विज्ञापन • ADVERTISEMENT
होम/देश/जेडीयू में घमासान: अनंत सिंह के बगावती तेवर पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने माना- पार्टी स्तर पर हुई थी बड़ी चूक
देशपढ़ने में समय: 8 मिनट

जेडीयू में घमासान: अनंत सिंह के बगावती तेवर पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने माना- पार्टी स्तर पर हुई थी बड़ी चूक

बिहार की राजनीति में जेडीयू के भीतर वर्चस्व और प्रतिष्ठा की लड़ाई खुलकर सामने आ गई है। मोकामा विधायक अनंत सिंह द्वारा एमएलसी चुनाव में पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि पार्टी नेतृत्व से अतीत में चूक हुई थी।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•6 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•42
🌐Read in English →
शेयर करें:
जेडीयू में घमासान: अनंत सिंह के बगावती तेवर पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने माना- पार्टी स्तर पर हुई थी बड़ी चूक
📷 जेडीयू में घमासान: अनंत सिंह के बगावती तेवर पर केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने माना- पार्टी स्तर पर हुई थी बड़ी चूक — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ जाकर जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी को समर्थन दिया है।
  • केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने अनंत सिंह से मुलाकात के बाद स्वीकार किया कि विधानसभा चुनाव के वक्त अनंत सिंह के विरोध को समय पर नहीं सुलझाया गया था और यह पार्टी नेतृत्व की गलती थी।
  • ललन सिंह के अनुसार, अनंत सिंह ने साफ कर दिया है कि जिन्होंने उनका विरोध किया था, वे उनके लिए चुनाव प्रचार नहीं करेंगे, हालांकि वे कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे।

बिहार की राजनीति में नया भूचाल, जेडीयू के भीतर छिड़ा बड़ा घमासान

बिहार के सियासी गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है और इसका केंद्र जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर चल रहा अंदरूनी कलह है। मोकामा के बाहुबली और चर्चित विधायक अनंत सिंह के बगावती तेवर ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर जिस तरह का अंतर्द्वंद्व सामने आया है, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ जाकर खुला रुख अख्तियार करने वाले अनंत सिंह को मनाने के लिए अब खुद केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को मैदान में उतरना पड़ा है।

यह पूरा विवाद मुख्य रूप से पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव से जुड़ा हुआ है। जेडीयू ने इस सीट से अपने वरिष्ठ नेता और विधान पार्षद नीरज कुमार को मैदान में उतारा है। लेकिन, मोकामा विधायक अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ ताल ठोकते हुए जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के नामांकन के दौरान खुलकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और उन्हें समर्थन का ऐलान किया। इस घटनाक्रम ने सत्तारूढ़ दल के भीतर खलबली मचा दी, क्योंकि एक विधायक का अपनी ही पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ जाना सीधा अनुशासनहीनता और बगावत का संकेत माना जाता है.

अनंत सिंह के इस कदम के बाद पार्टी के भीतर रणनीतिक मंथन का दौर शुरू हो गया। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए वरिष्ठ नेताओं को डैमेज कंट्रोल में लगाया। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने पटना में अनंत सिंह के साथ एक लंबी और महत्वपूर्ण बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य दोनों नेताओं के बीच दशकों पुरानी खटास को पाटना और पार्टी के भीतर एकजुटता का संदेश देना था, ताकि चुनाव में किसी तरह का नुकसान न हो.

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

ललन सिंह ने स्वीकारी पार्टी की पुरानी गलती, कहा- 'ताली एक हाथ से नहीं बजती'

अनंत सिंह के साथ बंद कमरे में हुई इस अहम बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि मोकामा विधायक की कुछ नाराजगी और शिकायतें जायज हैं। ललन सिंह ने बेबाक अंदाज में कहा कि राजनीति में 'ताली एक हाथ से नहीं बजती' और यदि कोई प्रतिक्रिया सामने आई है, तो उसके पीछे कोई क्रिया भी अवश्य रही होगी। उन्होंने माना कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान जब अनंत सिंह के खिलाफ खुला विरोध प्रदर्शन और बयानबाजी हो रही थी, तब पार्टी स्तर पर उचित हस्तक्षेप नहीं किया गया था.

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उस वक्त पार्टी नेतृत्व से चूक हुई थी। अनंत सिंह का यह तर्क था कि जिन लोगों ने चुनाव के दौरान उनके खिलाफ खुलकर काम किया और विरोधी ताकतों का साथ दिया, वे अब उन्हीं के पक्ष में समर्थन की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। ललन सिंह ने बताया कि उन्होंने अनंत सिंह को समझाने का प्रयास किया है और यह सुनिश्चित किया है कि वे इस मामले में कोई भी आक्रामक सार्वजनिक बयानबाजी से बचें। बैठक के बाद अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से बयान न देने की बात पर सहमति जताई है, जिससे पार्टी ने फिलहाल थोड़ी राहत की सांस ली है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ललन सिंह का यह बयान पार्टी के भीतर संतुलन साधने की एक बड़ी कोशिश है। एक तरफ जहां पार्टी अपने आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार को जिताने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं दूसरी तरफ अनंत सिंह जैसे प्रभावशाली क्षेत्रीय क्षत्रप को नजरअंदाज करना भी पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री का मध्यस्थता करना और पार्टी की पुरानी चूकों को स्वीकार करना डैमेज कंट्रोल का एक बेहतरीन राजनीतिक नमूना माना जा रहा है.

नीरज कुमार के प्रति पुरानी नाराजगी और जन सुराज का सियासी दांव

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच की यह तल्खी रातों-रात पैदा नहीं हुई है, बल्कि इसकी जड़ें काफी पुरानी हैं। दोनों नेताओं के बीच वैचारिक और राजनीतिक दूरियां साल 2015 के विधानसभा चुनावों के दौरान तब गहरी हुईं, जब अनंत सिंह ने जेडीयू से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का फैसला किया था। उस समय पार्टी ने नीरज कुमार को आगे किया था, लेकिन इसके बावजूद अनंत सिंह ने अपनी सीट पर शानदार जीत दर्ज की थी। तब से लेकर आज तक दोनों के बीच का यह शीतयुद्ध समय-समय पर सतह पर आता रहा है.

वर्तमान एमएलसी चुनाव में इस पुरानी अदावत ने एक नया मोड़ ले लिया है। जन सुराज पार्टी ने अनुज सिंह को अपना उम्मीदवार बनाकर इस समीकरण को और दिलचस्प बना दिया है। अनंत सिंह का जन सुराज के प्रत्याशी के नामांकन जुलूस में शामिल होना यह साफ संदेश देता है कि वे नीरज कुमार को हराने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने संवाददाताओं के सामने बिना किसी लाग-लपेट के यह जाहिर कर दिया था कि उन्हें पार्टी की आधिकारिक रणनीति से कोई मतलब नहीं है, क्योंकि उनके व्यक्तिगत विरोधियों ने उनके खिलाफ अभियान चलाया था और वे उसी भाषा में जवाब देना जानते हैं.

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों की अहमियत को उजागर कर दिया है। जेडीयू के भीतर की यह गुटबाजी सिर्फ दो नेताओं की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि यह पार्टी के अंदरूनी शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर रही है। एक तरफ जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता इस संकट को सुलझाने में जुटे हैं, वहीं विपक्षी दल इस बगावत पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि इसका राजनीतिक फायदा उठाया जा सके.

पार्टी के भीतर दोहरी लाइन और आगे की राजनीतिक चुनौतियां

इस पूरे घटनाक्रम का एक और पहलू यह भी है कि पार्टी के भीतर अलग-अलग चेहरों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। एक तरफ जहां केंद्रीय मंत्री ललन सिंह अनंत सिंह के साथ संवाद स्थापित कर उनके गिले-शिकवे दूर करने में लगे हैं, वहीं पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं और रणनीतिकारों का रुख अलग नजर आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि जेडीयू के भीतर नेतृत्व के स्तर पर फैसलों को लेकर समन्वय की कुछ कमी जरूर खल रही है, जिसे समय रहते ठीक करना पार्टी के लिए बेहद जरूरी है.

अनंत सिंह ने साफ कर दिया है कि वे भले ही कोई सार्वजनिक बयान नहीं देंगे, लेकिन वे आधिकारिक उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार करने नहीं जाएंगे। यह जेडीयू के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि मोकामा क्षेत्र में अनंत सिंह का प्रभाव और जनाधार काफी मजबूत है। यदि वे चुनाव प्रचार से दूर रहते हैं, तो पार्टी उम्मीदवार के लिए राह आसान नहीं होगी। विधान परिषद चुनाव के इस मुकाबले में अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस आंतरिक कलह को चुनाव से पहले किस हद तक थाम पाने में सफल होता है.

"अगर कोई क्रिया होगी तो प्रतिक्रिया भी होगी, ताली एक हाथ से नहीं बजती। अनंत सिंह का विधानसभा चुनाव के वक्त विरोध हुआ था, उस समय पार्टी ने इसे नहीं सुलझाया था। पार्टी नेतृत्व से चूक हुई थी। उन्होंने कहा कि जिसने मेरा विरोध किया, हम उसके लिए वोट नहीं मांगेंगे। हालांकि, वे कोई सार्वजनिक बयान नहीं देने पर सहमत हो गए हैं।" — ललन सिंह, केंद्रीय मंत्री एवं जेडीयू नेता

निष्कर्ष के तौर पर, बिहार विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले जेडीयू के भीतर मची यह उठापटक पार्टी की सांगतिक एकता के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गई है। एक तरफ जहां डैमेज कंट्रोल के लिए दिग्गजों को मैदान में उतारना पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच का यह अविश्वास पार्टी की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पार्टी नेतृत्व अनंत सिंह की नाराजगी को पूरी तरह खत्म कर पाता है या फिर यह भीतरघात चुनाव परिणाम में बड़ा उलटफेर साबित होता है।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें (Related Articles)

उपेंद्र कुशवाहा का राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे पर तीखा हमला, कहा- बस चलता तो सरकार गिरा देतेNATIONAL

उपेंद्र कुशवाहा का राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे पर तीखा हमला, कहा- बस चलता तो सरकार गिरा देते

5 अक्टू॰39
यूपी चुनाव की जंग: समाजवादी पार्टी से 200 सीटों की मांग कर रही कांग्रेस, छोटे दलों को साधने की नई रणनीतिNATIONAL

यूपी चुनाव की जंग: समाजवादी पार्टी से 200 सीटों की मांग कर रही कांग्रेस, छोटे दलों को साधने की नई रणनीति

6 अक्टू॰24
68500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति: बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास पर अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शनNATIONAL

68500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति: बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास पर अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शन

5 अक्टू॰28
ममता बनर्जी का मेडिकल रिकॉर्ड लीक होने पर घमासान: अस्पतालों को कानूनी नोटिस भेजकर उठाए बड़े सवालNATIONAL

ममता बनर्जी का मेडिकल रिकॉर्ड लीक होने पर घमासान: अस्पतालों को कानूनी नोटिस भेजकर उठाए बड़े सवाल

5 अक्टू॰16
एस. जयशंकर का बड़ा बयान: अमेरिका के अकेले चलने और चीन की बढ़ती ताकत पर विदेश मंत्री की दो टूकNATIONAL

एस. जयशंकर का बड़ा बयान: अमेरिका के अकेले चलने और चीन की बढ़ती ताकत पर विदेश मंत्री की दो टूक

5 अक्टू॰24
काम की बात: भूकंप आते ही खुद रूक जाएगी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन? जानें आखिर क्या है ये तकनीकNATIONAL

काम की बात: भूकंप आते ही खुद रूक जाएगी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन? जानें आखिर क्या है ये तकनीक

6 अक्टू॰37
विज्ञापन • ADVERTISEMENT