पाकिस्तान सीमा से सटे रेगिस्तान में सेना का बड़ा युद्धाभ्यास
भारतीय सुरक्षा बलों ने अपनी सामरिक तैयारियों में एक और मील का पत्थर जोड़ते हुए रेगिस्तानी इलाके में हवाई अभ्यास को सफलतापूर्वक पूरा किया है। भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक महत्वपूर्ण हाईवे को अचानक सैन्य रनवे में तब्दील कर दिया गया। इस दौरान वहां का पूरा माहौल सैन्य गतिविधियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। थल सेना के एविएशन बेड़े ने असाधारण कौशल का परिचय देते हुए यह साबित कर दिया कि जरूरत पड़ने पर देश की सड़कें भी आसमान की बुलंदियों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
यह पूरा घटनाक्रम राजस्थान के पश्चिमी छोर पर स्थित कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र में देखने को मिला। आमतौर पर जहां आम वाहन फर्राटा भरते हैं, उस डामर की सड़क को कुछ समय के लिए पूरी तरह सील कर दिया गया था। वायुसेना और थल सेना के बीच बेहतर तालमेल और आधुनिक युद्ध कौशल की यह बानगी देखने लायक थी, जिसने दुश्मनों के खेमे में भी स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भारतीय सेना हर मोर्चे पर मुस्तैद है।
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भारतमाला हाईवे-911 पर आधे घंटे तक थमी वाहनों की आवाजाही
इस सामरिक अभ्यास के केंद्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-911 (NH-911) का एक तयशुदा हिस्सा रहा, जो भारतमाला परियोजना का एक अहम हिस्सा है। स्थानीय प्रशासन और सैन्य अधिकारियों के निर्देशानुसार, युद्धाभ्यास शुरू होने से पहले इस मार्ग पर सामान्य यातायात को पूरी तरह रोक दिया गया। करीब 30 मिनट तक चले इस विशेष ऑपरेशन के दौरान आसमान में केवल सेना के हेलिकॉप्टरों की गूंज सुनाई दे रही थी।
हाईवे के इस खाली स्ट्रेच पर जमीन और आसमान के बीच गजब का समन्वय देखने को मिला। ग्राउंड पर मौजूद तकनीकी टीमों ने विमानों को निर्देश दिए, जबकि पायलटों ने बेहद संकीर्ण और गैर-पारंपरिक स्पेस में अपने विमानों को सुरक्षित रूप से उतारा। इस आधे घंटे के दौरान हाईवे ने पूरी तरह से एक फुल-फ्लेज्ड एयरफील्ड की तरह काम किया, जिससे यह साबित हुआ कि भारतीय सेना आपदा या युद्धकाल जैसी विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए कितनी गंभीर है।
रुद्र, ध्रुव और चेतक हेलिकॉप्टरों ने दिखाई अपनी मारक क्षमता
इस अभ्यास में भारतीय सेना के बेड़े के सबसे भरोसेमंद और मारक हेलिकॉप्टरों ने हिस्सा लिया। इनमें एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) ध्रुव, घातक और सशस्त्र हमलावर हेलिकॉप्टर रुद्र तथा लंबे समय से सेवा दे रहा चेतक हेलिकॉप्टर शामिल था। इन तीनों ने मिलकर एक साझा सामरिक ड्रिल को पूरा किया, जो सेना के विभिन्न प्लेटफार्मों के बीच बेहतरीन एकीकरण को दर्शाता है।
युद्धक मिशनों को अंजाम देने में सक्षम रुद्र हेलिकॉप्टर ने अपनी आक्रामक क्षमता का प्रदर्शन किया, वहीं बहुउद्देशीय ध्रुव ने सैनिकों की त्वरित आवाजाही और रसद आपूर्ति का अभ्यास किया। इसके अलावा, चेतक हेलिकॉप्टर ने अपनी पुरानी और अचूक विश्वसनीयता को एक बार फिर साबित किया। इन विमानों का एक साथ एक ही हाईवे पर उतरना यह बताता है कि सेना अपनी बहुआयामी ताकतों को किसी भी स्थान पर झटपट तैनात करने में पूरी तरह सक्षम है।
रेगिस्तानी चुनौतियों और धूल के गुबार के बीच सटीक लैंडिंग
पश्चिमी राजस्थान का यह रेगिस्तानी क्षेत्र अपनी कठिन जलवायु और चुनौतियों के लिए जाना जाता है। यहां की तेज धूप, रेत के भीषण तूफान, लंबी दूरियां और हवा का बदलता रुख विमान चालकों के लिए हमेशा से एक बड़ी परीक्षा रहा है। इस अभ्यास के दौरान पायलटों को न्यूनतम दृश्यता और धूल के गुबार के बीच अपने विमानों को नियंत्रित करना था।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कठोर वातावरण में ड्रिल करना असल जंग की तैयारी के समान है। हवा की गति, तापमान और सतह की बनावट का सही आकलन करते हुए पायलटों ने जिस तरह से नियंत्रित लैंडिंग और टेक-ऑफ किए, उसने ग्राउंड क्रू और एयरक्रू की पेशेवर दक्षता का लोहा मनवा दिया। रेत के बीच उड़ती धूल के बीच से हेलिकॉप्टरों का उभरना किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था।
वैकल्पिक रनवे की जरूरत और भविष्य की सामरिक नीतियां
आधुनिक सैन्य रणनीतियों में हाईवे को रनवे के रूप में उपयोग करना एक गेम-चेंजर साबित हो रहा है। युद्ध या आपातकालीन परिस्थितियों में दुश्मन देश सबसे पहले पारंपरिक एयरबेस, रनवे और हेलीपैड को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में यदि मुख्य हवाई अड्डे क्षतिग्रस्त हो जाएं या ऑपरेशन के लिहाज से अनुपलब्ध हो जाएं, तो देश के राष्ट्रीय राजमार्ग सेना के लिए संजीवनी का काम करते हैं।
भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय पिछले कुछ वर्षों से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों में ऐसे हाईवे विकसित कर रहा है जिन पर आपातकाल में फाइटर जेट और हेलिकॉप्टर उतारे जा सकें। राजस्थान के इस हिस्से में किया गया सफल अभ्यास इसी व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का एक जीवंत हिस्सा है। यह सामरिक लचीलापन न केवल दुश्मन की रणनीतियों को विफल करता है, बल्कि भारतीय सेना को कहीं से भी त्वरित और घातक प्रतिक्रिया देने की अजेय शक्ति भी प्रदान करता है।
"रेगिस्तानी और सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह के अभ्यास हमारी ऑपरेशनल तैयारियों को धार देते हैं। आपातकाल में पारंपरिक एयरबेस के विकल्प के रूप में हाईवे का उपयोग करने की हमारी क्षमता ने सैनिकों का आत्मविश्वास और अधिक मजबूत किया है।" — रक्षा रक्षा विशेषज्ञ और सैन्य सूत्र








