दौड़भाग भरी जिंदगी में खुद को हाइड्रेटेड रखना सेहत के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। इसके लिए अधिकांश लोग अपने साथ पानी की बोतल कैरी करते हैं। जिम जाना हो, ऑफिस का सफर तय करना हो या फिर घर पर रहना हो, प्यास बुझाने का सबसे आसान जरिया पानी की बोतल को सीधे मुंह से लगाना बन गया है। हालांकि, यह छोटी सी और सामान्य दिखने वाली आदत हमारे स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट का सबब बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बोतल से सीधे पानी पीने का यह तरीका अनजाने में कई तरह की बीमारियों को न्योता देता है।
जब हम बिना किसी सावधानी के बोतल के मुंह पर होंठ लगाकर पानी पीते हैं, तो हमारे मुंह के अंदर मौजूद बैक्टीरिया और लार सीधे बोतल की सतह से चिपक जाते हैं। यही वजह है कि मेडिकल एक्सपर्ट्स अब इस आदत को लेकर गंभीर चेतावनी जारी कर रहे हैं। अगर समय रहते इस रूटीन में बदलाव नहीं किया गया, तो यह लापरवाही पेट से जुड़ी समस्याओं और अन्य संक्रमणों का कारण बन सकती है।
लार और बैक्टीरिया का खतरनाक खेल
जब कोई व्यक्ति बोतल के संपर्क में सीधे अपने मुंह को लाता है, तो लार में मौजूद सूक्ष्म जीव बोतल के रिम यानी किनारों पर ट्रांसफर हो जाते हैं। यदि उस बोतल को तुरंत अच्छी तरह धोया न जाए, तो वे बैक्टीरिया वहीं जीवित रहते हैं और पानी के जरिए वापस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। चिकित्सा जगत के जानकारों का मानना है कि यह प्रक्रिया रोगाणुओं के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार करती है।
कैलाश अस्पताल (देहरादून) के सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. गोपाल जी शर्मा का कहना है कि सिर्फ बोतल से सीधे पानी पीने को ही हर बीमारी का एकमात्र कारण नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन यह संक्रमण के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। खतरा इस बात पर भी निर्भर करता है कि बोतल कितनी साफ है, उसमें पानी कब से भरा है और उसका इस्तेमाल कौन-कौन कर रहा है।
"जब कोई व्यक्ति बोतल के मुंह से सीधे पानी पीता है, तो मुंह और लार के बैक्टीरिया बोतल के किनारे तक पहुंच जाते हैं। अगर उसी बोतल से कोई दूसरा व्यक्ति पानी पीता है, तो उसके संपर्क में आने की संभावना रहती है। यही वजह है कि पर्सनल पानी की बोतल को दूसरों के साथ शेयर करने से बचना चाहिए।" — डॉ. गोपाल जी शर्मा, सीनियर कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन
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दूसरों के साथ बोतल शेयर करने के छिपे खतरे
अक्सर देखा जाता है कि सफर के दौरान या ऑफिस में लोग आपस में पानी की बोतलें शेयर कर लेते हैं। यह दोस्ती या अपनेपन की निशानी भले लगे, लेकिन मेडिकल नजरिए से यह बहुत खतरनाक है। यदि बोतल साझा करने वाले किसी व्यक्ति को सर्दी-जुकाम, गले का इंफेक्शन या ओरल हेल्थ से जुड़ी कोई अन्य समस्या है, तो लार के जरिए वह इंफेक्शन दूसरे व्यक्ति तक आसानी से पहुंच सकता है।
यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि पानी की बोतल पूरी तरह व्यक्तिगत वस्तु होनी चाहिए। परिवार के सदस्यों के बीच भी हर व्यक्ति के पास अपनी अलग पानी की बोतल होनी चाहिए, ताकि क्रॉस-कंटामिनेश यानी एक से दूसरे में संक्रमण फैलने के खतरे को पूरी तरह टाला जा सके।
बोतल की सही सफाई न होना है मुख्य वजह
ज्यादातर लोग पानी की बोतल को साफ करने के नाम पर उसमें थोड़ा सा पानी डालते हैं, उसे हिलाते हैं और दोबारा इस्तेमाल के लिए रख देते हैं। यह तरीका बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए नाकाफी है। बोतल के अंदरूनी हिस्से के साथ-साथ उसका ढक्कन और वह जगह जहां मुंह लगाया जाता है, सबसे ज्यादा गंदगी और नमी को आकर्षित करते हैं।
जब बोतल दिनभर बैग में बंद रहती है या इस्तेमाल के बाद गीली हालत में ही बंद कर दी जाती है, तो वहां फंगस और खतरनाक बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं। यदि बोतल से किसी तरह की चिपचिपी परत या हल्की सी भी बदबू आने लगे, तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उसे तत्काल डीप क्लीनिंग की जरूरत है। बोतल को हर बार इस्तेमाल के बाद गर्म पानी और अच्छे लिक्विड सोप या ब्रश की मदद से अंदर और बाहर दोनों तरफ से पूरी तरह साफ करना चाहिए।
मेडिकल रिसर्च में भी सामने आ चुकी है चौंकाने वाली बात
इस विषय पर समय-समय पर कई मेडिकल रिसर्च भी सामने आ चुकी हैं। जर्नल ऑफ फार्मेसी एंड बायोएलाइड साइंसेज (Journal of Pharmacy & BioAllied Sciences) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, रोजाना इस्तेमाल की जाने वाली पानी की बोतलों में कई तरह के खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। ये सूक्ष्म जीव मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं और पाचन तंत्र को बिगाड़ सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि प्लास्टिक की बोतलों के बजाय स्टील या कांच की बोतलों का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है, क्योंकि इन्हें साफ करना आसान होता है और इनमें बैक्टीरिया टिकने की संभावना कम होती है। पानी पीने की अपनी इस छोटी सी आदत में थोड़ा सा सुधार लाकर आप कई तरह के गंभीर संक्रमणों से सुरक्षित रह सकते हैं।








