मानसून की पहली बड़ी बारिश ने खोली दावों की पोल
देशभर में मानसून का असर तेजी से देखने को मिल रहा है और कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बादलों ने ऐसा डेरा डाला है कि सड़कें नदियां बन चुकी हैं और कॉलोनियों के भीतर पानी सैलाब की तरह बह रहा है। मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच जब झमाझम बारिश शुरू हुई, तो नगर निगम और जिला प्रशासन के तमाम वे दावे खोखले साबित हो गए, जो हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जलभराव रोकने के नाम पर किए जाते हैं। इस प्राकृतिक आपदा और प्रशासनिक लापरवाही का शिकार आम आदमी तो हो ही रहा है, बल्कि वीआईपी इलाके और जनप्रतिनिधियों के आशियाने भी इसकी चपेट में आने से नहीं बच सके हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर से सामने आया है, जहां भारी मानसूनी बारिश के चलते अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
गोरखपुर की भौगोलिक स्थिति और यहां के जल निकासी तंत्र को सुधारने के लिए पिछले कुछ वर्षों में विकास के तमाम बड़े दावे किए गए थे। मगर, कुछ ही घंटों की झमाझम बरसात ने इन तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर गलियों तक हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है, जिससे वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस भयंकर जलभराव की चपेट में केवल आम बस्तियां ही नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों से जुड़े खास लोगों के ठिकाने भी आ गए हैं। इस स्थिति ने स्थानीय नागरिकों के मन में प्रशासन के प्रति भारी रोष भर दिया है, क्योंकि अगर जनप्रतिनिधियों के घर सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुध लेने वाला कौन है, यह बड़ा सवाल बन गया है।
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सांसद रवि किशन के आलीशान बंगले में घुसा बाढ़ जैसा पानी
इस मूसलाधार बारिश के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिस घटना की हो रही है, वह गोरखपुर के लोकप्रिय सांसद और प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता रवि किशन के आवास से जुड़ी है। सोशल मीडिया पर उनके आलीशान बंगले के अंदर पानी भरने की तस्वीरें और वीडियो आग की तरह फैल रहे हैं। इन वायरल विजुअल्स में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि सांसद के घर के परिसर और मुख्य द्वार के आसपास भारी जलभराव हो चुका है। बंगले के भीतर पानी घुसने के बाद वहां मौजूद लोगों और कर्मचारियों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ा होगा, इसका अंदाजा इन तस्वीरों को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। एक तरफ जहां रवि किशन अपने संसदीय क्षेत्र के विकास और जनता की समस्याओं को संसद से लेकर सड़क तक उठाने के लिए जाने जाते हैं, वहीं उनके अपने घर का जलमग्न होना अपने आप में एक बड़ी विडंबना को दर्शाता है।
वायरल हो रही इन तस्वीरों के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। लोग चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि जब एक सांसद का घर ही जलभराव से सुरक्षित नहीं रह सका, तो आम शहरवासियों की बस्तियों का क्या हाल होगा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम के अधिकारियों की उदासीनता के कारण शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह बैठ चुका है। हल्की सी बारिश होते ही नाले ओवरफ्लो होने लगते हैं और गंदा पानी सड़कों के साथ-साथ लोगों के घरों में प्रवेश कर जाता है। सांसद के घर में पानी भरने की इस घटना ने इस बात को साबित कर दिया है कि गोरखपुर में जल निकासी की समस्या कितनी विकराल रूप ले चुकी है और इस पर तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें, जनता ने उठाए तीखे सवाल
जैसे ही सांसद रवि किशन के आवास में पानी भरने की तस्वीरें इंटरनेट पर आईं, वे कुछ ही घंटों में वायरल हो गईं। इन तस्वीरों को लेकर ट्विटर और फेसबुक पर तरह-तरह के कमेंट्स और मीम्स की बाढ़ आ गई है। जहां एक ओर रवि किशन के समर्थकों को इस स्थिति पर दुख है, वहीं दूसरी ओर विरोधी दलों के नेताओं और आम जनता ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि शहर में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन मानसून की एक ही बारिश में विकास के सारे पोल खुल जाते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल इन तस्वीरों ने नगर निगम के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि मामला सीधे एक सांसद से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते आला अधिकारियों को भी इसका जवाब देते नहीं बन रहा है。
इस बीच, आम नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है क्योंकि वे हर साल मानसून के सीजन में इसी तरह की नरकीय जिंदगी जीने को मजबूर होते हैं। घरों में पानी घुसने के कारण लोगों का घरेलू सामान खराब हो रहा है, खाने-पीने की चीजें नष्ट हो रही हैं और बीमारी फैलने का खतरा भी काफी बढ़ गया है। जलभराव के चलते बच्चों और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि वे कई बार नगर निगम के अधिकारियों और पार्षदों से सीवर लाइन और नालों की सही से सफाई कराने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर हमेशा लीपापोती कर दी जाती है। अब जबकि सांसद के घर तक पानी पहुंच चुका है, तो शायद प्रशासन की आंखें खुलेंगी और शहरवासियों को इस समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए कोई गंभीर प्रयास किया जाएगा।
प्रशासनिक दावों की खुली पोल और आगे की चुनौतियां
गोरखपुर में जलभराव की यह समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन इस बार सांसद रवि किशन के घर तक पानी पहुंच जाने के कारण इसने एक राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर बड़ा मुद्दा का रूप ले लिया है। जानकारों का मानना है कि शहर का तेजी से हो रहा अनियोजित विकास और नालों पर अवैध कब्जे इस स्थिति के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। जल निकासी के पुराने पड़ चुके रास्तों को आधुनिक समय की जरूरतों के हिसाब से अपग्रेड नहीं किया गया है, जिसके कारण थोड़ी सी भी बारिश होने पर पानी निकलने की कोई जगह नहीं बचती। नगर निगम के पास मानसून से निपटने के लिए जो आकस्मिक योजनाएं होनी चाहिए थीं, वे कागजों तक ही सीमित नजर आती हैं। ज़मीनी स्तर पर पंपिंग सेट लगाने और जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के काम में भारी देरी देखने को मिलती है, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब प्रशासनिक अमले पर भारी दबाव बन गया है कि वे शहर के जल निकासी तंत्र को तुरंत दुरुस्त करें। हालांकि, जब तक मानसून सक्रिय रहेगा, तब तक हर बारिश के साथ लोगों के मन में यही डर बना रहेगा कि कहीं उनका घर फिर से पानी में न डूब जाए। सांसद रवि किशन के आवास की इस घटना ने एक आईना दिखा दिया है कि वीआईपी इलाकों का यह हाल है, तो झुग्गी-झोपड़ियों और निचली बस्तियों में रहने वाले गरीबों की क्या स्थिति होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि दीर्घकालिक योजनाओं पर काम नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है। फिलहाल, जनता को इस आपदा से उबारने और शहर को जलमग्न होने से बचाने के लिए युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाने की आवश्यकता है, ताकि लोगों का प्रशासन से बचा-कुचा भरोसा भी पूरी तरह न डगमगाए।








