त्योहारी सीजन से पहले सर्राफा बाजार में आई बड़ी गिरावट
भारतीय सर्राफा बाजार में पिछले कुछ दिनों से जारी उठापटक के बीच ग्राहकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले कुछ सत्रों के दौरान सोने और चांदी की चमक में अचानक बड़ी फीकीहट देखने को मिली है। सप्ताह के शुरुआती दिनों से लेकर गुरुवार तक के कारोबार में कीमती धातुओं के भाव धड़ाम हो गए हैं। इस गिरावट ने आम आदमी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान ला दी है, क्योंकि आने वाले दिनों में करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहार नजदीक आ रहे हैं। इन खास अवसरों पर सोने और चांदी की खरीदारी को देश में बेहद शुभ माना जाता है और मांग बढ़ने से अक्सर कीमतें आसमान छूने लगती हैं। ऐसे में ठीक त्योहारों से पहले कीमतों का नीचे आना खरीदारों के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले चार दिनों के भीतर सोने और चांदी की कीमतों में काफी बड़ा करेक्शन देखने को मिला है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक बाजारों के रुख और भू-राजनीतिक तनावों के कारण आई है। हालांकि, घरेलू बाजार में इस समय खरीदारी करने वालों के लिए यह एक सुनहरा मौका साबित हो सकता है, बशर्ते वे बाजार की चाल को सही से समझ सकें। आम जनता लंबे समय से महंगाई और आसमान छूती कीमतों से परेशान थी, ऐसे में यह सुस्ती उनके बजट के अनुकूल बैठ रही है।
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कितना सस्ता हुआ सोना और चांदी? जानिए सर्राफा बाजार का ताजा हाल
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, बाजार में पिछले चार दिनों के भीतर जोरदार बिकवाली और नरमी का दौर रहा है। गुरुवार को भी कीमतों में बड़ी टूट दर्ज की गई, जिससे ग्राहकों को सीधा फायदा मिलता दिख रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट वाला शुद्ध सोना औसतन काफी नीचे आ गया है, जबकि चांदी की कीमतों में तो और भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले चार दिनों की कुल अवधि की बात करें तो चांदी लगभग 7,000 रुपए प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो चुकी है, वहीं सोने के भाव में भी करीब 2,500 रुपए प्रति 10 ग्राम तक की भारी कमी आई है।
गुरुवार को ही अकेले 10 ग्राम 24 कैरेट सोना हजारों रुपए सस्ता होकर नीचे के स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही, एक किलो चांदी के दाम में भी भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे यह काफी नीचे लुढ़क गई। सर्राफा कारोबारियों का मानना है कि कीमतों में इस तरह के उतार-चढ़ाव से बाजार में सुस्ती का माहौल तो बनता है, लेकिन जैसे ही दाम गिरते हैं, खुदरा खरीदार दुकानों का रुख करने लगते हैं। व्यापारी अब यह उम्मीद लगा रहे हैं कि आने वाले त्योहारी हफ्तों में इन घटे हुए दामों के कारण बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है।
क्या सोने-चांदी में आगे भी जारी रहेगी गिरावट या फिर आएंगे तेजी के दिन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आने वाले हफ्तों में भी सोने और चांदी की कीमतें और नीचे जाएंगी या फिर ये वापस उछलकर पुराने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएंगी। इस संबंध में वैश्विक स्तर के वित्तीय विशेषज्ञों और फंड मैनेजरों ने अपने विचार रखे हैं। ऑस्ट्रेलिया के एक प्रमुख हेज फंड मैनेजर के अनुसार, सोने में हालिया दिनों में देखी गई यह सुस्ती और गिरावट पूरी तरह से अस्थाई यानी टेंपरेरी है। उनका तर्क है कि सोने की कीमतों को लंबे समय तक समर्थन देने वाले मुख्य कारक आज भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूती के साथ बरकरार हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के बड़े बाजारों की राजकोषीय स्थिति अभी भी पूरी तरह टिकाऊ नहीं कही जा सकती है। विशेष तौर पर अमेरिकी सरकार के ऊपर बढ़ता भारी कर्ज और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार की जा रही खरीदारी आने वाले महीनों और वर्षों में कीमती धातुओं को मजबूत सहारा प्रदान करेगी। हालांकि, निकट भविष्य में कीमतें काफी हद तक वैश्विक राजनीतिक हलचल, ब्याज दरों की दिशा और महंगाई के ताजा आंकड़ों पर निर्भर करेंगी।
वैश्विक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों का असर
इस साल की शुरुआत में जब सोने ने अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई को छुआ था, तब से ही इस पर दबाव बना हुआ है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बदलाव की संभावनाओं ने सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली धातु को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विभिन्न संघर्षों और युद्ध जैसे हालातों के कारण भी बाजार में विपरीत हवाएं चली हैं, जिसके चलते पिछले कुछ महीनों में सोने की कीमतों में करेक्शन देखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय विश्लेषकों का यह भी कहना है कि बाजार में इस तरह के झटके नए नहीं हैं। जब भी दुनिया में कोई बड़ा भू-राजनीतिक तनाव पैदा होता है, तो शुरुआती दौर में निवेशकों का रुख बदलता है, लेकिन मध्यम अवधि में सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक फिर से लौट आती है। बाजार के बड़े खिलाड़ी इस गिरावट को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं और निचले स्तरों पर अपनी पोजीशन मजबूत कर रहे हैं।
निवेशकों और आम खरीदारों के लिए क्या है सलाह?
आम ग्राहकों और निवेशकों के मन में अक्सर यह असमंजस रहता है कि ऐसे समय में उन्हें सोना खरीदना चाहिए या थोड़ा और इंतजार करना चाहिए। वित्तीय जानकारों का सुझाव है कि अगर आपकी निजी जरूरत है, जैसे कि घर में कोई शादी या त्योहार, तो कीमतों में यह गिरावट आपके लिए एक बेहतरीन मौका है। टुकड़ों में खरीदारी करना हमेशा समझदारी का सौदा माना जाता है, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का औसत निकाला जा सके।
"ईरान संघर्ष के बाद से सोने के बाजार और कीमतों के लिए कुछ विपरीत हवाएं जरूर आई हैं, लेकिन हमारे हिसाब से ये बहुत टेंपरेरी हैं। सोने की मांग को चलाने वाले ज्यादातर मुख्य कारक मीडियम टर्म में बने रहेंगे, बल्कि और मजबूत होंगे।" — राफेल लैम, हेज फंड मैनेजर
अंत में यही कहा जा सकता है कि सर्राफा बाजार में यह करेक्शन आम जनता और निवेशकों दोनों के लिए ही एक नया परिप्रेक्ष्य लेकर आया है। जहां एक ओर त्योहारी सीजन से ठीक पहले कीमतों का टूटना ग्राहकों की जेब पर बोझ को कम करता है, वहीं दूसरी ओर लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह पोजीशन बढ़ाने का सही समय साबित हो सकता है। किसी भी बड़े वित्तीय फैसले से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें, क्योंकि बाजार की चालें हमेशा अनिश्चितताओं से भरी होती हैं।








