बिहार की राजनीति में विधान परिषद (MLC) चुनावों की सुगबुगाहट के बीच पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का दंगल बेहद दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम जब पटना के निर्वाचन कार्यालय के बाहर पहुंची, तो वहां का माहौल किसी बड़े सियासी त्यौहार से कम नहीं था। यहां से निर्दलीय या समर्थित उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरने निकले अनुज सिंह के नामांकन ने राज्य की मुख्यधारा की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा किया है। इस पूरे घटनाक्रम में जो सबसे चौकाने वाली बात रही, वह थी बाहुबली अनंत सिंह की खुली मौजूदगी और हवा में गूंजते नीतीश कुमार व निशांत कुमार के समर्थन में नारे।
खुली जीप में सवार अनंत-अनुज और शक्ति प्रदर्शन के मायने
नामांकन प्रक्रिया के दौरान जब अनुज सिंह और बाहुबली नेता अनंत सिंह एक खुली जीप में सवार होकर निकले, तो उनके समर्थकों का हुजूम देखते ही बनता था। सड़कों पर उमड़ी भीड़ और आतिशबाजी के बीच केवल स्थानीय मुद्दों की ही नहीं, बल्कि राज्य के सत्ता समीकरणों की चर्चा जोरों पर थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मौके पर समर्थकों की खातिरदारी के लिए करीब 50 हजार रसगुल्ले तक बनवाए गए थे, जो यह बताने के लिए काफी था कि इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया गया है। भीड़ के बीच से लगातार 'नीतीश-ललन जिंदाबाद' के नारे गूंज रहे थे, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जमीन पर हवा किस तरफ बह रही है।
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प्रशांत किशोर की 'जनसुराज' की गैर-मौजूदगी और खामोशी
एक तरफ जहां पारंपरिक और बाहुबली धड़े अपनी ताकत दिखाने के लिए सड़कों पर उतरे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की 'जनसुराज' पार्टी की इस पूरे घटनाक्रम में दूरी चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशांत किशोर लगातार राज्य में नई राजनीतिक संस्कृति और बदलाव का दावा कर रहे हैं, लेकिन पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में इस तरह के बाहुबली शक्ति प्रदर्शन से दूरी बनाना या वहां सक्रिय नजर न आना कई तरह के सियासी कयासों को जन्म दे रहा है। क्या जनसुराज इस सीट पर अपनी रणनीति बदल रही है या फिर यह उनकी किसी लंबी योजना का हिस्सा है, यह आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगा।
तिरहुत और मुजफ्फरपुर के अन्य सियासी घटनाक्रम
सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि बिहार के अन्य हिस्सों में भी एमएलसी चुनावों और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। तिरहुत MLC चुनाव में भाजपा समर्थित शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह ने भी अपना पर्चा दाखिल कर दिया है, जिससे एनडीए खेमे में चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है। हालांकि, इसी बीच मुजफ्फरपुर के एलएन मिश्रा कॉलेज के पास सीनियर और जूनियर छात्रों के बीच हुई भिड़ंत और चाकूबाजी की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं, जहां दो छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
निष्कर्ष और भविष्य का राजनीतिक प्रभाव
बिहार की राजनीति में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र हमेशा से वैचारिक और बौद्धिक बहसों के केंद्र रहे हैं, लेकिन हालिया तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। अनुज सिंह के नामांकन में बाहुबली शैली का शक्ति प्रदर्शन और सत्ता पक्ष के शीर्ष नेतृत्व के नारे इस बात का संकेत देते हैं कि आने वाले चुनाव में मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प होने वाला है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए रखेगा और यह देखता रहेगा कि जमीन पर आम मतदाताओं की असल प्राथमिकताएं इन सियासी ड्रामों के बीच कहां ठहरती हैं।








