यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें: घंटों देरी से पहुंचीं ट्रेनें
दैनिक जीवन में समय की पाबंदी बहुत मायने रखती है, खासकर जब बात रोजाना दफ्तर या कॉलेज जाने वाले यात्रियों की हो। मंगलवार को गाजियाबाद रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के रूट पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए दिन की शुरुआत बेहद तनावपूर्ण रही। एक साथ दस से अधिक ट्रेनों के घंटों देरी से चलने के कारण रेल यात्रियों को भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। स्थिति यह थी कि ठंड और सुस्त रफ्तार के बीच लोग प्लेटफॉर्म पर घंटों इंतजार करने को मजबूर हो गए।
रेलवे की इस लेटलतीफी का सबसे बुरा असर उन नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों पर पड़ा, जिन्हें सुबह के व्यस्त समय में अपने गंतव्य तक पहुंचना था। खुर्जा, अलीगढ़, हाथरस, हापुड़, मोदीनगर, मुरादनगर और दादरी जैसे इलाकों से हर रोज हजारों की संख्या में लोग दिल्ली और एनसीआर के दूसरे शहरों में काम करने आते हैं। ट्रेनों के लगातार लेट होने से इनकी पूरी दिनचर्या बिगड़ गई और कई लोग तय समय पर अपने कार्यालयों में हाजिरी नहीं लगा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे ट्रैक पर चल रहे मेंटेनेंस कार्य, कोहरे के मौसम की आहट और अत्यधिक ट्रैफिक के कारण ट्रेनों के संचालन पर बुरा असर पड़ रहा है। हालांकि, यात्रियों का कहना है कि रेलवे की तरफ से समय पर सटीक जानकारी न मिलने के कारण उनकी परेशानी और भी ज्यादा बढ़ जाती है।
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प्रमुख ट्रेनों की लेटलतीफी का हाल
मंगलवार को देरी से चलने वाली ट्रेनों की सूची काफी लंबी थी। इसमें सबसे ऊपर दिल्ली-बरेली ईएमयू का नाम आया, जो अपने निर्धारित समय से करीब तीन घंटे की भारी देरी से गंतव्य तक पहुंची। इसके अलावा लंबी दूरी और पैसेंजर दोनों तरह की ट्रेनों की चाल बिगड़ हुई थी।
सूबेदारगंज से आनंद विहार आने वाली महत्वपूर्ण ट्रेन लगभग एक घंटे 51 मिनट की देरी से चली। वहीं देश के विभिन्न हिस्सों से गुजरने वाली उत्कल एक्सप्रेस भी एक घंटे 55 मिनट की देरी से पटरी पर दौड़ती नजर आई। इसके अलावा दिल्ली-जगाधरी एक्सप्रेस करीब एक घंटे 17 मिनट लेट रही, जिससे इस रूट के यात्रियों को भी खासा कष्ट झेलना पड़ा।
लोकल स्तर पर चलने वाली दनकौर-दिल्ली ईएमयू लगभग 31 मिनट और बरेली-भुज एक्सप्रेस करीब 27 मिनट की देरी से आगे बढ़ी। अलीगढ़-दिल्ली ईएमयू, हाथरस-दिल्ली ईएमयू और बुलंदशहर-गाजियाबाद ईएमयू जैसी महत्वपूर्ण लोकल ट्रेनों का संचालन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे दैनिक यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों यानी सड़क मार्ग का महंगा सहारा लेना पड़ा।
वैकल्पिक साधनों का सहारा और छात्रों की परेशानी
ट्रेनों के समय पर न आने के कारण यात्रियों के पास कैब, ऑटो या बसों जैसे महंगे वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें मजबूरी में अपनी जेब ढीली करके कैब बुक करनी पड़ी ताकि वे समय पर अपने दफ्तर की जरूरी बैठकों या इंटरव्यू में पहुंच सकें।
कॉलेज और यूनिवर्सिटी जाने वाले छात्र-छात्राओं की स्थिति भी इससे अलग नहीं थी। कई छात्र ट्रेन छूटने या अत्यधिक लेट होने के कारण अपनी सुबह की महत्वपूर्ण कक्षाएं अटेंड नहीं कर पाए। छात्रों का कहना है कि परीक्षा के दिनों में अगर इस तरह की लेट-लतीफी हो जाए, तो उनका भविष्य संकट में पड़ सकता है।
"रोजाना ट्रेन से सफर करना अब एक जुआ बन गया है। कभी पता नहीं होता कि समय पर ऑफिस पहुंचेंगे या नहीं। रेलवे को अपनी समय सारणी और संचालन प्रणाली में सुधार करने की सख्त जरूरत है ताकि आम जनता का पैसा और समय दोनों बर्बाद न हों।" — रमेश कुमार, दैनिक रेल यात्री
ट्रेन छूटने पर क्या है रेलवे का कनेक्टिंग जर्नी नियम?
इस पूरी घटना के बीच यात्रियों के मन में एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि यदि पहली ट्रेन के लेट होने के कारण उनकी दूसरी कनेक्टिंग ट्रेन छूट जाती है, तो क्या उनके टिकट का पैसा डूब जाएगा या उन्हें रिफंड मिलेगा? इस संबंध में भारतीय रेलवे के स्पष्ट और तय नियम हैं जिन्हें हर यात्री को जानना चाहिए।
यदि आपने एक ही पीएनआर (PNR) नंबर पर कनेक्टिंग ट्रेनों की बुकिंग कराई है और पहली ट्रेन के लेट होने के कारण आपकी दूसरी ट्रेन छूट जाती है, तो रेलवे नियमों के तहत आपको पूरा रिफंड मिलने का अधिकार है। इसके लिए आपको डेस्टिनेशन स्टेशन के टीडीआर (TDR) काउंटर पर जाकर उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
हालांकि, यदि आपने अलग-अलग दो अलग टिकट बुक किए हैं और पहली ट्रेन लेट होने की वजह से दूसरी ट्रेन छूटती है, तो रेलवे की तरफ से रिफंड का दावा करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बहुत सावधानी से बनानी चाहिए और दोनों ट्रेनों के बीच पर्याप्त अंतर रखना चाहिए।
त्योहारों और व्यस्त दिनों में रेलवे की सख्ती और आगे की राह
भारतीय रेलवे लगातार ट्रेनों के समय पालन (Punctuality) को सुधारने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी कर रहा है। हाल ही में रेलवे ने उन कारणों पर भी कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है जिनकी वजह से बेवजह ट्रेनें लेट होती हैं। त्योहारों और पीक सीजन के दौरान ट्रेनों को समय पर चलाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की जाती है और कोताही बरतने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी जाती है।
यात्री संघों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि गाजियाबाद और दिल्ली एनसीआर के इस व्यस्त रूट पर सिग्नलिंग सिस्टम को और अधिक आधुनिक बनाया जाए ताकि ट्रेनों की रफ्तार को बिना किसी बाधा के बनाए रखा जा सके। जब तक रेलवे की बुनियादी व्यवस्था में पूरी तरह सुधार नहीं होता, तब तक यात्रियों को इस तरह की परेशानियों से दो-चार होना ही पड़ेगा।





