होम/देश/इंसानी दिमाग में कब आते हैं दो बड़े बदलाव? उम्र के इन पड़ावों पर पूरी तरह बदल जाती है बुद्धि की चाल
देशपढ़ने में समय: 6 मिनट

इंसानी दिमाग में कब आते हैं दो बड़े बदलाव? उम्र के इन पड़ावों पर पूरी तरह बदल जाती है बुद्धि की चाल

वैज्ञानिकों ने हाल ही में इंसानी दिमाग के विकास और उम्र के साथ होने वाले बदलावों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एक बड़े अध्ययन के मुताबिक, मानव मस्तिष्क अपने जीवनकाल में 24 और 60 वर्ष की आयु के आसपास दो सबसे महत्वपूर्ण दौर से गुजरता है, जिसका सीधा असर हमारी सोच और कार्यक्षमता पर पड़ता है।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•27 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
इंसानी दिमाग में कब आते हैं दो बड़े बदलाव? उम्र के इन पड़ावों पर पूरी तरह बदल जाती है बुद्धि की चाल
📷 इंसानी दिमाग में कब आते हैं दो बड़े बदलाव? उम्र के इन पड़ावों पर पूरी तरह बदल जाती है बुद्धि की चाल — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मानव मस्तिष्क के विकास और उम्रदराज होने की प्रक्रिया में 24 और 60 साल की उम्र सबसे अहम पड़ाव मानी गई है।
  • शोधकर्ताओं ने प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स हिस्से का अध्ययन कर यह पाया कि इस दौरान आणविक और कोशिकीय स्तर पर बड़े बदलाव आते हैं।
  • यह नया वैज्ञानिक डेटा अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों के इलाज की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

मानव मस्तिष्क के विकास का नया वैज्ञानिक रहस्य

इंसानी शरीर और उसका सबसे जटिल अंग यानी दिमाग किस तरह काम करता है, इस पर विज्ञान की दुनिया में लगातार नए शोध सामने आते रहते हैं। हाल ही में किए गए एक विस्तृत अध्ययन में मस्तिष्क की लाखों कोशिकाओं का गहराई से विश्लेषण किया गया है। इस रिसर्च से यह बात सामने आई है कि हमारा दिमाग जीवन भर एक जैसी गति से काम नहीं करता, बल्कि उम्र के कुछ खास पड़ावों पर इसके भीतर भारी फेरबदल होते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, इंसानी मस्तिष्क अपने पूरे जीवनचक्र के दौरान लगभग 24 वर्ष और 60 वर्ष की आयु के आसपास दो प्रमुख और बड़े बदलावों से होकर गुजरता है। ये दोनों चरण हमारे मानसिक विकास, सोचने की क्षमता और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। इस शोध के जरिए यह समझने में मदद मिली है कि कोशिकीय स्तर पर हमारा दिमाग समय के साथ कैसे ढलता है और किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

ब्रिटेन और अमेरिका के जाने-माने संस्थानों के शोधकर्ताओं ने नवजात शिशुओं से लेकर 97 वर्ष की आयु तक के लोगों के दाताओं से प्राप्त मस्तिष्क कोशिकाओं की जांच की। इस दौरान वैज्ञानिकों ने मुख्य रूप से 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' पर अपना ध्यान केंद्रित किया। दिमाग का यह हिस्सा निर्णय लेने, योजना बनाने, याददाश्त को मजबूत रखने और जटिल कार्यों को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

इंसानी दिमाग में कब आते हैं दो बड़े बदलाव? उम्र के इन पड़ावों पर पूरी तरह बदल जाती है बुद्धि की चाल
📷 मस्तिष्क की कोशिकाओं और आणविक संरचना का अध्ययन करते वैज्ञानिक

संबंधित खबरें

बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी राहत: टली तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल, अब सुचारू रूप से चलेंगी बैंकिंग सेवाएं

बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी राहत: टली तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल, अब सुचारू रूप से चलेंगी बैंकिंग सेवाएं

डीजे की तेज आवाज और थम गई सांसें: स्कूल क्लासरूम में मासूम बच्ची की मौत, दो गिरफ्तार

डीजे की तेज आवाज और थम गई सांसें: स्कूल क्लासरूम में मासूम बच्ची की मौत, दो गिरफ्तार

सावधान! ब्रिक्स समिट की बताकर वायरल हो रही ग्लोबल लीडर्स की ये सेल्फी, जानिए सच क्या है

सावधान! ब्रिक्स समिट की बताकर वायरल हो रही ग्लोबल लीडर्स की ये सेल्फी, जानिए सच क्या है

पेंशन पाना कर्मचारियों का संवैधानिक हक: 8वें वेतन आयोग और OPS-UPS विवाद के बीच उठा बड़ा सवाल

पेंशन पाना कर्मचारियों का संवैधानिक हक: 8वें वेतन आयोग और OPS-UPS विवाद के बीच उठा बड़ा सवाल

उत्तर प्रदेश में बारिश का कहर: ढह गए मकान और उफनती नदियां, कुदरत के तांडव से जनजीवन अस्त-व्यस्त

उत्तर प्रदेश में बारिश का कहर: ढह गए मकान और उफनती नदियां, कुदरत के तांडव से जनजीवन अस्त-व्यस्त

भारी बारिश से जलजला: सांसद रविकिशन के आलीशान बंगले में भरा पानी, वायरल तस्वीरों ने खोली प्रशासन की पोल

भारी बारिश से जलजला: सांसद रविकिशन के आलीशान बंगले में भरा पानी, वायरल तस्वीरों ने खोली प्रशासन की पोल

सूचना के अधिकार पर घिरी सरकार: आदेश जारी होते ही मचा बवाल, कुछ ही घंटों में वापस लेना पड़ा फैसला

सूचना के अधिकार पर घिरी सरकार: आदेश जारी होते ही मचा बवाल, कुछ ही घंटों में वापस लेना पड़ा फैसला

भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर का ग्लोबल डंका: एक्सपोर्ट में 450% की ऐतिहासिक उछाल, विदेशी बाजारों में मची धूम

भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर का ग्लोबल डंका: एक्सपोर्ट में 450% की ऐतिहासिक उछाल, विदेशी बाजारों में मची धूम

बचपन का तीव्र विकास और 24 साल की उम्र का अहम पड़ाव

बचपन और किशोरावस्था के शुरुआती दौर में इंसानी दिमाग बहुत तेजी से विकसित होता है। इस अवस्था में मस्तिष्क की कोशिकाएं और न्यूरॉन्स लगातार नए संबंध बनाते हैं और खुद को बेहद कम समय में पुनर्गठित करते रहते हैं। यही वजह है कि बच्चे और युवा नई चीजें बहुत जल्दी सीखते हैं और उनका दिमाग हर परिस्थिति के हिसाब से खुद को ढालने में सक्षम होता है।

हालांकि, जैसे-जैसे व्यक्ति वयस्कता की ओर बढ़ता है, इस विकास की रफ्तार में बदलाव आने लगता है। अध्ययन के मुताबिक, लगभग 24 वर्ष की आयु आते-आते मस्तिष्क के भीतर होने वाले इन बदलावों की गति काफी धीमी पड़ जाती है। यह समय हमारे शारीरिक और मानसिक परिपक्वता का एक बड़ा मोड़ होता है, जिसके बाद दिमाग एक स्थिर अवस्था में प्रवेश कर जाता है.

लगभग 24 वर्ष से लेकर 60 वर्ष की आयु तक का लंबा दौर ऐसा होता है जिसमें प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स अपेक्षाकृत स्थिर बना रहता है। इस दौरान व्यक्ति की मानसिक कार्यप्रणाली में स्थिरता आ जाती है और वह अपने अनुभवों के आधार पर फैसले लेना शुरू कर देता है। इस स्थिरता के कारण ही वयस्क जीवन के लंबे वर्षों तक मानसिक क्षमताएं संतुलित बनी रहती हैं।

साठ साल की उम्र के बाद शुरू होते हैं बड़े आणविक बदलाव

जिंदगी का सातवां दशक यानी 60 वर्ष की आयु पार करते ही मस्तिष्क में उम्र से जुड़े प्रभाव अधिक स्पष्ट रूप से नजर आने लगते हैं। इस उम्र के बाद दिमाग की सुरक्षा करने वाली और उसे बनाए रखने वाली कोशिकाएं अधिक सक्रिय हो जाती हैं। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो यह वह समय है जब मस्तिष्क की आंतरिक प्रणाली खुद को सुरक्षित रखने के लिए नए सुरक्षा चक्र तैयार करती है।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि इस आयु वर्ग के बाद मस्तिष्क की दैनिक लय या बायोलॉजिकल क्लॉक में भी बदलाव आने लगता है। युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में निर्णय लेने और याददाश्त से जुड़ी कोशिकाएं एक तय लय में काम करती हैं, लेकिन 60 साल की उम्र के बाद यह पैटर्न कमजोर होने लगता है। इसके स्थान पर नई जैविक प्रक्रियाएं सक्रिय हो जाती हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस उम्र के बाद मस्तिष्क की प्रतिरक्षा कोशिकाएं यानी इम्यून सेल्स तनाव और सूजन से निपटने के लिए एक नई लय विकसित कर लेती हैं। इसके अलावा, तंत्रिका तंतुओं की रक्षा करने वाली कोशिकाएं भी क्षतिग्रस्त तत्वों को साफ करने के लिए शाम के समय ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, जो उम्र बढ़ने की प्राकृतिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है।

मानसिक बीमारियों के इलाज में कैसे मददगार साबित होगा यह शोध

इस व्यापक अध्ययन को 'साइकेड' (PsychAD) परियोजना के अंतर्गत अंजाम दिया गया है, जिसमें वैज्ञानिकों ने लगभग डेढ़ हजार से ज्यादा दान किए गए मस्तिष्कों की कोशिकाओं का बारीकी से विश्लेषण किया। आरएनए विश्लेषण के माध्यम से यह पता लगाया गया कि जीवन के अलग-अलग चरणों में कौन से जीन सक्रिय रहते हैं और उनका मस्तिष्क पर क्या असर पड़ता है।

"यह विस्तृत मानचित्र आणविक स्तर पर स्वस्थ मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत बन गया है, जो भविष्य के चिकित्सा अनुसंधान में बड़ी भूमिका निभाएगा।" — डॉ. किरण गिरधर, सह-लेखक, इकान स्कूल ऑफ मेडिसिन

शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि इस डेटा की मदद से यह पहचान करना आसान हो जाएगा कि सामान्य जैविक गतिविधियों से अलग हटकर रोग पैदा करने वाली प्रक्रियाएं कब और किस चरण में शुरू होती हैं। वर्तमान में इस परियोजना के तहत अल्जाइमर, पार्किंसंस, लेवी बॉडी रोग, वैस्कुलर डिमेंशिया और स्किज़ोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं से जुड़े परिवर्तनों का अध्ययन किया जा रहा है।

निष्कर्ष और भविष्य की दिशा

मानव मस्तिष्क के विकास और उम्र के इन दो बड़े पड़ावों यानी 24 और 60 वर्ष की खोज ने तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में नई उम्मीदें जगाई हैं। अलग-अलग आयु वर्ग में मस्तिष्क की कोशिकाओं की कार्यप्रणाली का यह मानचित्र भविष्य में नई दवाओं और इलाज के तरीकों को विकसित करने में मददगार साबित होगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में इन शोधों के आधार पर मानसिक विकारों की सटीक पहचान और उनके बेहतर उपचार की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाए जा सकेंगे।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

संबंधित खबरें (Related Articles)

बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी राहत: टली तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल, अब सुचारू रूप से चलेंगी बैंकिंग सेवाएंNATIONAL

बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी राहत: टली तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल, अब सुचारू रूप से चलेंगी बैंकिंग सेवाएं

27 सित॰
डीजे की तेज आवाज और थम गई सांसें: स्कूल क्लासरूम में मासूम बच्ची की मौत, दो गिरफ्तारNATIONAL

डीजे की तेज आवाज और थम गई सांसें: स्कूल क्लासरूम में मासूम बच्ची की मौत, दो गिरफ्तार

27 सित॰
सावधान! ब्रिक्स समिट की बताकर वायरल हो रही ग्लोबल लीडर्स की ये सेल्फी, जानिए सच क्या हैNATIONAL

सावधान! ब्रिक्स समिट की बताकर वायरल हो रही ग्लोबल लीडर्स की ये सेल्फी, जानिए सच क्या है

27 सित॰
पेंशन पाना कर्मचारियों का संवैधानिक हक: 8वें वेतन आयोग और OPS-UPS विवाद के बीच उठा बड़ा सवालNATIONAL

पेंशन पाना कर्मचारियों का संवैधानिक हक: 8वें वेतन आयोग और OPS-UPS विवाद के बीच उठा बड़ा सवाल

27 सित॰
उत्तर प्रदेश में बारिश का कहर: ढह गए मकान और उफनती नदियां, कुदरत के तांडव से जनजीवन अस्त-व्यस्तNATIONAL

उत्तर प्रदेश में बारिश का कहर: ढह गए मकान और उफनती नदियां, कुदरत के तांडव से जनजीवन अस्त-व्यस्त

27 सित॰
भारी बारिश से जलजला: सांसद रविकिशन के आलीशान बंगले में भरा पानी, वायरल तस्वीरों ने खोली प्रशासन की पोलPOLITICS

भारी बारिश से जलजला: सांसद रविकिशन के आलीशान बंगले में भरा पानी, वायरल तस्वीरों ने खोली प्रशासन की पोल

27 सित॰
सूचना के अधिकार पर घिरी सरकार: आदेश जारी होते ही मचा बवाल, कुछ ही घंटों में वापस लेना पड़ा फैसलाNATIONAL

सूचना के अधिकार पर घिरी सरकार: आदेश जारी होते ही मचा बवाल, कुछ ही घंटों में वापस लेना पड़ा फैसला

27 सित॰
भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर का ग्लोबल डंका: एक्सपोर्ट में 450% की ऐतिहासिक उछाल, विदेशी बाजारों में मची धूमNATIONAL

भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर का ग्लोबल डंका: एक्सपोर्ट में 450% की ऐतिहासिक उछाल, विदेशी बाजारों में मची धूम

27 सित॰