त्योहारों के सीजन में विमान यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
दिवाली और छठ जैसे पावन पर्वों पर अपने घर परिवार के साथ खुशियां बांटने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बुरी खबर सामने आई है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो ने अपने विमानों से सफर करना महंगा कर दिया है। एयरलाइन ने घरेलू उड़ानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर भी फ्यूल सरचार्ज में भारी इजाफा करने की घोषणा कर दी है। त्योहारों के इस व्यस्त सीजन में अचानक आए इस फैसले से आम आदमी के बजट पर तगड़ा असर पड़ना तय है।
हवाई यात्रियों को अब टिकट बुक कराते समय पहले की तुलना में अधिक जेब ढीली करनी होगी। कंपनी द्वारा जारी किए गए नए निर्देशों के अनुसार, घरेलू उड़ानों में यात्रा की दूरी के हिसाब से अधिकतम तेरह सौ रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क वसूला जाएगा। वहीं दूसरी ओर, विदेश यात्रा करने वाले मुसाफिरों को दस हजार रुपये तक का अतिरिक्त फ्यूल चार्ज चुकाना पड़ सकता है। इस बदलाव से लंबी दूरी के यात्रियों की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं क्योंकि उनके टिकट का कुल खर्च काफी अधिक हो जाएगा।
इंडिगो एयरलाइन द्वारा उठाया गया यह कदम पिछले छह महीनों के भीतर फ्यूल सरचार्ज में की गई तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले भी कंपनी ने इसी साल मार्च और अप्रैल के महीनों में हवाई किराए में संशोधन किया था। लगातार बढ़ रहे किराए के चलते अब आम नागरिकों के लिए हवाई सफर करना धीरे-धीरे काफी खर्चीला साबित होता जा रहा है, जिससे यात्रियों में चिंता का माहौल देखा जा रहा है।
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क्यों महंगी हुई उड़ानें? जानिए जेट ईंधन की कीमतों का पूरा गणित
एयरलाइन कंपनियों द्वारा इस तरह अचानक किराया बढ़ाए जाने के पीछे मुख्य वजह विमान ईंधन की कीमतों में आई बेतहाशा तेजी है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ की कीमतों में हाल ही में लगभग तेरह प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। एक अक्टूबर से घरेलू एयरलाइंस के लिए जेट ईंधन की प्रति लीटर कीमत में बड़ा उछाल आया है, जिससे एयरलाइन कंपनियों का पूरा वित्तीय गणित गड़बड़ा गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, विमान ईंधन का खर्च किसी भी एयरलाइन कंपनी के कुल संचालन खर्च का लगभग तीस से चालीस प्रतिशत हिस्सा होता है। ऐसे में जब ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो कंपनियों के लिए पुराने किराए पर विमान चलाना घाटे का सौदा बन जाता है। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान जेट फ्यूल की दरों में लगातार हुई बढ़ोतरी ने विमानन कंपनियों को अपने टिकट के दाम और सरचार्ज बढ़ाने के लिए मजबूर कर दिया है।
आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन महीनों के भीतर ही जेट ईंधन के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं, जो पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा बताए जा रहे हैं। ईंधन की कीमतों में इस ऐतिहासिक तेजी के कारण दुनियाभर की विमानन कंपनियां प्रभावित हो रही हैं और कई ने अपने भविष्य के वित्तीय अनुमानों को भी वापस ले लिया है।
दूरी के हिसाब से तय होगा घरेलू उड़ानों का नया फ्यूल सरचार्ज
इंडिगो की तरफ से साफ किया गया है कि घरेलू उड़ानों पर लगने वाला नया फ्यूल सरचार्ज एक समान नहीं होगा, बल्कि यह पूरी तरह से यात्रा की जाने वाली दूरी पर निर्भर करेगा। छोटी दूरी की यात्राओं पर कम अतिरिक्त शुल्क लगेगा, जबकि लंबी दूरी के सफर के लिए यात्रियों को भारी-भरकम राशि चुकानी होगी। कंपनी के इस नए स्ट्रक्चर से यात्रियों को अपनी जेब के अनुसार प्लान करने में मदद मिलेगी।
विस्तृत जानकारी के अनुसार, पांच सौ किलोमीटर तक की दूरी वाले हवाई सफर पर मामूली सरचार्ज जोड़ा गया है। वहीं जैसे-जैसे सफर की दूरी बढ़ती जाएगी, फ्यूल चार्ज की दरें भी उसी अनुपात में बढ़ती चली जाएंगी। उदाहरण के लिए, दो हजार किलोमीटर से अधिक लंबी दूरी की घरेलू उड़ानों के लिए यात्रियों को तेरह सौ रुपये तक का अतिरिक्त फ्यूल चार्ज देना होगा।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल टिकट की बेस प्राइस पर असर पड़ा है, बल्कि कुल यात्रा लागत भी काफी बढ़ गई है। उद्योग जगत से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन के दाम कम नहीं होते हैं, तो अन्य विमान कंपनियां भी इसी रास्ते पर चल सकती हैं और किराए में बढ़ोतरी की घोषणा कर सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर भी पड़ा भारी आर्थिक बोझ
केवल घरेलू उड़ानों के मुसाफिर ही नहीं, बल्कि विदेश यात्रा का सपना देखने वाले यात्रियों को भी इस महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए फ्यूल सरचार्ज में दस हजार रुपये तक की भारी-भरकम बढ़ोतरी की गई है। खाड़ी देशों, दक्षिण-पूर्व एशिया या पश्चिमी देशों की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों के कारण एविएशन फ्यूल की लागत लगातार आसमान छू रही है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में ईंधन की खपत घरेलू उड़ानों की तुलना में बहुत अधिक होती है, यही कारण है कि जब भी जेट फ्यूल महंगा होता है, तो इंटरनेशनल टिकट्स पर इसका असर सबसे ज्यादा और गंभीर रूप से दिखाई देता है.
"विमान ईंधन की लागत हमारी कुल संचालन लागत का सबसे बड़ा हिस्सा होती है। पिछले कुछ हफ्तों में एटीएफ की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण हमें अपने यात्रियों पर यह अतिरिक्त बोझ डालने के लिए मजबूर होना पड़ा है ताकि हमारी सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहें।"— वरिष्ठ विमानन अधिकारी, इंडिगो एयरलाइन
त्योहारों के सीजन में बुकिंग पर पड़ेगा सीधा असर
अक्टूबर से दिसंबर के बीच का समय भारत में त्योहारों और छुट्टियों का सबसे बड़ा सीजन माना जाता है। इस दौरान लोग अपने परिवार से मिलने या छुट्टियों में घूमने के लिए हवाई यात्रा का बड़े पैमाने पर चुनाव करते हैं। ऐसे समय में कीमतों का बढ़ना आम जनता के उत्साह को थोड़ा फीका जरूर कर सकता है।
ग्लोबल एनालिटिक्स फर्म्स की हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस अवधि के दौरान घरेलू उड़ानों की संख्या में कुछ कमी भी दर्ज की गई है। हालांकि एयरलाइंस ने कम उड़ानों के बावजूद बड़ी क्षमता वाले विमानों का संचालन करके सीटों की उपलब्धता को संतुलित रखने की कोशिश की है, लेकिन महंगे टिकटों के कारण यात्रियों को अब अपनी यात्रा की योजना बहुत पहले और सावधानी से बनानी होगी।
यदि आप भी आने वाले हफ्तों में ट्रेन या फ्लाइट से सफर करने की सोच रहे हैं, तो अपने बजट को थोड़ा विस्तार देना जरूरी हो गया है। समय पर टिकट बुक कराने से आप अंतिम समय में होने वाली भारी बढ़ोतरी और सर्ज प्राइसिंग से कुछ हद तक बच सकते हैं, लेकिन बढ़े हुए फ्यूल चार्ज से पूरी तरह राहत मिलना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।






