एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाजों का ऐतिहासिक प्रदर्शन
महाद्वीप के सबसे बड़े खेल महाकुंभ एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाजों ने एक बार फिर तिरंगे का मान बढ़ाया है। शूटिंग रेंज से आई यह खबर देश भर के खेल प्रेमियों के लिए बेहद उत्साहजनक है। प्रतियोगिता के दौरान भारतीय महिला और पुरुष स्कीट टीमों ने अपने सटीक निशानों के दम पर पोडियम पर अपनी जगह पक्की की। खास तौर पर महिला वर्ग में देश की बेटियों ने जो कारनामा कर दिखाया है, उसने खेल इतिहास के पन्नों में अपना नाम अमर कर लिया है।
कड़े मुकाबले और तीन दिनों तक चले मैराथन क्वालिफिकेशन राउंड के बाद भारतीय महिला निशानेबाजों ने कुल 331 अंकों का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक चीन की झोली में गया, जिसने 357 अंक बटोरे, जबकि कजाकिस्तान की टीम ने 336 अंकों के साथ रजत पदक हासिल किया। कड़े संघर्ष के बाद भारतीय महिला तिकड़ी ने तीसरा स्थान प्राप्त करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया और देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
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कौन हैं देश का मान बढ़ाने वाली ये तीनों प्रतिभावान निशानेबाज?
इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे तीन असाधारण महिला शूटर्स—राइजा ढिल्लों, माहेश्वरी चौहान और परिनाज धालीवाल की कड़ी मेहनत छिपी है। इन तीनों खिलाड़ियों ने अपने खेल करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और अपनी मेहनत के दम पर आज इस मुकाम को हासिल किया है। क्वालिफिकेशन राउंड में राइजा और परिनाज ने 125 में से 111-111 अंकों का बेहतरीन प्रदर्शन किया, जबकि माहेश्वरी ने 109 अंक जुटाए।
इनमें से राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल ने व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में भी अपनी जगह सुरक्षित कर ली है, जिससे देश को आगे और भी मेडल मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। राइजा आठवें और परिनाज नौवें स्थान पर रहकर फाइनल में पहुंची हैं। इन खिलाड़ियों का सफर आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है, जो साबित करता है कि लगन और पक्के इरादे से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
माहेश्वरी चौहान का संघर्ष और शूटिंग की दुनिया में सफर
राजस्थान के सियाना में जन्मी माहेश्वरी चौहान आज भारतीय महिला स्कीट शूटिंग की एक मजबूत स्तंभ बन चुकी हैं। उन्होंने महज 15 साल की उम्र में इस खेल से नाता जोड़ा था। उनके परिवार, खासकर उनके दादाजी के खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें इस चुनौतीपूर्ण खेल को चुनने के लिए प्रेरित किया। मात्र 17 साल की उम्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर यह साबित कर दिया था कि वे लंबी रेस की घोड़ा हैं।
माहेश्वरी ने साल 2017 में एशियन चैंपियनशिप में मेडल जीतकर इतिहास रचा था और वह इस मुकाम को हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। इसके बाद उन्होंने पेरिस ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व किया और चौथे स्थान पर रहकर पदक से बहुत करीब से चूक गईं। उनके नाम कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड दर्ज हैं और वह लगातार देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने के सपने को पूरा करने में जुटी हुई हैं।
राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल की शानदार उपलब्धियां
चंडीगढ़ की रहने वाली युवा निशानेबाज राइजा ढिल्लों ने बहुत कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी गहरी छाप छोड़ी है। उन्होंने अपने पिता से प्रेरणा लेकर 16 साल की उम्र में स्कीट शूटिंग की शुरुआत की थी। इंटरनेशनल सर्किट पर अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर वह देश की शीर्ष महिला शूटर्स में शुमार हो चुकी हैं। उन्होंने ओलंपिक कोटा हासिल करने से लेकर जूनियर वर्ल्ड कप तक कई बड़े पदक अपने नाम किए हैं।
दूसरी ओर, पटियाला की परिनाज धालीवाल ने भी शूटिंग रेंज में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। शुरुआती दिनों में ट्रैप शूटिंग आजमाने के बाद उन्होंने स्कीट को चुना, जिसे वह अधिक चुनौतीपूर्ण और रोमांचक मानती हैं। परिनाज ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और दुनिया भर की प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए कई प्रतिष्ठित पदक जीते हैं।
"यह पदक सिर्फ हमारा नहीं, बल्कि हर उस बेटी का है जो खेल की दुनिया में अपना मुकाम बनाना चाहती है। हमारी नजरें अब आगामी प्रतियोगिताओं में देश के लिए और अधिक पदक जीतने पर टिकी हैं।" — भारतीय महिला स्कीट शूटिंग टीम
पुरुष स्कीट टीम ने भी जीता कांस्य पदक
महिला वर्ग की इस ऐतिहासिक सफलता के साथ-साथ भारतीय पुरुष स्कीट टीम ने भी पीछे न रहते हुए शानदार प्रदर्शन किया। अनंतजीत सिंह नारूका, अनुभवी मैराज अहमद खान और उनकी टीम के अन्य सदस्यों ने सटीकता का बेहतरीन नमूना पेश करते हुए देश के लिए कांस्य पदक हासिल किया। भारतीय शूटिंग दल के इस संयुक्त प्रदर्शन ने यह दिखा दिया है कि आज भारत वैश्विक शूटिंग मानचित्र पर एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है।






