकट भी खड़ा हो गया है। वैश्विक स्तर पर जानी-मानी रिसर्च और कंसल्टेंसी फर्म 'फॉरेस्टर' (Forrester) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारतीय बैंकिंग उद्योग की आंतरिक कमजोरियों को उजागर किया है, जो आने वाले दिनों में वित्तीय संस्थानों के विकास की गति को थाम सकती हैं।
फॉरेस्टर की इस बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट का शीर्षक 'इंडिया बैंकिंग टोटल एक्सपीरियंस स्कोर रैंकिंग, 2026' है। इस रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि देश के प्रमुख बैंक अपनी डिजिटल सेवाओं की चमक-दमक के पीछे उन बुनियादी पैमानों की अनदेखी कर रहे हैं, जो वास्तव में ग्राहकों की लंबी वफादारी और ब्रांड के प्रति भरोसे को तय करते हैं। यदि समय रहते इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो आने वाले समय में बैंकों के लिए नए ग्राहकों को अपने पाले में लाना और टिकाये रखना बहुत कठिन हो जाएगा।
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क्या कहती है फॉरेस्टर की ताजा टोटल एक्सपीरियंस स्कोर रैंकिंग?
इस व्यापक अध्ययन के तहत देश के नौ बड़े और प्रतिष्ठित बैंकों का गहराई से मूल्यांकन किया गया है। इस सूची में एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, फेडरल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीबीआई बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, इंडसइंड बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) जैसे दिग्गज वित्तीय संस्थान शामिल हैं। रिपोर्ट में इन सभी बैंकों के प्रदर्शन का विश्लेषण करके एक 'टोटल एक्सपीरियंस स्कोर' तैयार किया गया है।
आंकड़ों के अनुसार, मूल्यांकन किए गए इन नौ बैंकों का औसत टोटल एक्सपीरियंस स्कोर साल 2025 में 62.8 था, जो मामूली रूप से बढ़कर 2026 में 64.0 पर पहुंच गया है। यह मामूली सुधार इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बैंक बाजार में अपनी अलग और अनूठी पहचान बनाने या बड़े क्रांतिकारी सुधार करने के बजाय सिर्फ पारंपरिक और मौजूदा अनुभव मानकों के सहारे ही अपना कामकाज चला रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता खतरनाक हो सकती है, खासकर तब जब ग्राहकों की उम्मीदें आसमान छू रही हों।
एक जैसी डिजिटल सेवाएं मिटा रही हैं बैंकों की अपनी पहचान
आज की तारीख में लगभग हर बैंक अपने ग्राहकों को मोबाइल ऐप, नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी आधुनिक सुविधाएं मुहैया करा रहा है। तकनीकी रूप से सभी संस्थान काफी हद तक एक जैसे फीचर्स पेश कर रहे हैं। इस एकरूपता के कारण बाजार में यह पहचान करना मुश्किल होता जा रहा है कि कौन सा बैंक वास्तव में बेहतर है। जब सभी वित्तीय संस्थान ग्राहकों को लगभग एक जैसा डिजिटल अनुभव देते हैं, तो संभावित ग्राहकों को अपने पाले में खींचना कठिन हो जाता है।
फॉरेस्टर की इस रिपोर्ट के निष्कर्षों पर बात करते हुए कंपनी की वरिष्ठ विश्लेषक पुष्पा मारवाल ने बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने बैंकिंग सेक्टर की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया है कि भविष्य की राह कैसी होनी चाहिए।
"पिछले एक दशक में भारत के बैंकों ने डिजिटल अनुभवों में भारी निवेश किया है। परिणामस्वरूप, ग्राहकों की अपेक्षाओं में वृद्धि हुई है, और डिजिटल क्षमताएं अनिवार्य आवश्यकता बन गई हैं। सतत विकास को गति देने के लिए, बैंकों को अपने ब्रांड के वादे को अपने ग्राहक अनुभव के साथ संरेखित करना और उस वादे को पूरा करने के लिए अपने कर्मचारियों पर विश्वास करने की आवश्यकता होगी।"— पुष्पा मारवाल, विश्लेषक, फॉरेस्टर
कर्मचारी अनुभव की अनदेखी भविष्य के विकास में बन सकती है बड़ी बाधा
बैंकिंग कारोबार केवल सॉफ्टवेयर, सर्वर और मोबाइल एप्लीकेशन तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में वे तमाम कर्मचारी और अधिकारी होते हैं जो दिन-रात बैंक की शाखाओं में बैठकर ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करते हैं। फॉरेस्टर की रिपोर्ट चेताती है कि भारत के बैंकिंग उद्योग में कर्मचारी अनुभव यानी 'एम्प्लॉयी एक्सपीरियंस' (EX) के मोर्चे पर अभी भी काफी कमियां बनी हुई हैं। यदि बैंक अपने कर्मचारियों को सशक्त नहीं बनाएंगे और उनके काम करने के माहौल को बेहतर नहीं करेंगे, तो वे कर्मचारी ग्राहकों को वह बेहतरीन मूल्य और सेवा नहीं दे पाएंगे जिसकी उम्मीद आज का समझदार ग्राहक करता है।
ग्राहक अनुभव (CX), ब्रांड अनुभव (BX) और कर्मचारी अनुभव (EX) — इन तीनों महत्वपूर्ण स्तंभों को आपस में जोड़े बिना कोई भी वित्तीय संस्थान लंबे समय तक बाजार में बढ़त नहीं बना सकता। जब तक बैंक अपने आंतरिक कर्मचारियों को खुश और समर्थ नहीं बनाएंगे, तब तक वे बाहरी ग्राहकों को एक असाधारण और संतोषजनक अनुभव देने में सफल नहीं हो सकते।
टोटल एक्सपीरियंस फ्रेमवर्क और आगे की राह
फॉरेस्टर का 'टोटल एक्सपीरियंस स्कोर' फ्रेमवर्क एक ऐसा वैज्ञानिक पैमाना है जो यह गहराई से परखता है कि कोई कंपनी किस प्रकार अपने ब्रांड के जरिए नए ग्राहकों को आकर्षित करती है, ग्राहक सेवा के माध्यम से मौजूदा ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करती है और साथ ही अपने कर्मचारियों को लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है। भारत जैसे तेजी से उभरते हुए और विशाल डिजिटल बाजार में, जहां करोड़ों नए युवा पहली बार बैंकिंग सेवाओं से जुड़ रहे हैं, यह फ्रेमवर्क वित्तीय संस्थानों के लिए एक दिशा-सूचक का काम कर सकता है।
निष्कर्ष के तौर पर यह कहा जा सकता है कि भारतीय बैंकों के लिए अब केवल तकनीकी रूप से उन्नत होना ही काफी नहीं रह गया है। उन्हें अपनी कार्यसंस्कृति में बुनियादी बदलाव लाने होंगे। ब्रांड के वादों, जमीनी ग्राहक सेवा और आंतरिक कर्मचारियों के हितों के बीच एक मजबूत तालमेल बिठाकर ही देश का बैंकिंग सेक्टर आने वाली प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकता है और सतत विकास के नए आयाम छू सकता है।







