भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की छठी समिति की बैठक में मुस्लिम देशों के संगठन OIC (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) को कड़ा जवाब दिया है। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में आतंकी ढांचे के खिलाफ की गई अपनी कार्रवाई पर OIC की टिप्पणी को पूरी तरह खारिज कर दिया। भारत की ओर से यह साफ कर दिया गया कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ देश अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार रखता है और आतंकवादियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
आतंकवाद और अपराधियों पर दो टूक संदेश
अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को खत्म करने के उपायों पर आयोजित एक अहम बैठक के दौरान, लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देब ने ओआईसी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि OIC तथ्य और कल्पना में अंतर करने तथा पीड़ित और अपराधी को अलग-अलग पहचानने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।
सऊदी अरब की ओर से OIC का बयान दिए जाने के बाद भारत ने उस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। देब ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान और PoK में मौजूद आतंकी ढांचे के खिलाफ भारत की कार्रवाई बेहद केंद्रित और नपी-तुली थी, क्योंकि यहीं से लगातार भारत के खिलाफ घातक आतंकी हमलों की साजिश रची जाती रही है।
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पहलगाम हमले और मानवाधिकारों का मुद्दा
भारत ने अपने संबोधन में पिछले दिनों हुए पहलगाम आतंकी हमले का विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस भयावह हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आतंकवाद मानवता के लिए कितना बड़ा नासूर है। 22 अप्रैल को हुए इस हमले में कई बेकसूर नागरिकों और पर्यटकों की जान चली गई थी। भारत ने दोहदाया कि नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने का कोई भी तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता और 'अच्छे या बुरे' आतंकवाद जैसी कोई श्रेणी नहीं होती।
इसके साथ ही, भारत ने सलाह दी कि OIC को अपनी ऊर्जा जम्मू-कश्मीर पर फालतू की बयानबाजी करने के बजाय पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों पर लगानी चाहिए, जहां स्थानीय लोगों के बुनियादी अधिकारों का हनन किया जा रहा है और हिंसा का दौर जारी है।
मजबूत अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे की मांग
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (CCIT) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की मांग दोहराई। भारत ने याद दिलाया कि इसका ड्राफ्ट बहुत पहले पेश किया गया था, लेकिन वैश्विक सहमति के अभाव में यह लटका हुआ है। आज के समय में जब आतंकवादी भर्ती, कट्टरपंथ, फंडिंग और हमलों की योजना के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तब वैश्विक समुदाय को एकजुट होकर एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करने की आवश्यकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो या कूटनीतिक बयानों के दावों की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। साभार: आधिकारिक कूटनीतिक सूत्र / यूएन ब्रॉडकास्ट।






