भारतीय शेयर बाजार में अचानक आई भारी गिरावट से निवेशक हैरान
सोमवार के कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी शेयर बाजार में शानदार तेजी दर्ज की गई थी, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही थी कि भारतीय बाजार की शुरुआत भी मजबूत होगी। शुरुआती घंटों में बाजार का रुख सकारात्मक भी रहा और सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। हालांकि, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बाजार का मिजाज पूरी तरह बदल गया और बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला। कारोबार के अंत में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही नुकसान के साथ लाल निशान पर बंद हुए।
इस अप्रत्याशित उठापटक के कारण निवेशकों की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा पलक झपकते ही स्वाहा हो गया। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की चाल में यह अचानक बदलाव इस बात का संकेत है कि घरेलू स्तर पर निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। जब भी बाजार अपने ऊपरी स्तरों पर होता है, मुनाफावसूली का दौर शुरू होना आम बात है, लेकिन जिस पैमाने पर बिकवाली हुई उसने बाजार के जानकारों को भी चौंका दिया है।
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निवेशकों के दो लाख करोड़ रुपये डूबे, चौतरफा दिखा बिकवाली का दबाव
कारोबार की समाप्ति पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट दर्ज की गई। एक ही दिन के भीतर निवेशकों के दो लाख करोड़ रुपये से अधिक डूब गए। निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन डे-हाई से सेंसेक्स में सैकड़ों अंकों की भारी गिरावट आई, जिससे छोटे और मझोले निवेशकों को भी बड़ा झटका लगा।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का यही आलम देखने को मिला। बाजार के ज्यादातर सेक्टर लाल निशान के साथ बंद हुए। हालांकि, इस बड़ी गिरावट के बीच भी कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान बना रहा, लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए नाकाफी साबित हुआ। कोल इंडिया, इंडिगो और टाइटन जैसे कुछ शेयरों में जरूर बढ़त दर्ज की गई, लेकिन अधिकांश बड़े शेयरों में आई कमजोरी ने सूचकांक को नीचे खींच लिया।
किन सेक्टरों और शेयरों ने बिगाड़ा बाजार का पूरा गणित
मंगलवार के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव फाइनेंशियल, कंज्यूमर गुड्स, कैपिटल गुड्स और आईटी सेक्टर के शेयरों पर रहा। बजाज फिनसर्व, टाटा कंज्यूमर, ट्रेंट और बजाज फाइनेंस जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में एक से डेढ़ प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इन प्रमुख सेक्टरों में चौतरफा बिकवाली होने की वजह से सूचकांक को उबरने का कोई मौका नहीं मिला।
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, जब एक साथ कई बड़े सेक्टरों में मुनाफावसूली शुरू होती है, तो इंडेक्स तेजी से नीचे आता है। ऐसा ही कुछ इस कारोबारी सत्र में भी देखने को मिला, जहां निवेशकों ने जोखिम भरे शेयरों से अपने पैसे निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करना बेहतर समझा।
कच्चे तेल की कीमतें घटने के बाद भी क्यों नहीं संभला बाजार
आमतौर पर कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल के दामों में नरमी आने को भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें घटकर निचले स्तरों के आसपास आ गई थीं, जिससे यह उम्मीद थी कि बाजार में तेजी बनी रहेगी। इसके बावजूद घरेलू बाजार का इस तरह मचल जाना कई सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एक कारक बाजार की दिशा तय नहीं करता है। क्रूड ऑयल सस्ता होने के फायदों पर अन्य वैश्विक और घरेलू चिंताएं हावी हो गई थीं। आयात लागत, घरेलू मुद्रास्फीति और कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर अनिश्चितता का माहौल अभी भी बना हुआ है, जिसका असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ रहा है।
विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक अनिश्चितताएं बनी मुख्य वजह
भारतीय शेयर बाजार में इस समय उतार-चढ़ाव का सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली और पूंजी की निकासी है। इसके अलावा दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक मोर्चे पर अनिश्चितताओं ने निवेशकों के मन में संशय पैदा कर दिया है।
"शेयर बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव वैश्विक और स्थानीय कारकों का मिलाजुला परिणाम होते हैं। निवेशकों को घबराने के बजाय अपनी वित्तीय रणनीति मजबूत रखनी चाहिए और बाजार के बुनियादी फंडामेंटल्स को देखकर ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।" — वरिष्ठ वित्तीय विश्लेषक
आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों के रुख और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि खुदरा निवेशकों को किसी भी अफवाह या पैनिक में आकर अपने शेयर औने-पौने दामों पर बेचने से बचना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाइड रखना चाहिए।







